बलिया के 22 वर्षीय सूर्यप्रताप सिंह यूपी के 75 जिलों की यात्रा पर निकले, जानेंगे कल्चर, नोएडा में रहकर कर रहे थे बीबीए की पढ़ाई

बलिया के 22 वर्षीय सूर्यप्रताप सिंह यूपी के 75 जिलों की यात्रा पर निकले, जानेंगे कल्चर, नोएडा में रहकर कर रहे थे बीबीए की पढ़ाई


फिरोजाबादः लखनऊ से एक अनोखी यात्रा की कहानी सामने आई है, जो सोशल मीडिया पर नहीं बल्कि सड़कों पर लिखी जा रही है. 22 साल के सूर्यप्रताप सिंह ने ठान लिया है कि वह उत्तर प्रदेश के सभी 75 जिलों को पैदल और लिफ्ट लेकर घूमेंगे. इस यात्रा का मकसद सिर्फ घूमना नहीं, बल्कि यूपी की असली आत्मा को समझना है. सूर्यप्रताप मूल रूप से बलिया जिले के रहने वाले हैं, लेकिन उनका परिवार ग्रेटर नोएडा में रहता है. वह वर्तमान में बीबीए की पढ़ाई कर रहे हैं. घुमक्कड़ी के शौक ने उन्हें इस बड़े मिशन की प्रेरणा दी.

उन्होंने अपनी यात्रा की शुरुआत राजधानी लखनऊ से की है और अब तक वह 10 जिलों का भ्रमण पूरा कर चुके हैं. अपनी यात्रा के दौरान वह रोजाना कम से कम 10 किलोमीटर पैदल चलते हैं और एक जिले से दूसरे जिले तक जाने के लिए आम लोगों से लिफ्ट लेते हैं. रात होने पर वह किसी मंदिर, गुरुद्वारा या अन्य सुरक्षित सार्वजनिक स्थान पर रुककर रात गुजारते हैं. यह यात्रा पूरी तरह से कम बजट और ज्यादा अनुभव पर आधारित है.

हर जिले के कल्चर को देखने निकला है युवा,10 जिलों का कर चुका भ्रमण

लोकल 18 की टीम ने सूर्यप्रताप से बातचीत की, तो उन्होंने अपनी सोच को साफ तौर पर बताया. उन्होंने कहा कि उन्हें बचपन से ही नई जगहों को देखने का शौक रहा है. पढ़ाई के दौरान उन्होंने महसूस किया कि यूपी के बारे में हम किताबों में तो बहुत पढ़ते हैं, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही है. हर 50-100 किलोमीटर पर यहां बोली बदल जाती है, खानपान बदल जाता है, लोगों का व्यवहार और काम करने का तरीका बदल जाता है.

इसी जिज्ञासा ने उन्हें 75 जिलों की यात्रा पर निकलने के लिए प्रेरित किया. वह जानना चाहते हैं कि अवध का कल्चर ब्रज से कैसे अलग है, बुंदेलखंड का बिजनेस मॉडल पूर्वांचल से कैसे जुदा है, और पश्चिमी यूपी की भाषा पूर्वी यूपी से कितनी अलग है. उनका मानना है कि यह अनुभव उन्हें न सिर्फ एक अच्छा ट्रेवलर बनाएगा, बल्कि बिजनेस की पढ़ाई में भी काफी मदद करेगा, क्योंकि वह हर जिले के लोकल बिजनेस, मार्केट और लोगों की जरूरतों को करीब से समझ पा रहे हैं. रास्ते में लोग उन्हें काफी मदद भी कर रहे हैं, कोई खाने के लिए पूछ लेता है तो कोई अपने घर में रुकने की जगह दे देता है.

सोशल मीडिया पर भी शेयर कर रहे हैं अनुभव

सूर्यप्रताप का सपना आगे चलकर एक प्रोफेशनल ट्रेवलर और कंटेंट क्रिएटर बनने का है, लेकिन उससे पहले वह अपने प्रदेश को पूरा देख लेना चाहते हैं. उनकी यह यात्रा युवाओं के लिए भी एक बड़ा संदेश है कि डिग्री के साथ-साथ जमीनी अनुभव भी बहुत जरूरी है. आज जब ज्यादातर युवा AC कमरों में बैठकर दुनिया को इंटरनेट पर देखते हैं, तब यह युवा धूप, बारिश और पैदल चलने की थकान के बीच असली यूपी से मिल रहा है.

उसकी यात्रा में न कोई बड़ा स्पॉन्सर है, न कोई टीम, सिर्फ एक बैग, एक पानी की बोतल और यूपी को जानने का जुनून है. अगर उसकी यात्रा इसी रफ्तार से चलती रही, तो आने वाले कुछ महीनों में वह पूरे 75 जिलों का सफर पूरा कर लेंगे. फिलहाल वह अपने हर जिले के अनुभव को डायरी में नोट कर रहे हैं और सोशल मीडिया पर भी शेयर कर रहे हैं, ताकि दूसरे लोग भी यूपी की विविधता को उनके नजरिए से देख सकें.



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