Trump Putin Friendship News: चुनाव से पहले ट्रंप को पुतिन का दूसरा गिफ्ट, अमेरिका की ओर बढ़ रहा जहाज, क्या है पूरा खेल?


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चुनाव से पहले ट्रंप को पुतिन का दूसरा गिफ्ट, अमेरिका की ओर बढ़ रहा जहाज

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अमेरिका में 3 नवंबर को होने वाले मिडटर्म चुनाव से पहले रूस से डीजल लेकर एक टैंकर न्यूयॉर्क की ओर बढ़ रहा है. LSEG के मुताबिक, जहाज में 40 हजार मीट्रिक टन डीजल है और इसके 7 नवंबर को पहुंचने की उम्मीद है. इससे पहले रूस ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की अपील के बाद अमेरिकी नागरिक स्टीफन हबर्ड को रिहा किया था.

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ट्रंप के लिए पुतिन ने भेजा डीजल.

अमेरिका में 3 नवंबर को होने वाले मिडटर्म चुनाव से पहले राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की तरफ से एक और बड़ी राहत मिलती दिख रही है. पहले रूस ने ट्रंप की अपील के बाद रूस में चार साल से ज्यादा समय से कैद अमेरिकी नागरिक स्टीफन हबर्ड को रिहा किया. रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक अब रूस से 40 हजार मीट्रिक टन डीजल लेकर एक टैंकर अमेरिका की ओर रवाना हुआ है. शिपिंग डेटा के मुताबिक, माल्टा के झंडे वाला यह टैंकर 7 नवंबर को अमेरिका पहुंचने की उम्मीद है. ऐसे समय में जब ईंधन की बढ़ती कीमतें अमेरिकी मतदाताओं की जेब पर दबाव डाल रही हैं, रूसी डीजल की यह खेप ट्रंप के लिए राजनीतिक रूप से अहम हो सकती है. हालांकि, इस खेप से अमेरिकी बाजार में डीजल या पेट्रोल की कीमतें कितनी कम होंगी, इसका अभी कोई पक्का अनुमान नहीं है. यह जहाज पहुंचेगा भी चुनाव के बाद. लेकिन यह तय है कि डीजल वाले जहाज को आने को वह चुनाव में भुना सकते हैं. रूस से ईंधन की सप्लाई बढ़ाने की कोशिश ऐसे वक्त हो रही है, जब ट्रंप प्रशासन चुनाव से पहले ऊर्जा की कीमतों को काबू में लाने के लिए कई कदम उठा रहा है.

रूस से कितना डीजल आया, कितनी बड़ी है खेप?

LSEG के शिपिंग डेटा के मुताबिक, Agioi Fanendes नाम का मध्यम आकार का टैंकर 22 अक्टूबर को रूस के बाल्टिक सागर स्थित प्रिमोर्स्क बंदरगाह पर अल्ट्रा-लो सल्फर डीजल से लोड किया गया था. इसमें 40,000 मीट्रिक टन डीजल है. इसे समझने के लिए एक अहम आंकड़ा देखिए. एक मीट्रिक टन डीजल का वजन 1,000 किलोग्राम होता है. इस हिसाब से जहाज करीब 4 करोड़ किलोग्राम, यानी 4 करोड़ लीटर नहीं बल्कि वजन के लिहाज से 40 मिलियन किलोग्राम डीजल लेकर चल रहा है. अगर डीजल का घनत्व औसतन 0.84 किलोग्राम प्रति लीटर माना जाए, तो 40,000 मीट्रिक टन डीजल की मात्रा करीब 4.76 करोड़ लीटर बैठती है. यह खेप रूस के कुल ईंधन निर्यात की तुलना में छोटी है, लेकिन अमेरिकी बाजार में सप्लाई बढ़ाने की दिशा में इसे एक अहम कदम माना जा सकता है.

पुतिन ने ट्रंप को कितने डीजल का वादा किया है?

रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप ने 9 अक्टूबर को घोषणा की थी कि रूस तत्काल 3 लाख मीट्रिक टन डीजल निर्यात करेगा. यह करीब 22.5 लाख बैरल के बराबर बताया गया था. इसके बाद नवंबर में 5 लाख टन और फिर उसके तुरंत बाद 10 लाख टन डीजल भेजने की बात कही गई थी. इस हिसाब से घोषित शुरुआती सप्लाई कुल 18 लाख मीट्रिक टन बैठती है. हालांकि, अभी अमेरिका की ओर जा रहे टैंकर में 40 हजार टन डीजल है. रूस के उप प्रधानमंत्री अलेक्जेंडर नोवाक ने पिछले सप्ताह कहा था कि साल के अंत तक देश का डीजल निर्यात बढ़कर हर महीने 30 लाख से 35 लाख मीट्रिक टन तक पहुंच सकता है. यह रूस का सामान्य निर्यात स्तर है.

चुनाव से पहले ट्रंप क्यों चाहते हैं सस्ता ईंधन?

अमेरिका में ईंधन की कीमतें चुनाव से पहले बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन सकती हैं. पेट्रोल और डीजल महंगे होने का सीधा असर लोगों के रोजमर्रा के खर्च, सामान की ढुलाई और कारोबार पर पड़ता है. अमेरिका में पेट्रोल की औसत कीमत 4.27 डॉलर प्रति गैलन (405रूपये/3.78 लीटर) तक पहुंच गई है. फरवरी में ईरान युद्ध शुरू होने के बाद से इसमें करीब 1.30 डॉलर, यानी 43 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है. ब्रेंट क्रूड की कीमत भी 112 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंचने की खबर है. ट्रंप प्रशासन ने कीमतों पर दबाव कम करने के लिए रूस पर नए प्रतिबंधों के कानून के कुछ हिस्सों में छूट देने जैसे कदम उठाए हैं. साथ ही, यूरोपीय देशों पर अपने आपातकालीन ईंधन भंडार से ज्यादा तेल जारी करने का दबाव भी बनाया है.



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