Sweet Expiry Date Explainer: सौ बात की एक बात ये कि दुनिया जहान की ख़बरों के बीच त्योहारों के सीज़न की अहम ख़बर पर पब्लिक का उतना ध्यान नहीं गया तो उसको अंडरलाइन करना ज़रूरी है. लेकिन पब्लिक को भले ही अभी ज़्यादा पता ना हो, मिठाई वाले टेंशन में हैं, हलवाई परेशान घूम रहे हैं. हालांकि ये हाल अभी यूपी और उत्तराखंड के मिठाई वालों का ही है. क्योंकि दिवाली सर पर है और ठीक इसी समय नया नियम आ गया है कि मिठाइयों की भी एक्सपायरी डेट बतानी होगी. पैकेट वाली मिठाइयां ही नहीं. खुले में जो बिकती हैं… उनकी भी तारीख़ लिखनी होगी कि कब बनी और कब तक ताज़ा रहेगी. अभी तक तो जब आप पूछते थे कि भैया ये रसगुल्ले ताज़ा हैं ना, बर्फ़ी फ़्रेश है ना, तो हर मिठाईवाला यही कहता था कि बस अभी-अभी आई है. रोज़ नया स्टॉक आता है और त्योहार के टाइम में तो इतनी सेल हो रही है, बासी मिठाई हो ही नहीं सकती, यही दावा कर दिया जाता था. लेकिन अब लिखना पड़ेगा. तारीख़ लिखनी पड़ेगी. फ़रमान जारी कर दिया गया है.
दूध या छेने से बनी मिठाई तो एक-दो दिन में ही खराब हो जाती है. बाक़ी भी कुछ ही दिन ताज़ा रह पाती हैं. अब तक दुकानवाले की बात पर यक़ीन करने के अलावा तो कोई ऑप्शन था नहीं. अब खाद्य विभाग ने आदेश दे दिया है कि हर ट्रे या हर काउंटर पर साफ़-साफ़ लिखना होगा कि इस मिठाई को किस तारीख़ तक खाया जा सकता है. यूपी और उत्तराखंड में. उत्तराखंड में तो बेकरी आइटम पर भी लिखना होगा. पैकेट पर तो देश भर में लिखना होता है. UP और उत्तराखंड के खाद्य विभाग ने ये नियम खुले में रखे आइटम पर भी लगा दिया है. हलवाई कह रहे हैं कि ये कैसे करेंगे? कुछ कह रहे हैं कि त्योहारों में तो हर कुछ घंटे में ट्रे फिर से भरती रहती है. हर बार तारीख बदलकर स्टिकर कैसे लगाते फिरेंगे? छोटे हलवाई कह रहे हैं कि पहले ही कर्मचारी कम हैं ऊपर से ये काम और आ गया. इनके संगठन खाद्य विभाग से अपील कर रहे हैं कि थोड़ा टाइम दे दो बाद में लागू कर लेना. लेकिन बाद में तो त्योहार ही निकल जाएंगे.
मिठाई पर एक्सपायरी डेट वाला नियम
दुकानदार कह रहे हैं कि ये तो विभाग के इंस्पेक्टर आ कर तंग करेंगे त्योहारों के मौसम में. वो सब सही भी हो सकता है और इंस्पेक्टर लोग तो बदनाम होते ही हैं. लेकिन पब्लिक का भी तो सोचो. व्यापारियों के तो संगठन होते हैं, पब्लिक तो विभाग से ही उम्मीद करेगी कि खाने-पीने की चीज़ें ठीक मिलें. तो अगर पता चल जाए कि मिठाई कब बनी है और कब तक ताज़ा रहेगी तो पब्लिक तो यही चाहेगी. लेकिन जो कोई नहीं बता रहा वो ये कि ये नियम कोई नया नहीं है. 6 साल से सरकार कोशिश कर रही है, लागू ही नहीं हो पा रहा था. केंद्र सरकार ने तो 2020 में नियम बना दिया था. चक्कर क्या है कि केंद्र सरकार की इकाई है FSSAI, वो खाने-पीने की चीज़ों के लिए नियम बनाती है. लेकिन लागू करवाने होते हैं राज्य सरकारों के खाद्य सुरक्षा विभागों को. तो FSSAI ने नियम बना दिया था 2020 में कि खुले में रखा हुई मिठाइयों पर तारीख़ लिखनी होगी. और राज्य सरकारों से कहा कि इसको लागू करो. लेकिन सब दुकानदारों ने हल्ला कर दिया, उनके संगठनों ने विरोध कर दिया और नियम लागू ही नहीं हो पाया और आख़िर 2023 में नियम वापस ले लिया गया.
पब्लिक को पता भी नहीं यह नियम
पब्लिक को तो पता भी नहीं चला कि ऐसा कोई नियम बनाया था और फिर वापस भी हो गया. जबकि नियम बनते हैं पब्लिक के नाम पर. असली मुद्दे तो ये हैं न पब्लिक के. हां, लागू होगा या नहीं होगा वो तो सवाल है ही, लेकिन कम अज़ कम UP और उत्तराखंड ने नियम तो बनाया. विभाग के इंस्पेक्टर जाकर ऐक्शन तो ले सकते हैं ये ताक़त तो आई उनके हाथ में. हज़ारों छोटी-छोटी दुकानों में कितने इंस्पेक्टर जा पाएंगे वो भले ही सवाल हो लेकिन नियम है तो डर तो रहेगा. ये कहने वाले तो अब भी मिल जाएंगे कि ले-देकर दुकानवाले सेटल कर लेंगे या ये उगाही का ज़रिया बन जाएगा, लेकिन ये तो हर नियम के लिए कह सकते हैं, तो क्या नियम ही ना हो वो बहतर है. UP ने बनाया है तो दूसरे राज्यों पर भी तो प्रेशर बनेगा. एक जो दिक़्क़त वाकई है वो ये कि सरकार ने ये तय नहीं किया है कि कौन सी मिठाई कितने दिन चलने वाली मानी जाएगी. ये दुकानदार को खुद तय करना है.
मिठाई की दुकान पर अब लिखनी होगी तारीख.
इस नियम में भी दुकानदार निकाल लेंगे झोल?
मतलब दूध वाली मिठाई को अगर कोई 7-8 दिन तक खाने लायक बता दे और वो दो दिन में ख़राब होने वाली हो तो उसे ग़लत साबित करना मुश्किल है. और एक बार मिठाई बिक गई या ग्राहक घर ले गया उसके बाद ये ट्रैक कर पाएंगे कि तारीख सही थी या नहीं. क्योंकि पैकेट वाले आइटम में तो पैकेट होता है सबूत के तौर पर. ये तो खुले में ख़रीदी हुई मिठाई होगी. या ट्रे से निकाल कर दुकान में अपने सामने जो लोग डब्बे में डलवाते हैं वो भी साबित नहीं कर पाएंगे कि कौन सी ट्रे की मिठाई थी अगर ख़राब निकली या खाने से तबीयत बिगड़ गई तो. वैसे बाक़ी कहीं दुनिया में ऐसा नियम सुना नहीं है. पैकेट वाले खाने पर तो तारीख़ लिखने का नियम सब जगह होता है, ये खुले में ताज़ा बने आइटम की तारीख़ वाला नियम नया ही है. लेकिन भारत में समस्याएं भी तो दुनिया से निराली होती हैं. यहां तो हर चीज़ ताज़ा ही बता कर बेच दी जाती है बिना किसी डर के और फिर जब कोई फ़ूड पॉयज़निंग हो जाए तो भुगतते रहो.
क्यों मिठाई के दुकानदार डरे हुए हैं?
विदेशी जो आते हैं वो तो खुले में मिल रहा कुछ भी खाने से बचते रहते हैं भारत में. तो त्याहारों के मौसम में अगर किसी राज्य के विभाग ने ऐसा नियम बनाया है तो अच्छा ही है. हालांकि विभाग भी यही कह रहा है कि ये जागरूकता के लिए ज़्यादा कारगर होगा. लोगों को पता तो रहे कि कोई चीज़ कब की बनी हुई बेची जा रही है. और जैसे-जैसे लोगों को पता चलेगा तो वो भी ख़ुद डिमांड करने लगेंगे कि भैया तारीख़ क्यों नहीं लिखी मिठाई पर. इसी से तो दुकानदार डरे हुए हैं. अब तो पब्लिक ही डरी-डरी रहती थी. यूपी में तो खाद्य सुरक्षा विभाग का ‘शुद्ध ही शुभ है’ अभियान चल रहा है. पहले फोकस ज्यादातर दूध, मसाले और पानी वगैरह पर था. अब त्योहारों के मौके पर मिठाइयों पर ध्यान दिया गया. हालांकि, ये तारीख़ लिखने से ये नहीं पता चलेगा कि मिलावट वाली मिठाई है या नहीं.
6 साल से अब तक लागू नहीं हुआ नियम
वो तो अलग ही मसला है. ये तो ताज़ा होने की ज़िम्मेदारी लेनी पड़ेगी मिठाईवाले को. और विभाग के छापे वगैरह पड़ते रहेंगे तो थोड़ा डर रहेगा. लेकिन गांवों-क़स्बों में कहां-कहां तक जाते रहेंगे विभाग वाले. पब्लिक को तो ये भी नहीं पता कि 6 साल पहले नियम बना था लागू नहीं हुआ. अब ये मत कहना कि पब्लिक को कैसे पता चलेगा कि ये नियम आ गया है कि मिठाईवाले को तारीख़ बतानी ही है. बता तो रहे हैं आपको. इतनी देर से क्या सुन रहे थे? अब आप भी जाकर सबको बताओ. और दुकानवालों से बोलो कि एक्सपायरी डेट बताएं, ऐसे नहीं कि सब ताज़ा है आज ही सुबह आया है. सौ बात की एक बात.