क्या अनंत सिंह फंस गए? दिल्ली में ललन सिंह और संजय झा एकसाथ दिखे, इशारों-इशारों में कही ‘सियासी बात’!

क्या अनंत सिंह फंस गए? दिल्ली में ललन सिंह और संजय झा एकसाथ दिखे, इशारों-इशारों में कही ‘सियासी बात’!


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Anant Singh News: मोकामा के विधायक अनंत सिंह की विधायकी पर संकट गहरा गया है. जेडीयू प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा आज विधानसभा पहुंचे और विधानसभा अध्यक्ष को अनंत सिंह की सदस्यता खत्म करने के लिए अनुशंसा पत्र सौंपा. इसी कड़ी में दिल्ली में भी एक घटनाक्रम हुआ है जो राजनीतिक चर्चा में है. अनंत सिंह पर जदयू की कार्रवाई के बाद पार्टी के वरिष्ठ नेता केंद्रीय मंत्री ललन सिंह और जदयू के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा एकसाथ देखे गए. इसी बीच जब अनंत सिंह प्रकरण पर इन दोनों नेताओं से प्रतिक्रिया मांगी गई तो दोनों ही नेताओं के बॉडी लैंग्वेज ने जदयू के भीतर की कहानी को काफी हद तक जाहिर कर दिया है.

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पटना. मोकामा विधायक अनंत सिंह के जनता दल यूनाइटेड (JDU) से निष्कासन के बाद बिहार की राजनीति में जहां गर्मागर्मी देखी जा रही है, वहीं सियासी हलचल भी तेज है. पार्टी ने अनंत सिंह और उनकी पत्नी नीलम देवी को छह साल के लिए निष्कासित कर दिया है. अब जदयू के प्रदेश अध्यक्ष अनुशंसा पत्र भी विधानसभा अध्यक्ष प्रेम कुमार को सौंप दिया है. इसके पहले कहा जा रहा था कि अनंत सिंह जदयू के भीतर दो खेमों की गुटबंदी के शिकार हुए हैं. इशारों में चर्चा थी कि जेडीयू के वरिष्ठ नेता ललन सिंह और कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा अलग-अलग खेमों में है. लेकिन, इसी घटनाक्रम के बीच ललन सिंह और संजय झा दिल्ली में साथ-साथ नजर आए हैं. इतना ही नहीं, अनंत सिंह पर जदयू की कार्रवाई के को लेकर पार्टी इन दोनों ही वरिष्ठ नेताओं की प्रतिक्रिया भी चर्चा में है.

दरअसल, दिल्ली में जब केंद्रीय मंत्री ललन सिंह और जदयू के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा से इस कार्रवाई को लेकर सवाल पूछा गया, तो ललन सिंह ने संजय झा की ओर इशारा करते हुए कहा, “ये संजय झा जी का विशेषाधिकार है.” वहीं, संजय झा ने इस मुद्दे पर कोई टिप्पणी नहीं की. खास बात यह है कि दोनों नेताओं की यह प्रतिक्रिया ऐसे समय आई है, जब अनंत सिंह प्रकरण ने जदयू के भीतर की राजनीति को चर्चा में ला दिया है.

सवाल पर ललन सिंह ने संजय झा की ओर किया इशारा

दिल्ली में मीडिया ने ललन सिंह और संजय झा से अनंत सिंह पर हुई कार्रवाई को लेकर सवाल किया. इस पर ललन सिंह ने खुद जवाब देने के बजाय संजय झा की तरफ इशारा किया और कहा कि यह संजय झा जी का विशेषाधिकार है. ललन सिंह के इस जवाब के बाद संजय झा से भी इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया की उम्मीद थी, लेकिन उन्होंने कुछ नहीं कहा. इस तरह सवाल के जवाब में एक नेता ने दूसरे की ओर इशारा किया और दूसरे नेता ने चुप्पी बनाए रखी.

अनंत सिंह और नीरज कुमार के बीच विवाद से शुरू हुआ मामला

बता दें कि अनंत सिंह और जदयू के विधान परिषद उम्मीदवार नीरज कुमार के बीच विवाद पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के चुनाव के दौरान सामने आया था. अनंत सिंह ने पार्टी उम्मीदवार नीरज कुमार के खिलाफ खुलकर बयान दिए और जन सुराज के उम्मीदवार अनुज सिंह को समर्थन देने की खुली घोषणा की थी. 23 अक्टूबर को जब मतदान संपन्न हो गए तो जदयू ने अनंत सिंह पर कार्रवाई की और अनंत सिंह और उनकी पत्नी नीलम देवी को पार्टी से निकाल दिया.

हालांकि, इसके पहले भी पार्टी के भीतर इस मामले को सुलझाने की जिम्मेदारी पहले ललन सिंह को दी गई थी. बीते 2 अक्टूबर को संजय झा ने सार्वजनिक रूप से कहा था कि अनंत सिंह और नीरज कुमार के बीच विवाद को सुलझाने के लिए ललन सिंह को जिम्मेदारी दी गई है. लेकिन, इसके बाद के घटनाक्रम में ललन सिंह ने कहा था कि अनंत सिंह के साथ भी न्याय नहीं हुआ था. तब ऐसा लगा था कि ललन सिंह ने अनंत सिंह के प्रति सहानुभूति दिखाई है. लेकिन, आज जब ललन सिंह और संजय झा एक साथ देखे गए तो राजनीति के जानकार इसको अलग दृष्टि से देख रहे हैं.

क्या है इस बयान का राजनीतिक संकेत?

अनंत सिंह पर कार्रवाई के बाद ललन सिंह का संजय झा की ओर इशारा करना और संजय झा का कोई टिप्पणी नहीं करना राजनीतिक चर्चा का विषय बन गया है. खासकर इसलिए कि इस पूरे विवाद में दोनों नेताओं की भूमिका पहले भी सामने आ चुकी है. इसके बाद जब 26 अक्टूबर को दिल्ली में ललन सिंह ने संजय झा की ओर संकेत किया तो सबकी नजर संजय झा पर टिक गई, लेकिन संजय झा ने इस मुद्दे पर कुछ भी कहने से परहेज किया. उन्होंने चुप्पी साधे रखी और कोई प्रतिक्रिया नहीं दी.

जेडीयू के अंदर अनंत सिंह को लेकर चल रही खींचतान के बीच दोनों नेताओं का ये रिएक्शन कई सियासी मायने निकाल रहा है. बता दें कि अनंत सिंह पर पार्टी से निष्कासन की कार्रवाई के बाद से जेडीयू में बयानबाजी तेज है. दिल्ली में दोनों नेताओं का एक साथ होना और एक का दूसरे की तरफ इशारा करना, इसे सत्ता के संतुलन से जोड़कर देखा जा रहा है. फिलहाल इतना ही स्पष्ट है कि अनंत सिंह प्रकरण पर पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने सार्वजनिक तौर पर कोई साझा प्रतिक्रिया नहीं दी है. आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर जदयू नेतृत्व का रुख और पार्टी के भीतर की प्रतिक्रिया अहम रहेगी.



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