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Burhanpur Ravan Dahan: बुरहानपुर के शिकारपुरा क्षेत्र के युवाओं ने 15 दिन की मेहनत से 12 फीट ऊंचा रावण तैयार किया है. विजयादशमी के अवसर पर रावण के साथ देश विरोधी गतिविधियों से जुड़े 10 लोगों के प्रतीकात्मक मुंड का भी दहन किया गया.
Burhanpur Ravan Dahan: विजयादशमी के पर्व को लेकर शहर में उत्साह का माहौल है. इसी बीच बुरहानपुर के शिकारपुरा क्षेत्र के युवाओं ने अपनी रचनात्मकता और मेहनत से 12 फीट ऊंचा रावण तैयार किया है. इस रावण को बनाने में युवाओं को करीब 15 दिन का समय लगा. इसकी खासियत यह है कि रावण के साथ देश विरोधी गतिविधियों से जुड़े 10 लोगों के प्रतीकात्मक मुंड भी बनाए गए हैं जिनका विजयादशमी के अवसर पर रावण के साथ दहन किया गया. विजयादशमी के अवसर पर रावण दहन किया गया आयोजन को लेकर शिकारपुरा क्षेत्र के युवाओं में खासा उत्साह युवाओं की यह पहल त्योहार के प्रति उनके उत्साह, सामूहिक सहयोग और भारतीय परंपराओं के प्रति जुड़ाव को दर्शाती है.
युवकों ने दी जानकारी
लोकल 18 की टीम को पीयूष वाघ मीत निमाड़कर ने जानकारी देते हुए बताया कि शिकारपुरा क्षेत्र के युवाओं द्वारा हर साल रावण का निर्माण कर विजयादशमी का पर्व मनाया जाता है. इस बार भी युवाओं ने भारतीय संस्कृति और परंपराओं को जीवित रखने के उद्देश्य से रावण बनाने की जिम्मेदारी उठाई. घर की वेस्ट सामग्री से रावण की निर्माण किया.लगातार 15 दिनों तक मेहनत कर उन्होंने रावण का आकर्षक स्वरूप तैयार किया है. रावण को बनाने में युवाओं ने अपनी कला हुनर और मेहनत का परिचय दिया है।
पावरलूम के कपड़े और रंग-बिरंगी लाइटिंग से सजाया रावण
रावण के निर्माण में बुरहानपुर की पहचान पावरलूम के कपड़े के साथ बांस घास पताका और अन्य सजावटी सामग्री का इस्तेमाल किया गया है. इसके अलावा रावण को आकर्षक बनाने के लिए रंग-बिरंगी लाइटिंग की व्यवस्था भी की गई है. रावण दहन को खास बनाने के लिए इसमें पटाखों का भी इस्तेमाल किया गया. युवाओं ने हर छोटी-बड़ी चीज का ध्यान रखते हुए रावण को तैयार किया है ताकि विजयादशमी के दिन दहन के दौरान लोगों को आकर्षक दृश्य देखने को मिला.
संस्कृति और परंपरा को आगे बढ़ाने की पहल
क्षेत्र के युवा पीयूष ने बताया कि भारतीय संस्कृति और परंपराओं को जीवित रखने के उद्देश्य से वे हर साल मिलकर रावण का निर्माण करते हैं. इस आयोजन के माध्यम से नई पीढ़ी को भी त्योहारों की परंपराओं से जोड़ने का प्रयास किया जाता है. युवाओं ने मिलकर 15 दिनों तक मेहनत की और रावण को अंतिम रूप दिया.