गन्ने की फसल में दिखें ये लाल निशान तो सावधान, वैज्ञानिक से जानें समाधान
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Sugarcane Farming Tips: डॉ केआर साहू ने लोकल 18 से कहा कि गन्ने की फसल में रेड रॉट के नियंत्रण के लिए टेबुकोनाजोल या एजोल का इस्तेमाल किया जा सकता है. इसे एक लीटर पानी में एक मिली की मात्रा के हिसाब से मिलाकर प्रभावित फसल में छिड़काव किया जा सकता है.
बालोद. छत्तीसगढ़ के बालोद जिले में बड़े पैमाने पर गन्ने की खेती की जाती है. इस समय गन्ने की फसल में रेड रॉट (लाल सड़न) बीमारी का प्रकोप बढ़ता दिखाई दे रहा है. कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को फसल की नियमित निगरानी करने और शुरुआती लक्षण दिखाई देने पर समय रहते नियंत्रण के उपाय अपनाने की सलाह दी है. बालोद कृषि विज्ञान केंद्र के प्रमुख और वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ केआर साहू के मुताबिक, रेड रॉट गन्ने की फसल में होने वाली प्रमुख बीमारियों में से एक है. बीमारी के प्रकोप के कारण गन्ने के अंदर लाल सड़न की स्थिति बनने लगती है. शुरुआती अवस्था में पौधों की पत्तियों के किनारों पर लाल-लाल रंग दिखाई देने लगता है. धीरे-धीरे इसका असर पौधे के दूसरे हिस्सों तक पहुंच सकता है और फसल की गुणवत्ता व उत्पादन प्रभावित होने की आशंका रहती है.
किसानों को सलाह दी गई है कि वे खेत में गन्ने के पौधों का लगातार निरीक्षण करें. खासकर पत्तियों के किनारों पर लाल रंग के निशान, पौधों की कमजोर स्थिति या सड़न जैसे लक्षण दिखाई देने पर तुरंत कृषि विशेषज्ञों से सलाह लें. शुरुआती स्तर पर बीमारी की पहचान होने से नियंत्रण के उपाय अधिक प्रभावी तरीके से किए जा सकते हैं.
टेबुकोनाजोल या एजोल का छिड़काव
डॉ साहू ने बताया कि रेड रॉट के नियंत्रण के लिए टेबुकोनाजोल या एजोल का उपयोग किया जा सकता है. इसे एक लीटर पानी में एक एमएल की मात्रा के हिसाब से मिलाकर प्रभावित फसल में छिड़काव किया जा सकता है. इसके अलावा कीट प्रबंधन के लिए थायोमेथोक्साम एक ग्राम प्रति लीटर पानी की दर से और बिफेंथ्रिन का उपयोग करने की सलाह दी गई है. हालांकि किसानों को दवाओं की मात्रा और मिश्रण के संबंध में स्थानीय कृषि विशेषज्ञ की सलाह और उत्पाद के लेबल पर दिए निर्देशों का पालन करना चाहिए.
नियंत्रण उपाय अपनाना जरूरी
वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ साहू ने आगे कहा कि खेत में बीमारी के लक्षण दिखाई देने पर देरी न करते हुए नियंत्रण उपाय अपनाना जरूरी है ताकि रेड रॉट का प्रकोप अन्य पौधों तक फैलने से रोका जा सके और गन्ने की फसल को संभावित नुकसान से बचाया जा सके.