Last Updated:
जापान की प्रसिद्ध मैगजीन ‘PRESIDENT’ ने आनंद कुमार और उनकी नई पहल ‘सुपर इन्फिनिटी’ की जमकर तारीफ की है. इसे एक वैश्विक शैक्षणिक आंदोलन बताया गया है. इस प्लेटफॉर्म के जरिए कहानी और ग्राफिक्स से गणित को सरल बनाया जाता है. आनंद कुमार ने इस अंतरराष्ट्रीय सम्मान पर खुशी जताई है.
आनंद कुमार के फेसबुक से प्राप्त फोटो
पटना: ‘सुपर 30’ के संस्थापक और मशहूर गणितज्ञ आनंद कुमार को एक और बड़ी अंतरराष्ट्रीय उपलब्धि मिली है. जापान की प्रतिष्ठित मैगजीन ‘प्रेसिडेंट’ (PRESIDENT) ने अपने ताजा अंक में उन्हें खास जगह दी है. पत्रिका ने आनंद कुमार की नई शैक्षणिक पहल ‘सुपर इन्फिनिटी’ की जमकर सराहना की है और इसे एक वैश्विक शैक्षणिक आंदोलन के रूप में पेश किया है.
आनंद कुमार ने क्या कहा?
इस बड़ी उपलब्धि की जानकारी खुद आनंद कुमार ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट के जरिए साझा की है. उन्होंने फेसबुक पर अपनी खुशी जाहिर करते हुए एक भावुक पोस्ट लिखी. उन्होंने लिखा कि जब उन्हें पता चला कि जापान की इतनी बड़ी पत्रिका ने उनके काम को सराहा है, तो उन्हें बहुत संतोष मिला.
आनंद कुमार ने कहा कि पिछले छह वर्षों की उनकी लगातार मेहनत अब रंग ला रही है. उन्हें इस बात की सबसे ज्यादा खुशी है कि दुनिया के हर बच्चे तक बेहतर शिक्षा पहुंचाने का उनका सपना अब जापान में भी सराहा जा रहा है. उनका मुख्य संकल्प बच्चों के मन से गणित का डर पूरी तरह खत्म करना है.
आनंद कुमार का फेसबुक पोस्ट
उन्होंने आगे लिखा कि यह सराहना उनके लिए सिर्फ एक सम्मान नहीं है, बल्कि अपने सपने को और बड़े स्तर पर ले जाने की एक नई प्रेरणा है. उन्होंने इसके लिए जापान की प्रेसिडेंट पत्रिका का दिल से आभार व्यक्त किया है.
क्या है ‘सुपर इन्फिनिटी’?
बता दें कि चर्चित गणितज्ञ आनंद कुमार द्वारा हाल ही में शुरू की गई ‘सुपर इन्फिनिटी’ एक आधुनिक डिजिटल लर्निंग प्लेटफॉर्म है, जिसका उद्देश्य गणित जैसे कठिन विषय को छात्रों के लिए बेहद सरल, रोचक और आनंददायक बनाना है. ‘सुपर 30’ की अपार सफलता के बाद शुरू की गई इस नई वैश्विक पहल के तहत, वे कहानी कहने (storytelling), संगीत और विजुअल ग्राफिक्स का अनोखा इस्तेमाल कर रहे हैं ताकि बुनियादी गणित से लेकर आईआईटी-जेईई स्तर तक की पढ़ाई को आसान बनाया जा सके. यूट्यूब और इस डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से वह जटिल गणितीय सिद्धांतों को काल्पनिक और मनोरंजक पात्रों के जरिए समझाते हैं, जिससे देश-दुनिया के दूर-दराज इलाकों में बैठे वंचित और जरूरतमंद छात्रों को भी मुफ्त और उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा मिल सके.