पाकिस्‍तान-तुर्की…सबने छोड़ा साथ, तब भारत ने थामा दुश्‍मन के यार का हाथ – S Jaishankar historical Azerbaijan visit give big boost to central asia

पाकिस्‍तान-तुर्की…सबने छोड़ा साथ, तब भारत ने थामा दुश्‍मन के यार का हाथ – S Jaishankar historical Azerbaijan visit give big boost to central asia


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पाक-तुर्की ने छोड़ा साथ, तब भारत ने थामा हाथ, जयशंकर ने कैसे मारा चौका

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S Jaishankar Azerbaijan Visit: ऑपरेशन सिंदूर के दौरान जिस अजरबैजान ने पाकिस्‍तान के सपोर्ट में बयान दिया था, आज वह भारत का मुरीद बन गया है. भारत ने अजरबैजान का UN से लेकर बाकू तक साथ दिया, जब पाकिस्‍तान और तुर्की जैसे दोस्‍तों ने छोड़ दिया तब भारत ने उसका दामन थामा. विदेश मंत्री एस. जयशंकर की अजरबैजान यात्रा ने दोनों देशों के संबंधों को और मजबूत किया है.

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विदेश मंत्री एस. जयशंकर की अजरबैजान यात्रा काफी अहम है. (एस. जयशंकर के X अकाउंट से साभार)

S Jaishankar Azerbaijan Visit: भारत और अजरबैजान अपने संबंधों को नया आसमान देने में जुटे हैं. अजरबैजान पाकिस्‍तान और तुर्की का सपोर्टर देश रहा है. ऑपरेशन सिंदूर के दौरान अजरबैजान ने पाकिस्‍तान की भाषा बोली थी. तुर्की तो हमेशा से इस्‍लामाबाद का साथ हर कुकृत्‍य में देता रहा है. दूसरी तरफ, अजरबैजान के पड़ोसी देश अर्मेनिया के साथ भारत के ताल्‍लुकात इन दिनों काफी मजबूत हो गए हैं. भारत अर्मेनिया को हथियार सप्‍लाई करने वाला प्रमुख देश है. वहीं, अजरबैजान और अर्मेनिया के बीच कट्टर दुश्‍मनी है. लेकिन हमेशा दुश्‍मन का दोस्‍त दुश्‍मन नहीं होता है. बस उसे दोस्‍त बनाने की कला आनी चाहिए और इस मामले में विदेश मंत्री एस. जयशंकर से बड़ा शिल्‍पकार कौन होगा. अजरबैजान के लिबास से पाकिस्‍तान और तुर्की की दोस्‍ती का रंग उतरने लगा है. वहीं, नई दिल्‍ली और बाकू अब करीब आने लगे हैं. विदेश मंत्री एस. जयशंकर की अजरबैजान यात्रा से यही संकेत मिल रहे हैं.

ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत और अजरबैजान के बीच लंबी-चौड़ी दरार पैदा हो गई थी. अब यह खाई सिमटती हुई दिख रही है. इसे दो घटनाओं से समझने में आसानी होगी. पहला मामला UN का है. इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्‍याहू जब भाषण दे रहे थे तो अध‍िकांश मुस्लिम देशों के प्रतिनिधियों (तुर्की और पाक‍िस्‍तान समेत) ने उसका बहिष्‍कार किया था. वहीं, अजरबैजान के डिप्‍लोमेट नेतन्‍याहू के भाषण के दौरान मौजूद रहे थे. तुर्की में अजरबैजान के स्‍टैंड की कड़ी आलोचना की गई थी. भारतीय प्रतिनिधि भी उपस्थित रहे थे. दूसरी घटना बाकू से ही जुड़ी है. इस साल 15 अक्टूबर को अजरबैजान की राजधानी बाकू में आयोजित एशिया में संवाद और विश्वास-निर्माण उपायों पर सम्मेलन (CICA) के सातवें शिखर सम्मेलन में कई इस्लामी देशों ने इजरायल के राष्ट्रपति इसहाक हर्जोग के भाषण का बहिष्कार किया था. भारतीय विदेश मंत्रालय में राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह बैठक में मौजूद रहे थे. इन दोनों वाकयों से भारत और अजरबैजान में कटुता कम हुई और नजदीकी और बढ़ी. अब सही मौका देखते हुए विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने अजरबैजान की यात्रा कर डाली. इस मौके पर उन्‍होंने अजरबैजान के राष्‍ट्रपति और विदेश मंत्री से मुलाकात की.



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