आलू के छिलकों को फेंकने के बजाय बनाएं फ्री की खाद, गार्डनिंग एक्सपर्ट से जानें तरीका, तेजी से बढ़ेगा पौधा

आलू के छिलकों को फेंकने के बजाय बनाएं फ्री की खाद, गार्डनिंग एक्सपर्ट से जानें तरीका, तेजी से बढ़ेगा पौधा


घर में लगे पौधों पर खूब सारे फूल खिलें, पत्तियां हरी-भरी रहें और पौधों की अच्छी बढ़वार हो, ऐसा हर कोई चाहता है. इसके लिए कई लोग बाजार से महंगे फर्टिलाइजर खरीदकर लाते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि आपकी रसोई से निकलने वाले आलू के छिलके भी गार्डनिंग में काम आ सकते हैं? जिन छिलकों को आप बेकार समझकर कूड़े में फेंक देते हैं, उनसे घर पर खाद तैयार की जा सकती है. खंडवा के गार्डनिंग एक्सपर्ट चंद्रशेखर मिश्रा आलू के छिलकों से दो तरह की खाद तैयार करते हैं. एक लिक्विड खाद है, जिसे कुछ जरूरी चीजों को मिलाकर बनाया जाता है, वहीं दूसरी सूखी खाद है। इनका सही तरीके से इस्तेमाल करने से मिट्टी में जैविक पदार्थ बढ़ाने में मदद मिल सकती है. आइए जानते हैं आलू के छिलकों से खाद बनाने और पौधों में इस्तेमाल करने का आसान तरीका.

आलू के छिलकों को फेंकने के बजाय गार्डनिंग में करें इस्तेमाल

आमतौर पर हर घर में आलू का इस्तेमाल होता है. सब्जी बनाने के लिए आलू छीलने के बाद उसके छिलके कूड़े में फेंक दिए जाते हैं। लेकिन इन छिलकों में पोटैशियम समेत कुछ पोषक तत्व मौजूद होते हैं. ऐसे में इनका सही तरीके से उपयोग करके घर के गार्डन में काम लिया जा सकता है.गार्डनिंग एक्सपर्ट चंद्रशेखर मिश्रा के मुताबिक, आलू के छिलकों से लिक्विड और सूखी खाद तैयार की जा सकती है। इसके लिए बहुत महंगी चीजें खरीदने की जरूरत नहीं है। घर से निकलने वाले छिलकों के साथ वर्मी कंपोस्ट और इस्तेमाल की हुई चायपत्ती जैसी चीजों की मदद से खाद बनाई जा सकती है। हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि केवल आलू के छिलकों से बनी खाद पौधों की सभी पोषण संबंधी जरूरतें पूरी नहीं करती। पौधों की अच्छी बढ़वार के लिए सही मिट्टी, पर्याप्त धूप, पानी और संतुलित पोषण भी जरूरी है.

लिक्विड खाद बनाने के लिए इन चीजों की होगी जरूरत

अगर आप घर पर आलू के छिलकों से लिक्विड खाद बनाना चाहते हैं, तो इसके लिए आपको कुछ सामान्य चीजें जुटानी होंगी। गार्डनिंग एक्सपर्ट के बताए तरीके के अनुसार, इसके लिए 100 ग्राम आलू के छिलके, 100 ग्राम वर्मी कंपोस्ट और 10 ग्राम इस्तेमाल की हुई चायपत्ती की जरूरत होगी। चायपत्ती में दूध, चीनी या दूसरी चीजें मिली हुई नहीं होनी चाहिए.इसके अलावा तीन अलग-अलग बर्तन और पानी की जरूरत होगी। तीनों बर्तनों में 500-500 मिलीलीटर पानी लेना है। ध्यान रखें कि खाद बनाने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले बर्तन साफ हों और मिश्रण को ऐसी जगह रखें, जहां बच्चे या पालतू जानवर उसे गलती से न पी सकें.

इस तरह तैयार करें आलू के छिलकों की लिक्विड खाद

लिक्विड खाद बनाने के लिए सबसे पहले तीन अलग-अलग बर्तन लें और हर बर्तन में 500 मिलीलीटर पानी भर लें। अब पहले बर्तन में आलू के छिलके, दूसरे में वर्मी कंपोस्ट और तीसरे में इस्तेमाल की हुई साफ चायपत्ती डाल दें। इन तीनों मिश्रणों को करीब दो दिन तक रखा रहने दें.दो दिन बाद तीनों बर्तनों के मिश्रण को अलग-अलग छान लें। इसके बाद तीनों से निकले पानी को एक साथ मिला लें। इस तरह लिक्विड मिश्रण तैयार हो जाएगा। लेकिन इसे सीधे पौधों की जड़ों में डालने के बजाय पहले सावधानी बरतना जरूरी है.एक लीटर तैयार मिश्रण में चार से पांच लीटर साफ पानी मिलाकर इसे पतला किया जा सकता है। इसके बाद थोड़ी मात्रा में मिट्टी पर इस्तेमाल करें और पौधे की प्रतिक्रिया देखें। ध्यान रखें कि यह घरेलू नुस्खा है, इसलिए इसकी पोषक क्षमता हर बार एक जैसी नहीं होगी। मिश्रण में बदबू, फफूंद या सड़न दिखाई दे, तो उसे पौधों में इस्तेमाल न करें। खाद को जरूरत से ज्यादा डालने से भी बचें.

सूखी खाद बनाना है तो अपनाएं यह आसान तरीका

अगर आप लिक्विड खाद नहीं बनाना चाहते, तो आलू के छिलकों से सूखी खाद भी तैयार कर सकते हैं। इसके लिए आलू के छिलकों को साफ जगह पर फैलाकर दो से तीन दिन तक धूप में सुखाएं। छिलकों को तब तक सुखाना जरूरी है, जब तक उनमें नमी काफी कम न हो जाए.इसके बाद सूखे छिलकों को हल्का पीस लें और उसमें बराबर मात्रा में वर्मी कंपोस्ट मिला दें। इस तरह सूखी खाद तैयार हो जाएगी। छिलकों को अच्छी तरह सुखाने से उनमें नमी के कारण सड़न होने की आशंका कम होती है। हालांकि, यह मिश्रण पूरी तरह पकी हुई कंपोस्ट खाद के बराबर नहीं है, इसलिए इसका इस्तेमाल सीमित मात्रा में करना बेहतर है.

गमले में कैसे डालें सूखी खाद?

सूखी खाद को इस्तेमाल करने के लिए गमले की मिट्टी में पौधे के तने से थोड़ी दूरी पर हल्का गड्ढा बनाएं। इसमें थोड़ी मात्रा में खाद डालकर ऊपर से मिट्टी ढक दें। इसके बाद जरूरत के मुताबिक पानी दें। खाद को सीधे पौधे के तने से चिपकाकर न डालें और एक साथ बहुत ज्यादा मात्रा का इस्तेमाल भी न करें.एक बात का खास ध्यान रखें कि कच्चे आलू के छिलकों को सीधे गमले में ज्यादा मात्रा में डालने से बचना चाहिए। छिलके मिट्टी में सड़ने लगते हैं, जिससे बदबू, फफूंद और छोटे कीड़ों की समस्या पैदा हो सकती है। इसलिए छिलकों को पहले अच्छी तरह सुखाना या उचित तरीके से कंपोस्ट करना बेहतर विकल्प है.

पौधों की अच्छी ग्रोथ के लिए इन बातों का भी रखें ध्यान

आलू के छिलकों से बनी खाद को गार्डनिंग में इस्तेमाल करके रसोई से निकलने वाले कचरे का उपयोग किया जा सकता है। लेकिन केवल इस खाद के इस्तेमाल से पौधों की ग्रोथ दोगुनी होने या हर पौधे पर ज्यादा फूल आने की गारंटी नहीं है। पौधों की बढ़वार उनकी किस्म, मिट्टी की गुणवत्ता, धूप, पानी और पोषक तत्वों की जरूरत पर निर्भर करती है.अगर आपके पौधों की पत्तियां पीली पड़ रही हैं या फूल नहीं आ रहे हैं, तो सबसे पहले यह देखें कि उन्हें पर्याप्त धूप मिल रही है या नहीं। गमले में पानी रुक तो नहीं रहा और मिट्टी की गुणवत्ता कैसी है। जरूरत के अनुसार अच्छी तरह तैयार कंपोस्ट या संतुलित खाद का इस्तेमाल करें.इस तरह आलू के छिलकों को कूड़े में फेंकने के बजाय उनसे घर पर खाद तैयार करके गार्डनिंग में इस्तेमाल किया जा सकता है। इससे रसोई के कचरे का बेहतर उपयोग होगा और पौधों की मिट्टी में जैविक पदार्थ बढ़ाने में मदद मिल सकती है.



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