पूर्णिया की मिट्टी के लिए मटर की ये किस्में हैं बेस्ट, मिलेगा तगड़ा मुनाफा
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Purnia Pea Farming Tips: पूर्णिया की मिट्टी में अक्टूबर और नवंबर में मटर की खेती से किसानों को तगड़ा मुनाफा मिल सकता है. पूर्णिया भोला पासवान शास्त्री कृषि महाविद्यालय के वैज्ञानिक डॉ. विकास कुमार ने मटर की खेती के लिए कई टिप्स दिए. उन्होंने मटर की बेहद फायदेमंद किस्मों को जानकारी दी. जानें टिप्स.
पूर्णिया: आप पूर्णिया में खेती-बाड़ी करते हैं? तो यह खबर आपके लिए है. पूर्णिया की मिट्टी और जलवायु के अनुकूल मटर की खेती अच्छी कमाई का जरिया बन सकती है. मटर की बुवाई के लिए अक्टूबर का महीना सबसे अच्छा माना जाता है. इस समय खेती करने से किसान समय पर फसल तैयार कर बेहतर मुनाफा कमा सकते हैं. इस पर विशेष जानकारी देते हुए पूर्णिया भोला पासवान शास्त्री कृषि महाविद्यालय के वैज्ञानिक डॉ. विकास कुमार कहते हैं कि मटर की खेती के लिए यह समय बहुत अच्छा माना जाता है. किस्मों की बात है तो बहुत सारी किस्में है. जिससे किसानों को कम समय में ज्यादा मुनाफा और बेहतर उत्पादन मिलता है.
मटर की यह सब वरैयाटी बहुत खास
उन्होंने कहा कि जवाहर मटर काफी पुरानी किस्म की मटर है. काफी मुनाफा देता है. जवाहर मटर 83 की भी खेती कर सकते हैं. इसके अलावा जवाहर मटर 15 और अर्रका अजीत और अर्रका कार्तिक और अर्रुका संपूर्णा की मटर की उत्तम किस्मों में एक है. जबकि बोनिबिलि को भी उगाया जाता है. मीठीफली एक मटर होती है. उसको सीधा सब्जी के रूप में इस्तेमाल करते हैं. इसकी खेती भी वृहद पैमाने पर किया जाता है.
35 दिनों में फलन टूटना शुरू, 80 दिनों तक मिलेगा बेहतर उत्पादन
मटर की खेती की शुरुआत अक्टूबर की महीने से हो जाती हैं लेकिन किसान भाई से नवंबर महीने में भी इसे लगा सकते हैं. इसके लिए बीज दर 100 से 120 किलो प्रति हेक्टेयर के दर से लगते हैं. पौधे से पौधे की दूरी 15 सेंटीमीटर के आसपास और पंक्ति से पंक्ति की दूरी 45 सेंटीमीटर के आसपास रखने की जरूरत है. साथ ही साथ मटर की खेती के लिए सहारा यानी अलान देने की जरूरत होती है. हरा मटर फसल 75 से 80 दिनों में तैयार हो जाएगा. इसकी पहली तोड़ाई 35 दिनों में शुरू हो जाती है. 35 से 40 दिनों में इसकी तोड़ाई आसानी से अपने खेतों में ले सकते हैं.
कम समय में लें ज्यादा मुनाफा
इसके अलावा मटर की खेती में पोषक तत्व की ज्यादा जरूरत नहीं होती है. इसमें रायबोजियाम नामक बैक्टीरिया मटर के पौधों के जड़ में रहता है. उसी से पौधे की पोषक तत्वों की पूर्ति होती है. जबकि शुरुआती समय में 20 से 30 किलो प्रति हेक्टेयर नाइट्रोजन और 40 से 50 किलो की हेक्टेयर फास्फोरस और इतनी मात्रा में पोटाश की जरूरत है. हालांकि इसकी खेती में सिंचाई हरेक 10 से 15 दिनों के अंतराल पर करें. हालांकि उन्होंने कहा कि इसकी खेती में कोई बीमारी का भी डर नहीं होता. जिससे आप कम समय में ज्यादा मुनाफा ले सकते हैं.