हैदराबाद. दशहरे पर नीलकंठ पक्षी के दर्शन को शुभ माना जाता है, लेकिन तेलंगाना में इसी परंपरा से जुड़ा एक मामला विवादों में आ गया है. यहां एक दशहरा कार्यक्रम में तेलंगाना के राजकीय पक्षी नीलकंठ को पिंजरे में बंद कर मंच पर रखा गया था. बाद में तेलंगाना प्रदेश कांग्रेस कमेटी (टीपीसीसी) के अध्यक्ष बी महेश कुमार गौड़ ने पक्षी को आजाद कर दिया. अब इस मामले में वन विभाग ने केस दर्ज किया है.
इस मामले का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद वन विभाग ने यह कार्रवाई की है. अधिकारियों के अनुसार, कार्यक्रम आयोजित करने वाले स्थानीय कांग्रेस नेता, पक्षी को पिंजरे में बंद कर मंच पर लाने वाले व्यक्ति और अन्य लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है. फिलहाल मामले की जांच जारी है.
सोशल मीडिया पर वायरल हुआ वीडियो
यह पूरा मामला हैदराबाद के उप्पल मिनी स्टेडियम में आयोजित दशहरा कार्यक्रम का है. मंगलवार को हुए इस कार्यक्रम का वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया. वीडियो में एक व्यक्ति पिंजरे से नीलकंठ पक्षी निकालकर टीपीसीसी अध्यक्ष बी महेश कुमार गौड़ को सौंपता दिखाई देता है. इसके बाद गौड़ पक्षी को छोड़ देते हैं. वीडियो सामने आने के बाद वन विभाग ने मामले को गंभीरता से लिया. विभाग के अनुसार, 21 अक्टूबर को वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 और भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की संबंधित धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया है.
नीलकंठ को पकड़ना कानूनन अपराध
नीलकंठ तेलंगाना का राजकीय पक्षी है. यह वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 के तहत संरक्षित है. कानून के तहत इस पक्षी को पकड़ना, इसका शिकार करना और इसका व्यापार करना अवैध है.
वन विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि कार्यक्रम आयोजित करने वाले स्थानीय कांग्रेस नेता, पिंजरे में बंद नीलकंठ को मंच पर लाने वाले व्यक्ति और अन्य लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है.
अधिकारी के अनुसार, विभाग उस व्यक्ति की पहचान करने में जुटा है, जो वास्तव में पक्षी को लेकर आया था. मामले में जांच की जा रही है और आगे की कार्रवाई जांच के आधार पर होगी.
वीडियो सोर्स: @vongurishiva
दशहरे पर अलग-अलग जगहों से चार पक्षी बचाए गए
दशहरे के दौरान नीलकंठ पक्षी को लेकर एक और जानकारी सामने आई है. पुलिस ने शहर के अलग-अलग स्थानों से पिंजरों में बंद चार नीलकंठ पक्षियों को बचाया है. दरअसल, दशहरे के दिन नीलकंठ के दर्शन को शुभ माना जाता है. इसी मान्यता के चलते इस पक्षी को देखने की परंपरा भी जुड़ी हुई है. लेकिन संरक्षित पक्षी को पकड़कर पिंजरे में रखना कानून के खिलाफ है.