एम्स, IIT और रेलवे का विकास: फारूक अब्दुल्ला के पाकिस्तान प्रेम पर BJP ने याद दिलाई कश्मीर की हकीकत

एम्स, IIT और रेलवे का विकास: फारूक अब्दुल्ला के पाकिस्तान प्रेम पर BJP ने याद दिलाई कश्मीर की हकीकत


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एम्स, IIT और रेलवे: फारूक के पाक प्रेम पर BJP ने याद दिलाई कश्मीर की हकीकत

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Farooq Abdullah Pakistan Love: पाकिस्तान की तरफदारी करने वाले फारूक अब्दुल्ला के बयान पर भाजपा और सहयोगी दलों ने चौतरफा मोर्चा खोल दिया है. पाकिस्तान द्वारा वैश्विक मंचों पर कश्मीर का मुद्दा उठाने को ‘कश्मीरियों की आवाज’ बताने पर केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत समेत कई नेताओं ने इसे सीधा देशद्रोह करार दिया है.

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भाजपा नेताओं ने फारूक अब्दुल्ला के बयान को राष्ट्र विरोधी बताया है. (फाइल फोटो)

Farooq Abdullah Pakistan Love: भाजपा नेताओं ने फारूक अब्दुल्ला के उस बयान की आलोचना की, जिसमें उन्होंने कहा था कि पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय मंचों पर कश्मीर का मुद्दा उठाकर वहां के लोगों की आवाज उठा रहा है और उनकी रक्षा कर रहा है. केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा कि फारूक अब्दुल्ला का बयान राष्ट्र विरोधी है. भारत में रहकर भारत विरोधी बयान को किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जा सकता है.

भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता आरपी सिंह ने आईएएनएस से बातचीत में कहा, “फारूक अब्दुल्ला अब ऐसी स्थिति में पहुंच गए हैं, जो देश-विरोधी बयानों से मेल खाती है. फारूक अब्दुल्ला का कहना है कि उनके बेटे लोकतांत्रिक प्रक्रिया के जरिए मुख्यमंत्री बने थे. लेकिन उन्हें पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओजेके) के हालात पर नजर डालनी चाहिए. उन्हें वहां लोकतंत्र की स्थिति देखनी चाहिए, जहां विरोध प्रदर्शन करने या अपनी राय रखने वालों पर गोलियां चलाई जाती हैं. आज कश्मीर में लगभग 2 करोड़ पर्यटक आते हैं, जबकि पहले यह संख्या सिर्फ 20 लाख थी. आज कश्मीर में सड़कों का एक बड़ा नेटवर्क है, जम्मू और कश्मीर को जोड़ने वाला सबसे ऊंचा रेलवे पुल,आईआईटी और एम्स जैसे संस्थान मौजूद हैं.”

भाजपा सांसद गुलाम अली खटाना ने कहा, “फारूक अब्दुल्ला कभी कोई चुनाव नहीं जीते हैं. कश्मीर में अब तक केवल दो चुनाव हुए हैं, एक मोरारजी देसाई के कार्यकाल में और दूसरा हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल में हुए, जिनमें लोगों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और इस तरह लोकतंत्र में अपना भरोसा मजबूत किया.” भाजपा सांसद मंजू शर्मा ने कहा, “मैं यही कहूंगी कि जब भी फारूक अब्दुल्ला सत्ता में होते हैं, तो समय-समय पर पाकिस्तान के प्रति उनका लगाव साफ नजर आने लगता है. इससे लगता है कि फारूक अब्दुल्ला जिस देश में रहते हैं, उस पर विश्वास नहीं करते.”

शिवसेना नेता आनंद दुबे ने कहा, “फारूक अब्दुल्ला उम्र के लिहाज से काफी वरिष्ठ नेता हैं. वे कई बार मुख्यमंत्री रह चुके हैं और केंद्रीय मंत्री भी रहे हैं. उनके बेटे जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री हैं और देश में उन्हें काफी सम्मान और प्रतिष्ठा मिली है. हालांकि, 24 अक्टूबर पाकिस्तान के पक्ष में दिए गए उनके बयान ने उनकी अपनी छवि को धूमिल किया है, उनकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाया है और मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला की छवि पर भी असर डाला है. फारूक अब्दुल्ला को पड़ोसी देश से इतना ही लगाव है तो पाकिस्तान चले जाएं और बाकी की जिंदगी वहीं गुजारें.”

केंद्रीय मंत्री अन्नपूर्णा देवी ने कहा, “फारूक अब्दुल्ला जैसे लोगों को कश्मीर के मुद्दे पर बोलने का कोई अधिकार ही नहीं है. धारा 370 हटने से जम्मू-कश्मीर का युवा आज मुख्यधारा से जुड़कर नौकरी और रोजगार कर रहा है. कश्मीर में सरकार की योजनाओं का लाभ सभी लोगों को मिल रहा है.” भाजपा नेता मृत्युंजय तिवारी ने कहा, “फारूक अब्दुल्ला को समझना चाहिए कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह ने जम्मू-कश्मीर से धारा 370 हटाने का ऐतिहासिक काम किया है. भारत आज आगे बढ़ रहा है, कोई भी देश बुरी नजर से देखने के बारे में सोच भी नहीं सकता है. कोई भी भारत को कई बुरी नजर से देखता है तो उसे उसी भाषा में जवाब दिया जाता है.”



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