असफलता से नहीं डरे, भाई की प्रेरणा को बनाया ताकत; BPSC में 17वीं रैंक हासिल कर DSP बने अभिनव परासर

असफलता से नहीं डरे, भाई की प्रेरणा को बनाया ताकत; BPSC में 17वीं रैंक हासिल कर DSP बने अभिनव परासर


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BPSC Success Story: साधारण किसान परिवार से ताल्लुक रखने वाले अभिनव परासर ने कड़ी मेहनत और भाई की प्रेरणा से बीपीएससी परीक्षा में 17वीं रैंक हासिल कर पूर्णिया के डीएसपी का पद संभाला है. उन्होंने रोजाना 8 घंटे पढ़ाई कर और दूसरों को पढ़ाकर यह सफलता हासिल की है.

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Purnia DSP Abhinav Parasar Success Story: पूर्णिया के वर्तमान सदर एसडीपीओ यानी डीएसपी अभिनव परासर की संघर्ष और सफलता की कहानी कई युवाओं के लिए प्रेरणादायक है. साधारण किसान परिवार से आने वाले अभिनव ने अपनी मेहनत के दम पर बीपीएससी की परीक्षा में 17वीं रैंक हासिल की. फिर डीएसपी के पद पर चयनित हुए. उनकी कहानी बताती है कि लगातार मेहनत और सही दिशा में तैयारी से मुश्किल लक्ष्य भी हासिल किया जा सकता है. अभिनव परासर ने लोकल 18 से खास बातचीत में बताया कि उनके पिता गांव में सामान्य किसान हैं. जबकि उनकी मां गृहिणी हैं. प्रशासनिक सेवा में जाने का श्रेय वह अपने बड़े भाई को देते हैं. उन्होंने बताया कि बड़े भाई उन्हें बार-बार यूनिफॉर्म वाली नौकरी के लिए प्रेरित करते थे. इसी प्रेरणा ने उन्हें प्रशासनिक सेवा की तैयारी के लिए प्रोत्साहित किया.

पश्चिम बंगाल में पढ़ाई, बिहार में नौकरी का सपना
डीएसपी अभिनव ने बताया कि उनकी पढ़ाई बचपन से ही पश्चिम बंगाल में हुई. इसके बाद उन्होंने कंप्यूटर साइंस में इंजीनियरिंग की पढ़ाई की. पढ़ाई के दौरान उन्होंने पश्चिम बंगाल की कई सिविल सर्विस परीक्षाएं भी पास कीं. लेकिन उनका सपना बिहार में रहकर नौकरी करने का था. उन्होंने बताया कि बचपन में उनकी पढ़ाई भी अन्य बच्चों की तरह सामान्य तरीके से हुई. परीक्षा का पैटर्न समझने के बाद उन्होंने प्री, मेंस और इंटरव्यू की तैयारी की. इसके बाद BPSC 2022 में 17वीं रैंक हासिल कर डीएसपी पद पर चयनित हुए.

रोज 8 घंटे पढ़ाई, दूसरों को पढ़ाने से भी मिली मदद
डीएसपी अभिनव के मुताबिक उन्होंने तैयारी के दौरान रोजाना करीब 8 घंटे नियमित पढ़ाई की. उन्हें दूसरों को पढ़ाने का भी काफी शौक था. इसलिए वह एक संस्थान में पढ़ाया भी करते थे. उनका मानना है कि दूसरों को पढ़ाने से विषयों की समझ और बेहतर होती है. उन्होंने बताया कि खुद पढ़ने के साथ-साथ वह छात्रों को भी पढ़ाते थे. फिर पूरे सिलेबस को दोबारा रिवाइज करते थे. इस प्रक्रिया से उन्हें अपनी तैयारी में काफी फायदा मिला. लगातार पढ़ाई और रिवीजन के जरिए उन्होंने परीक्षा की तैयारी पूरी की. फिर सफलता हासिल की.

सफलता में परिवार का रहा अहम योगदान
अभिनव ने कहा कि किसी भी सफलता में परिवार का सहयोग बेहद महत्वपूर्ण होता है. उनके माता-पिता ने पढ़ाई के दौरान पूरा सहयोग दिया. बड़े भाई का मार्गदर्शन और प्रोत्साहन भी उनके लिए बेहद महत्वपूर्ण रहा. उनका कहना है कि परिवार का सपोर्ट मिलने से लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित करना आसान हो जाता है. अपनी सफलता का श्रेय वह परिवार के सहयोग और अपनी लगातार मेहनत को देते हैं.

युवाओं के लिए सफलता का मूलमंत्र
युवाओं को संदेश देते हुए डीएसपी अभिनव परासर ने कहा कि पढ़ाई में उनकी हमेशा से रुचि रही है. उन्होंने युवाओं से अपील की कि एक हार के बाद अपनी मंजिल को नहीं छोड़ना चाहिए. उन्होंने आगे बतलाया कि असफलता के बाद भी लगातार मेहनत जारी रखनी चाहिए. अगर कोई व्यक्ति ईमानदारी से प्रयास करता रहे तो उसे एक न एक दिन सफलता जरूर मिलती है. यही लगातार मेहनत और लक्ष्य के प्रति समर्पण उनकी सफलता का मूलमंत्र रहा.



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