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पाकिस्तान, इंडोनेशिया, तुर्की और कतर के बीच बद्र MoU साइन किया गया. ये अगस्त के बाद खाड़ी में हुआ दूसरा ऐसा समझौता शामिल है, जिसमें तुर्की और पाकिस्तान शामिल हैं. ऐसे में ये सवाल उठने लगे हैं कि क्या खाड़ी में एक नया मुस्लिम गठजोड़ बन रहा है.
तुर्की, पाकिस्तान, कतर और इंडोनेशिया के बीच बद्र MoU साइन हुआ है. (फोटो-रॉयटर्स)
पाकिस्तान ने अब कतर, तुर्की और इंडोनेशिया के साथ एक नया समझौता साइन किया है. इसे बद्र मेमोरेंडम ऑफ अंडस्टैडिंग नाम दिया गया है. नए समझौते का मकसद चारों देशों के बीच साझा सैन्य सहयोग बढ़ाना है. इसमें उत्पादन, सैन्य प्रशिक्षण, रिसर्च के साथ आपसी तालमेल का भी वादा किया गया है. खास बात यह है कि हाल के महीनों में ये लगातार दूसरा ऐसा समझौता है जिसमें पाकिस्तान और तुर्की साझेदार हैं. इससे पहले दोनों देशों ने सऊदी अरब के साथ मिलकर मक्का पैक्ट साइन किया था.
कतर की सरकारी समाचार एजेंसी के मुताबिक समझौते जरिए चारों देश अपनी रक्षा उत्पादन क्षमताओं का इस्तेमाल कर एक-दूसरे का सहयोग करेंगे. इस समझौते में भविष्य में अन्य देशों के शामिल होने का रास्ता भी रखा गया है.
क्या है बद्र MoU
पाकिस्तान, तुर्की, कतर और इंडोनेशिया के बीच सह समझौता दोहा में साइन हुआ है. इसका नाम बद्र रखा गया है. यह अरबी भाषा का शब्द है, जिसका शब्द होता है पूर्ण चांद. यानी पूर्णिमा का चांद. कतर की सरकारी समाचार एजेंसी के मुताबिक यह समझौता सिर्फ सैन्य जरूरतों को पूरा नहीं करता, बल्कि चारों देशों के अपने-अपने आर्थिक हित भी इससे पूरे हो रहे हैं. दरअसल तुर्की के बाद बेहतरीन रक्षा उद्योग, हथियारों के डिजाइन और निर्माण का अनुभव है. पाकिस्तान के पास सैन्य उत्पादन क्षमता और घरेलू बाजार है. इंडानेशिया के पास निर्माण क्षमता को ज्यादा नहीं हैं, मगर बेहतर बाजार है. कतर के पास न तो बाजार है और न ही कोई स्थापित रक्षा उद्योग मगर निवेश की बेहतर क्षमता है.
मक्का पैक्ट बद्र से अलग
बद्र MoU से पहले अगस्त माह में ही पाकिस्तान, सऊछी और तुर्की ने मिलकर मक्का जॉइंट डिफेंस एग्रीमेंट साइन किया था. बद्र समझौता जहां सैन्य उत्पादन और सहयोग बढ़ाने के लिए वहीं मक्का पैक्ट एक-दूसरे की सुरक्षा से संबंधित है. इसकी सबसे खास शर्त यही है कि अगर तीनों में से किसी एक देश पर हमला किया गया तो यह अटैक सदस्य देशों पर माना जाएगा. समझौते के मुताबिक अगर ऐसा हेाता है तो सदस्य देश एक दूसरे को अपनी क्षमता के हिसाब से सांसाधन उपलब्ध कराएंगे. समझौते में सैन्य ट्रेनिंग, अभ्यास, खुफिया जानकारी का आदान प्रदान और आतंकवाद के खिलाफ सहयोग जैसे प्रावधान शामिल हैं.
बद्र MoU और मक्का पैक्ट में अंतर
क्या खाड़ी में नया मुस्लिम रक्षा गठजोड़?
मक्का पैक्ट और उसके तुरंत बाद बद्र MoU का साइन होना साउथ एशिया और साउथ ईस्ट एशिया के मुस्लिम देशों के बीच उभरते संबंध दर्शा रहा है. हालांकि एक्सपर्ट मानते हैं कि अभी इसे नया मुस्लिम रक्षा गठजोड़ कहना जल्दबाजी होगी. दरअसल इस गठजोड़ के जो उद्देश्य है वह संबंधित देशों के आपसी हित को साध रहे हैं.
- सदस्य देश विदेशी हथियारों पर निर्भरता कम करने की कोशिश में है. दरअसल सिर्फ हथियार खरीदना ही पर्याप्त नहीं होता, उनके कलपुर्जे, मरम्मत गोला बारूद समेत तकनीकी सहायता भी चाहिए होती हैं. नए समझौते से चारों देश एक-दूसरे से ये सहायता उपलब्ध कराएंगे.
- तुर्की एक बड़ा रक्षा उत्पादक देश है, ऐसे में उसको सदस्य देशों में एक बड़ा बाजार मिल सकता है. खासतौर से निवेश और खरीद के जरिए इस सहयोग को बड़ा आर्थिक आधार दे सकता है.
- समझौते में सबसे बड़ा देश तुर्की है. यह नाटो का भी प्रमुख सदस्य है और नाटो में अमेरिका के बाद सबसे बड़ी सेना वाला दूसरा देश भी है.ऐसे में तुर्की किसी नए मुस्लिम रक्षा गठजोड़ में शामिल होगा यह बेहद मुश्किल है, क्योंकि अगर ऐसा होता है तो सबसे पहले नाटो ही इस पर आपत्ति करेगा.