3 मासूमों की जान बचाने खड़ा हो गया पूरा गांव, कैसे जुटा रहा 50 करोड़ रुपये
Last Updated:
केरल के कोझिकोड से इंसानियत की बेहद भावुक करने वाली खबर सामने आई है. इस गांव में दुर्लभ बीमारी से जूझ रहे तीन जुड़वां बच्चों की जान बचाने के लिए पूरा गांव एकजुट हो गया है. स्पाइनल मस्कुलर अट्रोफी से पीड़ित बच्चों के इलाज के लिए करीब पचास करोड़ रुपये की जरूरत है, जिसके लिए पूरा गांव अभियान चला रहा है.
3 मासूमों की जान बचाने खड़ा हो गया पूरा गांव, कैसे जुटा रहा 50 करोड़ रुपये, भर आएंगी आंखें. Instagram photo
केरल के कोझिकोड जिले के छोटे से कल्लुराड़ी गांव की चर्चा इन दिनों हर तरफ हो रही है. इस छोटे से गांव में 3 मासूम बच्चे हैं, उनकी दुर्लभ बीमारी है और एक पहाड़ जितना पैसा कमाने का लक्ष्य है, जिसे पूरा करने के लिए पूरे गांव के गांववासियों ने कमर कस ली है. इस गांव का हर नागरिक उस पहल में शामिल है जो दुर्लभ बीमारी से जूझ रहे इन बच्चों के लिए पैसा जुटा रहा है.
मातृभूमि इंग्लिश में छपी खबर के मुताबिक इस गांव में एक अनोखी मुहिम चल रही है. गांव के लोग 20 महीने के तीन जुड़वां बच्चों अयान मोनस, डेविड मेनस और ओलिवर मोनस की जान बचाने के लिए एकजुट हो गए हैं.
बता दें कि ये तीनों भाई स्पाइनल मस्कुलर अट्रोफी (एसएमए-2) नाम की गंभीर और दुर्लभ बीमारी से जूझ रहे हैं. यह एक रेयर आनुवंशिक बीमारी है, जिसमें मांसपेशियां कमजोर पड़ने लगती हैं. समय पर इलाज न मिलने पर बच्चों की जिंदगी खतरे में पड़ सकती है. गांव वाले अब पूरे देश से मदद की अपील कर रहे हैं, ताकि तीनों भाई सामान्य जिंदगी जी सकें.
इस बीमारी के इलाज के लिए जिन बॉयर्स नाम की बेहद महंगी दवा की जरूरत है. इसका आमतौर पर एक मरीज के इलाज में करीब साढ़े 17 करोड़ रुपये का खर्च आता है, लिहाजा 3 बच्चों को बचाने के लिए करीब 50 करोड़ रुपये का खर्च आएगा.
गांववालों ने बताया कि इलाज के लिए दो महीने के अंदर पैसे जुटाने की सख्त जरूरत है. इसके लिए सोशल मीडिया पर मदद की अपील तेजी से वायरल हो रही है. स्कूलों और स्टेडियम में पोस्टर लगाए गए हैं, ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग इस नेक काम से जुड़ सकें.
आया पैसा तो जगी उम्मीद
गांववालों ने बताया कि अभियान शुरू होने के महज दो दिनों में ही 1.25 करोड़ रुपये इकट्ठा हो गए हैं. यह रकम भले ही लक्ष्य से काफी कम है, लेकिन गांव की एकजुटता और लोगों की संवेदनशीलता को दिखाती है.
छोटी बच्ची ने तोड़ दी गुल्लक
इस मुहिम को लेकर एक भावुक मिसाल भी देखने को मिली है जब तिरुनलूमपुरम की सात साल की छोटी जिप्सी ने तीनों बच्चों की तस्वीरें देखीं तो बिना किसी हिचकिचाहट के अपनी गुल्लक तोड़ दी. उसमें जमा 545 रुपये उसने इस काम के लिए दान कर दिए. छोटी बच्ची का यह कदम पूरे गांव और बाहर के लोगों के लिए प्रेरणा बन गया है.