हर की पैड़ी सूखी, पानी रुकते ही दिखने लगा पुराने कपड़ों और प्लास्टिक का अंबार, नजारा देख आप भी चौंक उठेंगे

हर की पैड़ी सूखी, पानी रुकते ही दिखने लगा पुराने कपड़ों और प्लास्टिक का अंबार, नजारा देख आप भी चौंक उठेंगे


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Haridwar Har Ki Pauri: हरिद्वार के हर की पौड़ी में गंगा की निर्मल धारा इस समय नहीं बह रही है. पानी हटते ही घाटों पर पुराने कपड़ों, फटे जूतों और प्लास्टिक कचरे का अंबार नजर आ रहा है, जहां लोग सिक्के तलाशते दिख रहे हैं. कुंभ 2027 की तैयारियों और सफाई कार्य के कारण 7 नवंबर तक स्नान पर रोक से श्रद्धालुओं में भारी निराशा है.

Haridwar Har Ki Pauri: अक्टूबर के खुशनुमा मौसम में अगर आप धर्मनगरी हरिद्वार आकर हर की पौड़ी के पवित्र जल में आस्था की डुबकी लगाने की योजना बना रहे हैं, तो फिलहाल ठहर जाइए. दरअसल, आस्था का प्रमुख केंद्र मानी जाने वाली हर की पौड़ी की वर्तमान तस्वीर किसी को भी झकझोर सकती है. गंगा की कलकल बहती निर्मल धारा गायब है और उसकी जगह घाटों व सूखी सतह पर सिर्फ पुराने कपड़ों के ढेर, फटे जूते, प्लास्टिक बैग और सड़ांध मारते कचरे का अंबार नजर आ रहा है. जहां कल तक श्रद्धालु श्रद्धा से शीश नवाते थे, वहां अब लोग कीचड़ और रेत के बीच सिक्के तलाशने में जुटे हुए हैं.

गंगनहर में पानी का प्रवाह रुकते ही गंगा की सतह का जो सच सामने आया है, वह न सिर्फ दिल दुखाने वाला है बल्कि गंभीर सवाल भी खड़े करता है. हर की पौड़ी के घाट इस समय किसी कचरा डंपिंग यार्ड जैसे दिखाई दे रहे हैं. गंगा के किनारों और सुरक्षा रेलिंगों पर श्रद्धालुओं द्वारा छोड़े गए पुराने कपड़े लटके हैं. पानी हटने के बाद सूखी तलहटी में भारी मात्रा में जूते-चप्पल और पॉलीथीन का जमावड़ा दिख रहा है.

इस गंदगी के बीच स्थानीय लोग और बच्चे सूखी सतह पर उतरकर श्रद्धालुओं द्वारा गंगा में अर्पित किए गए सिक्के, पैसे और अन्य धातु की वस्तुएं ढूंढने में जुटे हैं. एक तरफ जहां श्रद्धालु जल न पाकर मायूस खड़े हैं.

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देशभर से करोड़ों श्रद्धालु गंगा को मां का दर्जा देकर अपने पापों से मुक्ति और पुण्य की कामना लेकर यहां पहुंचते हैं. लेकिन आस्था की आड़ में छोड़ी गई यह गंदगी अब गंगा के अस्तित्व के लिए नासूर बन चुकी है. जल का बहाव तेज रहने के दौरान यह कचरा आंखों से ओझल रहता था, लेकिन पानी थमते ही घाटों पर पड़ा कचरा और जलीय जीवों के लिए बड़ा खतरा बनकर उभर आया है.

हर की पौड़ी पर पानी न होने की मुख्य वजह गंगनहर की वार्षिक बंदी है. हर साल दशहरे से लेकर दिवाली तक 18 दिनों के लिए नहर में जलापूर्ति रोकी जाती है, ताकि नहर की मरम्मत और सफाई का नियमित रखरखाव पूरा किया जा सके. इस दौरान नहर से सिल्ट और जमा कचरा बाहर निकाला जाता है. प्रशासन के अनुसार, 7 नवंबर की मध्यरात्रि को नहर में दोबारा पानी छोड़ा जाएगा, जिसके बाद ही यहां जल प्रवाह सामान्य हो सकेगा.

इस बार की गंगनहर बंदी केवल सालाना मरम्मत तक ही सीमित नहीं है. वर्ष 2027 में हरिद्वार में आयोजित होने वाले अर्धकुंभ और आगामी महाकुंभ के मद्देनजर हर की पौड़ी और आसपास के घाटों पर बड़े स्तर पर जीर्णोद्धार व मरम्मत कार्य शुरू किए गए हैं. कुंभ के विशाल जनसमूह को ध्यान में रखते हुए घाटों की मजबूती, सीढ़ियों की मरम्मत और बुनियादी ढांचे को दुरुस्त करने का काम युद्धस्तर पर किया जा रहा है.

इन दिनों हरिद्वार में बंगाल से आने वाले श्रद्धालुओं का विशेष सीजन चल रहा है. काफी दूर-दूर से पहुंचे इन यात्रियों को जब यह पता चलता है कि स्नान के लिए जल ही नहीं है, तो उनकी उम्मीदों पर पानी फिर जाता है. कई श्रद्धालु स्नान न कर पाने के कारण केवल आचमन और गंगाजल का छिड़काव कर अपनी यात्रा पूरी कर रहे हैं. प्रशासन के मुताबिक, 7 नवंबर के बाद ही स्थिति सामान्य होगी और श्रद्धालु फिर से हर की पौड़ी पर सुचारू रूप से गंगा स्नान कर सकेंगे.

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