एक तरफ चिप शेयरों में उछाल, दूसरी तरफ माइक्रोन में हड़ताल, आखिर क्या है कर्मचारियों की मांग

एक तरफ चिप शेयरों में उछाल, दूसरी तरफ माइक्रोन में हड़ताल, आखिर क्या है कर्मचारियों की मांग


एक तरफ चिप शेयरों में तेजी आई है, तो दूसरी तरफ ताइवान में अमेरिकी चिप कंपनी माइक्रोन टेक्नोलॉजी के कर्मचारियों ने ज्यादा बोनस और मुनाफे में हिस्सेदारी की मांग को लेकर हड़ताल की है. बुधवार को प्री-मार्केट ट्रेडिंग में सुपर माइक्रो के शेयर 12.17% उछल गए, जबकि SK Hynix में 3.39%, SanDisk में 3.19% और Intel में 1.44% की तेजी दर्ज की गई. Nvidia के शेयर भी बाजार खुलने से पहले करीब 3% चढ़े. पिछले कारोबारी सेशन में AI से जुड़े शेयरों में रिकवरी के बाद कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से निवेशकों का सेंटिमेंट बेहतर हुआ है.

असल में, अमेरिकी चिप कंपनी माइक्रोन टेक्नोलॉजी के ताइवान स्थित ताओयुआन प्लांट (Taoyuan Plant) में कर्मचारियों ने 22 अक्टूबर को एक दिन की हड़ताल की है. कर्मचारी कंपनी से ज्यादा बोनस और मुनाफे में बड़ी हिस्सेदारी मांग रहे हैं. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के लिए इस्तेमाल होने वाली चिप्स की मांग बढ़ने से सेमीकंडक्टर कंपनियों की कमाई में तेजी आई है. ऐसे में कर्मचारियों का कहना है कि कंपनी की बढ़ती कमाई का फायदा उन्हें भी मिलना चाहिए. हालांकि, हड़ताल में शामिल होने वाले कर्मचारियों की संख्या कम रही. इससे फिलहाल प्रोडक्शन पर कितना असर पड़ा है, यह अभी पता नहीं चला है.

कर्मचारियों की मांग क्या है?

माइक्रोन और कर्मचारियों के बीच विवाद बोनस के भुगतान और भविष्य में मुनाफे के डिविजन की व्यवस्था को लेकर है. ताओयुआन प्लांट की यूनियन चाहती है कि कंपनी कर्मचारियों को इस साल ज्यादा बोनस देने के साथ आगे के लिए भी एक स्पष्ट नियम बनाए. यूनियन का कहना है कि कंपनी ने अब तक ऐसा प्रस्ताव नहीं दिया है, जिस पर कर्मचारी सहमत हो सकें. दूसरी ओर, कंपनी ने कहा है कि वह दोनों कर्मचारी यूनियनों के साथ बातचीत जारी रखेगी और आपसी सहमति से समाधान निकालने की कोशिश करेगी.

ताओयुआन प्लांट की यूनियन ने कंपनी से दो मांगें रखी हैं. पहली, कर्मचारियों को इस साल एकमुश्त बोनस के तौर पर 83 महीने के वेतन के बराबर रकम दी जाए. दूसरी, भविष्य में कंपनी के सालाना ऑपरेटिंग प्रॉफिट यानी परिचालन मुनाफे का 15% हिस्सा कर्मचारियों के बोनस के लिए रखा जाए. यूनियन चाहती है कि यह रकम साल में एक बार देने के बजाय हर तीन महीने में बांटी जाए.

माइक्रोन ने इससे पहले कर्मचारियों को 68 महीने के वेतन के बराबर बोनस देने की पेशकश की थी, लेकिन यूनियन ने इसे स्वीकार नहीं किया. कर्मचारियों का कहना है कि कंपनी को बोनस तय करने का तरीका ट्रांसपरेंट बनाना चाहिए, ताकि उन्हें पता हो कि कंपनी के प्रदर्शन के आधार पर उन्हें कितना फायदा मिलेगा.

यूनियन ने दक्षिण कोरिया की चिप कंपनियों सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स और एसके हाइनिक्स का उदाहरण भी दिया है. सैमसंग ने अपने चिप कारोबार के परिचालन मुनाफे का 10.5% विशेष बोनस के लिए रखने पर सहमति जताई थी, जबकि एसके हाइनिक्स ने सालाना परिचालन मुनाफे का 10% हिस्सा कर्मचारियों के बोनस प्रोग्राम के लिए तय किया है.

ताइचुंग यूनियन से समझौते पर विवाद

माइक्रोन के ताइवान में दो अहम प्लांट हैं, ताओयुआन और ताइचुंग. ताइचुंग कंपनी का ताइवान में सबसे बड़ा प्लांट है. यहां की यूनियन और कंपनी ने 21 अक्टूबर को कुछ मुद्दों पर सहमति बनने के बाद लेबर समझौते पर साइन किए. हालांकि, समझौते की शर्तों का खुलासा नहीं किया गया.

इस समझौते से ताओयुआन यूनियन नाराज है. उसका कहना है कि कंपनी ने एक यूनियन के साथ समझौता कर लिया, लेकिन दूसरी यूनियन की मांगों पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया. ताओयुआन यूनियन के अध्यक्ष जेरी लिन ने कहा कि कर्मचारियों ने अभी अपनी मांगों से पीछे हटने का फैसला नहीं किया है.

21 अक्टूबर को ताओयुआन शहर प्रशासन की मौजूदगी में कंपनी और यूनियन के बीच बातचीत हुई, लेकिन कोई सहमति नहीं बन सकी. यूनियन ने कहा है कि वह कंपनी के ठोस प्रस्ताव का इंतजार कर रही है. दोनों पक्षों के बीच बातचीत 23 अक्टूबर को भी जारी रहने की उम्मीद है.

हड़ताल का प्रोडक्शन पर क्या असर पड़ सकता है?

ताओयुआन प्लांट में 2,000 से ज्यादा कर्मचारियों के हड़ताल में शामिल होने की योजना थी, लेकिन मौके पर कुछ ही कर्मचारी प्रदर्शन करते दिखाई दिए. करीब पांच कर्मचारी प्लांट के बाहर इकट्ठा हुए थे. ऐसे में हड़ताल का प्रोडक्शन पर कितना असर पड़ा, इसकी स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है.

माइक्रोन यहां DRAM और हाई-बैंडविड्थ मेमोरी (HBM) जैसी चिप्स बनाती है. इनका इस्तेमाल AI सर्वर और डेटा सेंटर में होता है. दुनियाभर में AI से जुड़ी तकनीक और डेटा सेंटर का विस्तार होने से इन चिप्स की मांग बढ़ी है. ऐसे में अगर कर्मचारियों और कंपनी के बीच विवाद लंबा खिंचता है, तो चिप्स की सप्लाई पर दबाव बढ़ सकता है.

माइक्रोन के मुताबिक, ताइवान में उसके करीब 15,000 कर्मचारी हैं और कंपनी यहां 50 अरब डॉलर से ज्यादा का निवेश कर चुकी है. कंपनी ने कहा है कि वह कर्मचारियों के कानूनी अधिकारों का सम्मान करती है और दोनों यूनियनों के साथ बातचीत के जरिए समाधान निकालना चाहती है.

ताओयुआन यूनियन ने संकेत दिया है कि अगर कंपनी कर्मचारियों की मांगों पर ठोस प्रस्ताव नहीं देती है, तो हड़ताल में और कर्मचारी शामिल हो सकते हैं. यूनियन का कहना है कि मौजूदा कार्रवाई कंपनी पर दबाव बनाने के लिए है और बातचीत के रास्ते बंद नहीं किए गए हैं.

ताइवान के राष्ट्रपति लाई चिंग-ते ने भी कंपनी और कर्मचारियों से ईमानदारी के साथ बातचीत करने की अपील की है.अब सबकी नजर 23 अक्टूबर को होने वाली बातचीत पर है. अगर दोनों पक्ष किसी समझौते पर पहुंचते हैं, तो विवाद हल हो सकता है.



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