तिहाड़ जैसी हाई सिक्योरिटी जेलों में कैदियों को मोबाइल फोन कैसे मिल जाते हैं?
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लॉरेंस बिश्नोई जब तिहाड़ जेल में बंद था तो उसके मोबाइल फोन यूज करने के सबूत मिले थे. यहां से कुछ महीने के लिए वह भटिंडा जेल में रहा और वहां से अहमदाबाद की साबरमती जेल भेजा गया. यहां वह हाईसिक्योरिटी वार्ड में बंद है.
लॉरेंस बिश्नोई गैंग लगातार बढ़ा रहा है अपना प्रभाव.
टाइगर श्रॉफ की जान लेने की कोशिश में एक बार फिर लॉरेंस का नाम चर्चा में है. वह अहमदाबाद की हाईसिक्योरिटी साबरमती जेल में बंद है, फिर भी जेल के अंदर से लगातार अपना नेटवर्क चला रहा है. मगर सवाल है कैसे? दरअसल गृह मंत्रालय के आदेश के तहत लॉरेंस को साबरमती जेल के हाई सिक्योरिटी वार्ड में रखा गया है. उसकी आवाजाही पर भी सख्त पाबंदी है. यहां तक कि उसके वकील को भी लॉरेंस से मिलने की इजाजत नहीं है. कोर्ट में पेशी भी वीडियो कांफ्रेसिंग के जरिए होती है. ऐसे में सुरक्षा एजेंसियों के लिए भी ये बात पहेली है कि आखिर वह अपने मैसेज को नेटवर्क तक कैसे पहुंचाता है.
जेल में मोबाइल फोन पर प्रतिबंध है, फिर भी गाहे-बगाहे ऐसे मामले सामने आते रहते हैं, जिनमें जेल में फोन का यूज किए जाने की पुष्टि होती है. खासतौर से दिल्ली की तिहाड़ और अन्य हाईसिक्योरिटी जेलों में कई बार ये बात साबित हो चुकी है. गैंगस्टर जितेंद्र गोगी की हत्या ओ या सिद्धू मूसेवाला का मर्डर. ऐसा दावा किया जाता है कि सबकी प्लानिंग जेल में ही हुई.
सुरक्षा एजेंसियों को खुद इस बात के सबूत मिले थे कि तिहाड़ जेल में लॉरेंस ने फोन प्रयोग किया. उसने एक चैनल में खुद भी इस बारे में बताया था. मगर साबमरती जेल में तो इतनी हाई सिक्योरिटी है कि परिंदा भी पर नहीं मार सकता. ऐसा बताया जाता है कि लॉरेंस को जिस वार्ड में रखा गया है वहां 10 कमरे हैं, जिनमें 9 खाली हैं. वह अकेला ही वहां रहता है और उस हिस्से में मोबाइल नेटवर्क भी नहीं आते.
तिहाड़ में मिले थे फोन का यूज होने के सबूत
साबरमती जेल में भले ही लॉरेंस को कड़ी सुरक्षा में रखा गया हो, मगर तिहाड़ जेल में उसके रहने के दौरान सामने आया था कि वह मोबाइल से ही नेटवर्क चला रहा है. सिर्फ लॉरेंस के मामले में ही नहीं. सुकेश चंद्रशेखर भी जेल से ठगी का पूरा नेटवर्क संचालित करता था. इसके अलावा जितेंद्र गोगी की हत्या, कुलदीप के फरार होने और सिद्धू मूसेवाला की हत्या की पूरी प्लानिंग जेल में ही की गई थी. एक कैदी ने तो जांच के दौरान मोबाइल को छिपाने के लिए निगल ही लिया था.
कैसे पता चला था लॉरेंस के पास मोबाइल है?
29 मई 2022 को जब सिद्धू मूसेवाला की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. लॉरेंस बिश्नोई के खास गोल्डी बराड़ ने इसकी जिम्मेदारी ली. इंडिया टुडे ने 22 जुलाई को एक रिपोर्ट प्रकाशित की. इसमें दावा किया गया कि हत्या के तुरंत बाद ही जेल में बंद लॉरेंस को फोन किया गया था, जिसमें बधाई देकर हत्या की जानकारी दी गई थी. इसके बाद जांच एजेंसियों ने जेल के भीतर हो रहे मोबाइल के प्रयोग की जांच शुरू की. नवंबर 2022 में दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल तिहाड़ में बंद इंडियन मुजाहिद्दीन के एक आरोपी द्वारा प्रयोग किए जा रहे फोन नंबर की जांच कर रही थी, तब ये सामने आया कि लॉरेंस भी फोन का प्रयोग कर रहा है.
तिहाड़ से 5 साल में बरामद हुए 350 मोबाइल फोन
इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक RTI से मिली जानकारी के मुताबिक तिहाड़ सेंट्रल जेल नंबर 3 में 2020 से 2025 के बीच तकरीबन 350 मोबाइल फोन बरामद हुए हैं. यानी जेल में मोबाइल का प्रयोग करना सिर्फ किसी एक गैंग तक सीमित नहीं है. जेल में लगातार इस तरह के मामले सामने आते रहते हैं. अक्सर ऐसे मामलों के पीछे कर्मचारियों की मिलीभगत होती है.
TOI की एक रिपोर्ट के मुताबिक अगस्त 2025 में तिहाड़ के नौ अधिकारियों को ककित उगाही नेटवर्क से संबंधों के आरोप में निलंबित किया गया था. खास बात ये है कि जेल में बरामद मोबाइल में तकरीबन 202 केचोआडा फोन थे जो आकार में बेहद छोटे होते हैं. इंडियन एक्सप्रेस की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक यह मोबाइल पानी की टंकियों, दीवारों की खाली जगहों व अन्य हिस्सों में छिपाए जाते हैं.