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Saharanpur news: आज के दौर में नर गोवंश की समस्या बढ़ती जा रही है. जिनकी वजह से निराश्रित गोवंश की संख्या भी बढ़ रही है. क्योंकि नर पशुओं का उपयोग अब नहीं हो पा रहा है. इसलिए लोग नर पशुओं को सड़कों पर खुला छोड़ देते हैं जो की आमजन और विभाग के लिए एक समस्या बना हुआ है. नर पशुओं के निराकरण के संबंध में, नर पशुओं की संख्या को कैसे काम किया जाए. जैसे हम कृत्रिम गर्भधारण के द्वारा गायों से बच्चों को पैदा करते हैं और उसमें संभावना यह होती है कि 50% नर होंगे और 50% मादा होगी.
सहारनपुर: पशुपालन विभाग के द्वारा अब गोवंशो का पालन करने वाले किसानों के लिए एक नया अविष्कार लाया गया है. जो पशुपालक यह सोचते हैं कि उनके दूध देने वाली गाय मेल बच्चे को जन्म देती हैं जिसका अब इस्तेमाल धीरे-धीरे खत्म होता जा रहा है और वह चाहते हैं कि उनके पशुओं के फीमेल बच्चा हो. जिससे कि वह आगे दूध में इस्तेमाल कर सके. तो आज हम इस खबर में बताएंगे कि किस तरीके से आप अपने पशुओं से फीमेल बच्चों को ही जन्म दिलवा सकते हैं. सहारनपुर पशुपालन विभाग के द्वारा वर्गीकृत वीर्य गोवंश में कृत्रिम गर्भाधान जो (AI) की एक आधुनिक तकनीक है उसको लाया गया है.
प्रयोगशाला में छांटा जाता है वीर्य
इस तकनीक में वीर्य को प्रयोगशाला में इस प्रकार छांटा जाता है कि कृत्रिम गर्भाधान से लगभग 90% मादा (बछिया) पैदा होने की संभावना होती है. इससे नर बछड़ों (सांड) के जन्म की संख्या में भारी कमी आती है, जिससे भविष्य में निराश्रित या लावारिस घूमने वाले गोवंश की समस्या पर काफी हद तक रोक लगती है. इतना ही नहीं इससे उच्च गुणवत्ता और अच्छी नस्ल की बछिया पैदा होने से पशुपालकों के यहां दुग्ध उत्पादन और पशुधन की गुणवत्ता में सुधार होगा. तो अगर पशुपालक अपने पशुओं की नस्ल को सुधारना चाहते हैं और गायों से केवल फीमेल बच्चा ही चाहते हैं तो इस तकनीक का इस्तेमाल कर सकते हैं.
गोवंश में बढ़ेगी फीमेल बच्चों की मात्रा
मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. मदन पाल सिंग गौर ने लोकल 18 से बात करते हुए बताया कि जैसा आपको पता है आज के दौर में नर गोवंश की समस्या बढ़ती जा रही है. जिनकी वजह से निराश्रित गोवंश की संख्या भी बढ़ रही है. क्योंकि नर पशुओं का उपयोग अब नहीं हो पा रहा है. इसलिए लोग नर पशुओं को सड़कों पर खुला छोड़ देते हैं जो की आमजन और विभाग के लिए एक समस्या बना हुआ है. नर पशुओं के निराकरण के संबंध में, नर पशुओं की संख्या को कैसे काम किया जाए. जैसे हम कृत्रिम गर्भधारण के द्वारा गायों से बच्चों को पैदा करते हैं और उसमें संभावना यह होती है कि 50% नर होंगे और 50% मादा होगी.
मादा को तो पशुपालक दूध उत्पादन के लिए रख लेते हैं, जबकि नर पशुओं को छोड़ देते हैं क्योंकि अब कृषि के क्षेत्र में उनकी जरूरत ना के बराबर हो चुकी है. उसी के निदान के लिए एक नई तकनीक का ईजाद किया गया है जिसमें वर्गीकृत वीर्य के द्वारा गर्भधारण कराया जाता है. इस तकनीक के द्वारा लगभग 90% गायों में फीमेल ही पैदा होते हैं. इस तकनीक को निचले स्तर तक किस तरीके से पशुपालकों तक पहुंचाएं जिससे कि ज्यादा से ज्यादा सफलता हमें मिल सके. इस तकनीक का प्रयोग हम सहारनपुर में भी शुरू कर चुके हैं जितने भी सहारनपुर में कृत्रिम गर्भधारण केंद्र है और जितने भी हमारे पशुओं के हॉस्पिटल हैं वहां पर वर्गीकृत वीर्य अब उपलब्ध है.