Shukra Pradosh Vrat 2026 Muhurat: रवि योग में शुक्र प्रदोष व्रत आज, शाम 5:44 बजे से मुहूर्त, जानें पूजा विधि, मंत्र, आरती, महत्व

Shukra Pradosh Vrat 2026 Muhurat: रवि योग में शुक्र प्रदोष व्रत आज, शाम 5:44 बजे से मुहूर्त, जानें पूजा विधि, मंत्र, आरती, महत्व


Shukra Pradosh Vrat 2026 Muhurat And Puja Vidhi: आज शुक्र प्रदोष व्रत है, जो अश्विन माह और अक्टूबर दोनों का अं​तिम प्रदोष व्रत है. आज के दिन जो लोग व्रत हैं, उनको बता दें कि प्रदोष व्रत की पूजा शाम के समय में करते हैं. दिन में आप दैनिक पूजा कर लें. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सूर्यास्त के बाद जब प्रदोष काल शुरू होता है तो उस समय शिव जी आनंदपूर्वक कैलाश पर नृत्य करते हैं. जब कोई प्रसन्न होता है तो आप उससे कुछ प्राप्त कर सकते हैं. इस वजह से शाम में प्रदोष पूजा करते हैं ताकि शिव जी हमारी मनोकामनाएं पूरी कर दें. शुक्र प्रदोष व्रत करने से शत्रुओं पर विजय की प्राप्ति होती है. आज पूजा का मुहूर्त शाम में 5:44 बजे से है. आइए जानते हैं शुक्र प्रदोष व्रत की पूजा विधि, मुहूर्त, मंत्र, आरती के बारे में.

शुक्र प्रदोष व्रत का शुभ मुहूर्त 2026

  1. अश्विन शुक्ल त्रयोदशी तिथि का प्रारंभ: आज, 23 अक्टूबर, दोपहर 2:35 बजे
  2. अश्विन शुक्ल त्रयोदशी तिथि का समापन: कल, 24 अक्टूबर, दोपहर 1:36 बजे
  3. प्रदोष पूजा का मुहूर्त: आज शाम 5:44 बजे से लेकर रात 8:16 बजे तक
  4. रवि योग: आज, रात 9:02 बजे से कल सुबह 06:27 बजे तक

प्रदोष पूजा मंत्र

  • ओम नम: शिवाय
  • ओम तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि तन्नो रुद्रः प्रचोदयात्.

शुक्र प्रदोष व्रत और पूजा विधि

  • आज के दिन सुबह में व्रत और पूजा का संकल्प करें. दिन में फलाहार और जल ग्रहण करके उपवास रहें. भगवान शिव का भजन करें.
  • व्रत के समय यह ध्यान रखें कि दोपहर में सोना वर्जित है. यदि आप बीमार हैं या कुछ अन्य स्थितियां हैं, जिसमें आराम की जरूरत है तो आप कर सकते हैं.
  • शाम को पूजा मुहूर्त से पहले स्नान आदि से निवृत होकर पवित्र हो लें. साफ वस्त्र पहनें. पूजा सामग्री के साथ शिव मंदिर जाएं या फिर घर पर ही पूजा करें.
  • सबसे पहले जल से शंकर जी का अभिषेक करें. उनको गाय का दूध, शहद, अक्षत्, फूल, माला, बेलपत्र, भांग, धतूरा, फल, नैवेद्य आदि अर्पित करें. इस दौरान शिव जी के मंत्र का उच्चारण करें. माता पार्वती, गणेश जी, भगवान कार्तिकेय, नंदी आदि का पूजन करें.
  • फिर शिव चालीसा पढ़ें और शुक्र प्रदोष व्रत की कथा सुनें. उसके बाद घी के दीपक या कपूर से आरती करें. शिव जी की आरती नीचे दी गई है, उसे पढ़ें.
  • पूजा के समापन के बाद क्षमा प्रार्थना करके अपनी गलतियों के लिए क्षमा मांगें और मनोकामना व्यक्त करें. फिर रात्रि के समय में जागरण करें.
  • अगले दिन यानि कल सुबह में स्नान के बाद अपनी क्षमता के अनुसार अन्न, वस्त्र, फल आदि का दान करें. शिव जी की पूजा कर लें. उसके बाद पारण करके व्रत को पूरा करें.

शुक्र प्रदोष व्रत का पारण

शुक्र प्रदोष का पारण कल 24 अक्टूबर शनिवार को होगा. इस दिन आप सूर्योदय बाद यानि सुबह 06:27 ए एम के बाद पारण करके व्रत को पूरा कर लें.

शिव जी की आरती (Shiv ji ki Aarti)

ओम जय शिव ओंकारा, स्वामी जय शिव ओंकारा।
ब्रह्मा, विष्णु, सदाशिव, अर्द्धांगी धारा॥ ओम जय शिव ओंकारा…

एकानन चतुरानन पञ्चानन राजे।
हंसासन गरूड़ासन वृषवाहन साजे॥ ओम जय शिव ओंकारा…

दो भुज चार चतुर्भुज दसभुज अति सोहे।
त्रिगुण रूप निरखत त्रिभुवन जन मोहे॥ ओम जय शिव ओंकारा…

अक्षमाला वनमाला मुण्डमालाधारी।
त्रिपुरारी कंसारी कर माला धारी॥ ओम जय शिव ओंकारा…

श्वेताम्बर पीताम्बर बाघंबर अंगे।
सनकादिक गरुड़ादिक भूतादिक संगे॥ ओम जय शिव ओंकारा…

कर के मध्य कमण्डल चक्र त्रिशूलधारी।
जगकर्ता जगभर्ता जगसंहारकर्ता॥ ओम जय शिव ओंकारा…

ब्रह्मा विष्णु सदाशिव जानत अविवेका।
प्रणवाक्षर के मध्ये ये तीनों एका॥ ओम जय शिव ओंकारा…

पर्वत सोहैं पार्वती, शंकर कैलासा।
भांग धतूरे का भोजन, भस्मी में वासा॥ ओम जय शिव ओंकारा…

जटा में गंग बहत है, गल मुण्डन माला।
शेष नाग लिपटावत, ओढ़त मृगछाला॥ ओम जय शिव ओंकारा…

काशी में विराजे विश्वनाथ, नन्दी ब्रह्मचारी।
नित उठ दर्शन पावत, महिमा अति भारी॥ ओम जय शिव ओंकारा…

त्रिगुणस्वामी जी की आरति जो कोइ नर गावे।
कहत शिवानन्द स्वामी, मनवान्छित फल पावे॥ ओम जय शिव ओंकारा…

कर्पूरगौरं मंत्र
कर्पूरगौरं करुणावतारं, संसारसारम् भुजगेन्द्रहारम्।
सदावसन्तं हृदयारविन्दे, भवं भवानीसहितं नमामि॥



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