मथुरा: NHM संविदा कार्मिओं के कार्य बहिष्कार के बाद अब राजकीय नर्सेज संघ के पदाधिकारी और कर्मचारी भी हड़ताल पर चले गए हैं. 13 सूत्रीय मांगों को लेकर प्रदेश व्यापी हड़ताल चल रही है. मथुरा की महिला जिला अस्पताल में दर्जनों सरकारी कर्मचारी और पदाधिकारी हड़ताल के बाद कार्य बहिष्कार पर हैं. यह लोगों की कौन-कौन सी मांगे हैं. सरकार से क्या चाहते हैं? लोकल 18 की रिपोर्ट के माध्यम से देखते हैं.
21 करेंगे कार्य बहिष्कार
9 अक्टूबर से राजकीय नर्सेज संघ के पदाधिकारी और कर्मचारी काली पट्टी बांधकर अपना विरोध प्रदर्शन कर रहे थे. लगातार इन लोगों का विरोध प्रदर्शन चल रहा था. सरकार के द्वारा इन्हें कोई आश्वासन नहीं दिया गया और अब यह लोग 21 अक्टूबर से कार्य बहिष्कार पर रहेंगे. सुबह 8 बजे से लेकर और सुबह 10 तक यह सभी लोग कार्य बहिष्कार पर रहेंगे. राजकीय नर्सेज संघ के मथुरा अध्यक्ष सुनील श्रीवास्तव ने लोकल 18 से बातचीत करते हुए बताया कि हम लोगों की 13 सूत्रीय प्रमुख मांगे हैं. सरकार के द्वारा अगर मांगे नहीं मानी जाती है, तो उग्र आंदोलन होगा अभी हम लोग 2 घंटे के कार्य बहिष्कार पर हैं.
ये हैं 13 सूत्रीय मांग
सुनील श्रीवास्तव ने कहा कि पहली मांग है कि विभाग के अन्य संवर्गों एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग के अधीन कार्यरत नर्सेज की भांति चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के अधीन कार्यरत नर्सिंग संवर्ग की तैनाती उनके गृह जनपद में की जाय. चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग तथा चिकित्सा शिक्षा विभाग के अधीन कार्यरत नर्सिंग संदर्ग को एसजीपीजीआई, केजीएमयू, आरएनएलआई, लखनरू एवं आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय सैफई, इटावा की भांति समस्त भत्ते प्रदान किये जाए. अन्य प्रदेशों की भांति उप्र नर्सिंग कांउसिल, लखनऊ में रजिस्ट्रार के पद पर नियमानुसार नर्सिंग संवर्ग से रजिस्ट्रार की नियुक्ति/तैनाती की जाये. महानिदेशालय एवं चिकित्सालय स्तर पर 2010 पूर्व से रिक्त उच्च पदों को पदोन्नति कर भरा जाए. भारत सरकार के मानकानुसार प्रदेश में नर्सिंग संवर्ग के पदों का पुनर्गठन किया जाय. विभाग के अधीन विभिन्न चिकित्सालयों एवं मुख्यालय स्तर पर नर्सिंग संवर्ग के रिक्त पदों पर नियुक्ति की जाय. पुरानी पेन्शन बहाल की जाय तथा निजीकरण समाप्त किया जाय. शासन द्वारा निर्धारित मानक के अनुरूप निधारित समयावधि में ए०त्ती०पी० व अन्य लान दिया जाए.
अन्य मांगे
पुलिस एवं शिक्षकों की भांति नर्सिंग संवर्ग को राजकीय पुरस्कृत श्रेणी में रखा जाये एवं जिन नर्सेज को महामहिम राष्ट्रपति द्वारा पुरस्कृत किया जाता है. उन्हें 2 वर्ष का सेवा विस्तार दिया जाए. शासन स्तर पर प्रमुख सचिव, चिकित्सा स्वास्थ्य एवं प०क०, उ०प्र० की अध्यक्षता में दिनांक 22.02.2019 को आहूत बैठक में लिये गये निर्णयानुसार जारी कार्यवृत्ति के बिन्दु 10 के अनुसार सभी मुख्य चिकित्सा अधिकारियों एवं चिकित्सा अधीक्षकों को पालनाघर (कैच) की व्यवस्था किये जाने हेतु निर्देश जारी किये गये थे, परन्तु अभी तक उक्त आदेश का पालन नहीं किया गया है. कृपया इस पर तत्काल समस्त परिधिगत अधिकारियों को निर्देशित किया जाय.
शासनादेश दिनांक 20.05.2010 में निहित प्राविधानानुसार नर्सिंग संवर्ग को दो वषीर्य पोस्ट बेसिक बी०एस०सी० नर्सिंग प्रशिक्षण की व्यवस्था की गयी है, इसी प्रकार एमएससी नर्सिंग प्रशिक्षण हेतु अनुमति प्रदान की जाए. संविदा एवं आउटसोर्सिंग के माध्यम से कार्यरत नर्सेज को वरिष्ठता एवं अनुभव के आधार पर रिक्त पदों के सापेक्ष नियमित / स्थायी किये जाने का प्राविधान किया जाय. चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के अधीन संचालित जिला स्तरीय चिकित्सालयों को चिकित्सा शिक्षा विभाग के अधीन चिकित्सा संस्थानों व स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालयों से सम्बद्ध कर दिया गया है, जिसमें कार्यरत नर्सेज को पद सहित कार्यमुक्त किया जाए, अथवा पूर्व से संचालित मेडिकल कॉलेजों यथा प्रयागराज, गोरखपुर, लखनऊ, कानपुर, आगरा, झांसी, मेरठ की भांति यथावत् कार्य करने हेतु पृथक से आदेश जारी किये जाए.
डिप्टी सीएम ने दिया आश्वासन
उन्होंने बताया कि 8 नवंबर 2025 को राजकीय नर्सेस संघ, उप्र के के वार्षिक अधिवेशन के मौके पर बृजेश पाठक, उप मुख्यमंत्री ने चिकित्सा, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा चिकित्सा शिक्षा विभाग उप्र द्वारा उक्त मांगपत्र के बिन्दुओं पर उल्लिखित मांगों को पूर्ण किये का आश्वासन दिया गया है, जिसके क्रम में महानिदेशक, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवायें, उप्र, लखनऊ के पत्र-दिनांक 19.11.2025 द्वारा प्रमुख सचिव, उप्र शासन, चिकित्ता अनुभाग-8 को प्रेषित किया जा चुका है, जो शासन स्तर पर प्रक्रियाधीन है.