पटना. बिहार ने दुनिया के म्यूजियम के नक्शे पर बड़ी छलांग लगाई है. पटना स्थित बिहार म्यूजियम को दुनिया के 100 सर्वश्रेष्ठ म्यूजियम की सूची में जगह मिली है. ‘Worth a Journey’ की रैंकिंग में बिहार म्यूजियम को दुनिया में 9वां स्थान मिला है, जबकि एशिया में इसे पहला स्थान हासिल हुआ है. इस उपलब्धि के बाद एक बार फिर बिहार म्यूजियम चर्चा में है. खास बात यह है कि पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बिहार म्यूजियम को एक तरह से ड्रीम प्रोजेक्ट के रूप में तैयार करवाया था.
बता दें, बिहार म्यूजियम की परिकल्पना और निर्माण की पूरी प्रक्रिया तत्कालीन नीतीश कुमार के रहते आगे बढ़ी. वर्ष 2013 में नीतीश कुमार ने पटना में करीब 13.5 एकड़ में बनने वाले इस म्यूजियम के निर्माण कार्य की शुरुआत की थी. उस समय इसे करीब 530 करोड़ रुपये की लागत वाला विश्वस्तरीय म्यूजियम बताया गया था. रिपोर्टों में इसे नीतीश कुमार का ड्रीम प्रोजेक्ट भी कहा गया.
इस परियोजना की शुरुआती स्वीकृति 2012 में करीब 400 करोड़ रुपये के अनुमानित राशि के साथ हुई थी. इसमें निर्माण, आर्किटेक्ट की कंसल्टेंसी और इंटीरियर से जुड़े खर्च शामिल थे. बाद में परियोजना की अनुमानित लागत बढ़कर करीब 530 करोड़ रुपये तक पहुंची. लागत बढ़ने को लेकर उस समय बिहार म्यूजियम पर सवाल भी उठे थे.
पटना में कहां है बिहार म्यूजियम?
बिहार म्यूजियम पटना के बेली रोड पर किदवईपुरी के पास स्थित है. यह आधुनिक वास्तुकला और बिहार की प्राचीन विरासत का अनोखा मेल है. करीब 13 एकड़ से ज्यादा क्षेत्र में फैला यह म्यूजियम 2015 में जनता के लिए खोला गया.
क्या है बिहार म्यूजियम में खास?
बिहार म्यूजियम की सबसे बड़ी खासियत इसका आधुनिक डिजाइन और यहां प्रदर्शित बिहार की हजारों साल पुरानी विरासत है. यहां प्रागैतिहासिक काल से लेकर प्राचीन, मध्यकालीन और आधुनिक बिहार तक की कहानी अलग-अलग गैलरी के जरिए दिखाई गई है.
म्यूजियम की हिस्ट्री गैलरी में मौर्य काल, अशोक, बौद्ध और जैन परंपरा, गुप्त काल, पाल काल, मुगल और शेरशाह सूरी के दौर के साथ बिहार की कला और संस्कृति से जुड़ी चीजों को प्रदर्शित किया गया है. यहां की दीदारगंज यक्षी प्रमुख आकर्षणों में शामिल है. इसके अलावा पटना स्कूल ऑफ पेंटिंग, कांस्य प्रतिमाएं, टेराकोटा कलाकृतियां, बौद्ध-जैन कला और सिक्कों का संग्रह भी दर्शकों को आकर्षित करता है.
बच्चों के लिए भी है खास इंतजाम, पटना में कहां है?
बिहार म्यूजियम पटना के बेली रोड यानि नेहरू पथ पर स्थित है. बिहार म्यूजियम में बच्चों के लिए अलग Children’s Gallery बनाई गई है. इसमें इतिहास, वन्यजीव, कला और संस्कृति से जुड़े इंटरैक्टिव अनुभव दिए गए हैं. यही वजह है कि यह म्यूजियम सिर्फ इतिहास और कला में रुचि रखने वालों के लिए ही नहीं, बल्कि परिवार और स्कूली बच्चों के लिए भी आकर्षण का केंद्र है.
कितना है बिहार म्यूजियम का टिकट?
बिहार म्यूजियम की आधिकारिक वेबसाइट के मुताबिक भारतीय वयस्क के लिए सामान्य समय में टिकट 100 रुपये और बच्चों के लिए 50 रुपये है. शाम 5 से 7 बजे के बीच भारतीय वयस्क के लिए टिकट 50 रुपये और बच्चों के लिए 25 रुपये है. विदेशी पर्यटकों के लिए सामान्य टिकट 500 रुपये और बच्चों के लिए 250 रुपये है.
म्यूजियम में गैलरी के अलावा रेस्तरां, म्यूजियम शॉप, लाइब्रेरी, लगेज रूम, बेबी केयर सेंटर, पार्किंग और व्हीलचेयर जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध हैं.
अब दुनिया में 9वें नंबर पर पहुंचा
जर्मनी से संपादित ‘Worth a Journey’ की रैंकिंग में दुनिया के अलग-अलग क्षेत्रों और श्रेणियों के चुनिंदा स्थानों को शामिल किया गया है. प्रकाशन की 37 सूचियों में 140 देशों के करीब 3,700 स्थानों को प्रस्तुत किया गया है. इसी की म्यूजियम रैंकिंग में बिहार म्यूजियम को दुनिया में 9वां और एशिया में पहला स्थान मिला है.
बिहार म्यूजियम के अपर निदेशक अशोक कुमार सिंह ने इस उपलब्धि को बड़ी सफलता बताया. उन्होंने कहा कि दुनिया के सर्वश्रेष्ठ म्यूजियम की सूची में 9वां स्थान और एशिया में पहला स्थान मिलना बिहार के लिए गौरव की बात है. उन्होंने कहा कि म्यूजियम लगातार अपनी गैलरी, संग्रह, प्रस्तुतीकरण और दर्शकों के अनुभव को बेहतर बनाने की दिशा में काम कर रहा है.
दो म्यूजियम को जोड़ने की तैयारी
बिहार म्यूजियम की अहमियत आने वाले दिनों में और बढ़ सकती है. पटना म्यूजियम और बिहार म्यूजियम को जोड़ने के लिए करीब 1.5 किलोमीटर लंबी अंडरग्राउंड हेरिटेज टनल का निर्माण चल रहा है. इस परियोजना की लागत करीब 542 करोड़ रुपये है. प्रस्तावित टनल में आर्ट गैलरी, पैदल रास्ता, लिफ्ट, सुरक्षा व्यवस्था और बैटरी से चलने वाली गोल्फ कार्ट जैसी सुविधाएं होंगी. इसका उद्देश्य दोनों म्यूजियम को एक ही हेरिटेज सर्किट से जोड़ना है.
इस तरह नीतीश कुमार के ड्रीम प्रोजेक्ट के तौर पर शुरू हुआ बिहार म्यूजियम आज न केवल बिहार की विरासत को सहेजने का बड़ा केंद्र बन चुका है, बल्कि वैश्विक म्यूजियम रैंकिंग में 9वें स्थान पर पहुंचकर राज्य के लिए एक नई पहचान भी बना रहा है.