ग्वालियर में राजस्थानी कांजी बड़े का स्वाद, गैस और पाचन में राहत की उम्मीद से खाते लोग, 9 साल से जमा रहे पहचान

ग्वालियर में राजस्थानी कांजी बड़े का स्वाद, गैस और पाचन में राहत की उम्मीद से खाते लोग, 9 साल से जमा रहे पहचान


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राजस्थान के पारंपरिक स्वाद को ग्वालियर तक पहुंचाने वाले नारायण लाल शर्मा पिछले 9 वर्षों से शहर में कांजी बड़े और दही पकौड़ी का कारोबार कर रहे हैं.नारायण लाल शर्मा ने बताया कि कांजी बड़े तैयार करने के लिए सबसे पहले मूंग की दाल से बड़े बनाए जाते हैं। इसके बाद कांजी का पानी राई और हींग की मदद से तैयार किया जाता है. राई वाले इस पानी को लगभग 3 से 4 दिन तक रखा जाता है, ताकि उसमें खट्टापन और पारंपरिक स्वाद विकसित हो सके. इसके बाद तैयार कांजी में बड़े डालकर ग्राहकों को परोसे जाते हैं.दुकानदार

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राजस्थान के पारंपरिक स्वाद को ग्वालियर तक पहुंचाने वाले नारायण लाल शर्मा पिछले 9 वर्षों से शहर में कांजी बड़े और दही पकौड़ी का कारोबार कर रहे हैं. जय विलास पैलेस के ठीक गेट के सामने, संकट मोचन हनुमान जी के पास स्थित उनकी दुकान पर लोग इस खास स्वाद का आनंद लेने पहुंचते हैं. दुकानदार के अनुसार, कांजी बड़े सिर्फ स्वाद के लिए ही नहीं, बल्कि कई लोग इन्हें पेट की समस्याओं और गैस से राहत की उम्मीद में भी खाना पसंद करते हैं.

नारायण लाल शर्मा मूल रूप से राजस्थान के रहने वाले हैं. उन्होंने बताया कि वे करीब 17 वर्षों से कांजी बड़े के व्यवसाय से जुड़े हुए हैं और पिछले 9 वर्षों से ग्वालियर में अपना कारोबार कर रहे हैं. उनके मुताबिक, यहां के लोगों का प्यार और नियमित ग्राहकों का भरोसा ही उनके कारोबार की सबसे बड़ी पहचान है.

राई के पानी को 3-4 दिन तक रखकर तैयार होती है कांजी
नारायण लाल शर्मा ने बताया कि कांजी बड़े तैयार करने के लिए सबसे पहले मूंग की दाल से बड़े बनाए जाते हैं। इसके बाद कांजी का पानी राई और हींग की मदद से तैयार किया जाता है. राई वाले इस पानी को लगभग 3 से 4 दिन तक रखा जाता है, ताकि उसमें खट्टापन और पारंपरिक स्वाद विकसित हो सके. इसके बाद तैयार कांजी में बड़े डालकर ग्राहकों को परोसे जाते हैं.दुकानदार का कहना है कि कांजी बड़े खाने के लिए कई ग्राहक खास तौर पर उनकी दुकान पर आते हैं। कुछ लोग इसे पेट के लिए अच्छा मानते हैं. गैस जैसी परेशानियों में राहत की उम्मीद से भी खाते हैं. हालांकि, कांजी बड़े पेट की समस्याओं का प्रमाणित इलाज नहीं हैं.

कांजी बड़े के साथ दही पकौड़ी भी लोगों की पसंद
दुकान पर कांजी बड़े के अलावा दही पकौड़ी भी उपलब्ध है. इसे दही, लाल चटनी, हरी चटनी और विभिन्न मसालों के साथ परोसा जाता है. इसके अलावा यहां मोठ और दही पपड़ी भी मिलती है, लेकिन फिलहाल कांजी बड़े और दही पकौड़ी ग्राहकों की खास पसंद बने हुए हैं.

17 साल का अनुभव, ग्राहकों का भरोसा
नारायण लाल शर्मा बताते हैं कि उनकी दुकान पर कई परिवार वर्षों से नियमित रूप से आते हैं. ग्राहकों के साथ उनका अच्छा जुड़ाव ही उनके कारोबार को आगे बढ़ा रहा है. उन्होंने बताया कि जय विलास पैलेस में काम करने के दौरान वहां के स्टाफ और महारानी जी सहित अन्य लोगों ने भी उनके बनाए व्यंजनों का स्वाद चखा है.नारायण लाल शर्मा की कहानी मेहनत, पारंपरिक स्वाद और ग्राहकों के विश्वास की मिसाल है. राजस्थान के स्वाद को ग्वालियर में पहचान दिलाने की उनकी कोशिश बताती है कि अपने हुनर और लगन से किसी भी शहर में खास जगह बनाई जा सकती है.



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