10 बार राज्यपाल से मिले सुक्खू के मंत्री, हिमाचल में अब ‘नौतोड़’ जमीन मामले पर आंदोलन का ऐलान, नेगी बोले-सब्र का बांध टूटा

10 बार राज्यपाल से मिले सुक्खू के मंत्री, हिमाचल में अब ‘नौतोड़’ जमीन मामले पर आंदोलन का ऐलान, नेगी बोले-सब्र का बांध टूटा


शिमला.हिमाचल प्रदेश के जनजातीय इलाकों में नौतोड़ अधिकार का मुद्दा एक बार फिर गरमा गया है. जनजातीय जिले किन्नौर और लाहौल-स्पीति में नौतोड़ अधिकार को लेकर आंदोलन शुरू हो गया है. कांग्रेस ने इसे ‘नौतोड़ अधिकार यात्रा’ का नाम दिया है. नौतोड़ योजना के तहत जरूरतमंद लोगों को सरकारी भूमि देने का प्रावधान किया गया है.

अब इस आंदोलन को प्रदेश के दूसरे जनजातीय क्षेत्रों के साथ-साथ शिमला तक ले जाने की तैयारी है. आंदोलन को लेकर राजस्व, बागवानी, जनजातीय विकास एवं जन शिकायत निवारण मंत्री जगत सिंह नेगी ने कहा है कि जनजातीय क्षेत्रों के लोगों का सब्र अब टूट चुका है. उनके मुताबिक, पहले चरण में किन्नौर और लाहौल-स्पीति में आंदोलन शुरू किया गया है और जल्द ही इसे अन्य जनजातीय इलाकों तक ले जाया जाएगा. स्पीति में विधायक अनुराधा राणा के नेतृत्व में आंदोलन शुरू किया गया है.

तीन साल से राज्यपाल के पास लंबित है प्रस्ताव- नेगी

जगत सिंह नेगी के मुताबिक, जनजातीय क्षेत्रों के लोगों की नौतोड़ से जुड़ी मांग लंबे समय से लंबित है. उन्होंने दावा किया कि 3 साल पहले प्रदेश कैबिनेट ने नौतोड़ से संबंधित प्रस्ताव पारित कर राज्यपाल को मंजूरी के लिए भेजा था, लेकिन अभी तक इस पर मंजूरी नहीं मिली है.

नेगी का कहना है कि सरकार की ओर से इस मामले को लेकर लगातार प्रयास किए जा रहे हैं और वह राज्यपाल से कई बार मुलाकात कर चुके हैं. मंत्री के मुताबिक, प्रस्ताव भेजे जाने के बाद करीब 10 बार राज्यपाल से मुलाकात हो चुकी है. इनमें 8 मुलाकातें पूर्व राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल से और दो मुलाकातें वर्तमान राज्यपाल कविंद्र गुप्ता से की गई है, लेकिन अब तक आश्वासन के सिवाय कुछ नहीं मिला है.

नौतोड़ के मुद्दे पर आंदोलन को लेकर नेगी ने कहा कि राज्यपाल से अब आखिरी बार मुलाकात की जाएगी. इसके बाद आंदोलन को निर्णायक रूप दिया जाएगा. मंत्री ने संकेत दिया कि जनजातीय क्षेत्रों से शुरू होने वाला यह आंदोलन अब शिमला तक पहुंचेगा. यानी आने वाले दिनों में नौतोड़ का मुद्दा राजधानी में भी बड़े राजनीतिक आंदोलन का रूप ले सकता है.

BJP पर नेगी का गंभीर आरोप

जगत सिंह नेगी ने नौतोड़ के प्रस्ताव को मंजूरी नहीं मिलने के लिए भाजपा पर आरोप लगाए. उन्होंने आरोप लगाया कि जब-जब उन्होंने राज्यपाल से मुलाकात की, उसके बाद भाजपा नेताओं ने भी राज्यपाल से मुलाकात कर प्रस्ताव को मंजूरी नहीं देने के लिए दबाव बनाया होगा. नेगी ने कहा कि उन्हें ऐसा लगता है कि भाजपा की ओर से इस मामले में राज्यपाल से प्रस्ताव को मंजूरी न देने की बात कही गई होगी.उन्होंने यहां तक आरोप लगाया कि भाजपा की संकीर्ण सोच के वजह से इसे मंजूरी नहीं मिल रही है, हो सकता है कि राज्यापल भी मजबूर हों. मंत्री ने कहा कि अब जनजातीय लोगों के सब्र का बांध टूट चुका है और आंदोलन को मजबूती के साथ आगे बढ़ाया जाएगा.

क्या है ‘नौतोड़’ का मामला

हिमाचल के जनजातीय क्षेत्रों में नौतोड़ का संबंध पात्र लोगों को निर्धारित नियमों के तहत सरकारी भूमि उपलब्ध कराने से है, ताकि वे खेती और बागवानी जैसे कार्य कर सकें. जनजातीय क्षेत्रों में यह मुद्दा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि किन्नौर और लाहौल-स्पीति जैसे पहाड़ी क्षेत्रों में निजी कृषि भूमि सीमित है. स्थानीय लोगों का लंबे समय से तर्क रहा है कि सीमित जमीन के कारण नई पीढ़ी के लिए खेती-बागवानी और आजीविका के अवसर सीमित हो रहे हैं. हालांकि, जब नौतोड़ का मामला वन भूमि से जुड़ता है तो वन संरक्षण कानूनों और अन्य वैधानिक प्रावधानों के कारण मामला जटिल हो जाता है.

2014 से 2017 के दौर का भी दिया हवाला

जगत सिंह नेगी ने नौतोड़ के मुद्दे पर कांग्रेस सरकार के पिछले कार्यकाल का भी हवाला दिया. उन्होंने कहा कि 2014 से 2017 के बीच कांग्रेस सरकार के समय केंद्र के वन संरक्षण कानून से जुड़ी व्यवस्था में राहत के बाद जनजातीय क्षेत्रों में पात्र लोगों को नौतोड़ के तहत जमीनें मिली थीं.नेगी के मुताबिक, 2017 में प्रदेश में सरकार आने के बाद यह प्रक्रिया बंद हो गई. इसके बाद 2022 में कांग्रेस सरकार के सत्ता में लौटने पर फिर से पात्र लोगों के अधिकार बहाल करने के उद्देश्य से कैबिनेट ने प्रस्ताव पारित किया.

पांचवीं अनुसूची का भी दिया हवाला

नेगी ने संविधान की पांचवीं अनुसूची का हवाला देते हुए कहा कि अनुसूचित क्षेत्रों में जनजातीय हितों की रक्षा के लिए राज्यपाल को विशेष शक्तियां प्राप्त हैं, शेड्यूल 5 में जनजातीय इलाकों के हित्त के लिए संसद और विधान सभा में पारित किसी भी कानून में संशोधन की शक्ति राज्पाल को प्राप्त है.

उनका कहना है कि इन्हीं प्रावधानों के तहत जनजातीय क्षेत्रों के हित के लिए  में नौतोड़ से संबंधित प्रस्ताव को मंजूरी मिलनी चाहिए. यहीं से नौतोड़ का मुद्दा केवल राजस्व और भूमि आवंटन का मामला नहीं रह जाता, बल्कि राज्य सरकार, राज्यपाल की संवैधानिक भूमिका और वन कानूनों से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय बन जाता है.

अब आंदोलन की दिशा किन्नौर से शिमला तक

नौतोड़ अधिकार को लेकर फिलहाल आंदोलन का केंद्र किन्नौर और लाहौल-स्पीति हैं. कांग्रेस की ओर से इसे अन्य जनजातीय क्षेत्रों तक ले जाने की बात कही गई है. मंत्री जगत सिंह नेगी के बयान के बाद संकेत साफ हैं कि अगर प्रस्ताव पर जल्द कोई फैसला नहीं हुआ तो जनजातीय क्षेत्रों से शुरू हुआ नौतोड़ आंदोलन शिमला तक पहुंचेगा और लोकभवन से आर-पार की लड़ाई लड़ी जाएगी.



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