कतर से डिफेंस डील करने जा रहे पाकिस्तान-तुर्की, भारत का दोस्त इंडोनेशिया भी साथ, सऊदी बाहर, हम पर क्या असर?

कतर से डिफेंस डील करने जा रहे पाकिस्तान-तुर्की, भारत का दोस्त इंडोनेशिया भी साथ, सऊदी बाहर, हम पर क्या असर?


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Pakistan-Turkiye-Qatar Indonesia: कतर की राजधानी दोहा में तुर्किये, पाकिस्तान, कतर और इंडोनेशिया के बीच रक्षा उद्योग में सहयोग के समझौते पर हस्ताक्षर होने की उम्मीद है. इस पहल में इंडोनेशिया की भागीदारी इसे खास बनाती है, जबकि सऊदी अरब इसमें शामिल नहीं है. कतर स्थानीय रक्षा उत्पादन केंद्र बनाने और मिसाइल, ड्रोन व साइबर हमलों से निपटने की क्षमता बढ़ाने की तैयारी कर रहा है.

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कतर, तुर्की, पाकिस्तान और इंडोनेशिया में नई डिफेंस डील होने वाली है.

पश्चिम एशिया में ईरान के साथ जारी जंग के बीच कतर अपनी रक्षा ताकत बढ़ाने की तैयारी कर रहा है. इसी कड़ी में तुर्किये, पाकिस्तान, कतर और इंडोनेशिया के बीच रक्षा उद्योग में सहयोग को लेकर एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर होने की उम्मीद है. TRT वर्ल्ड की रिपोर्ट के मुताबिक तुर्किये के रक्षा मंत्री यासर गुलेर मंगलवार को कतर पहुंचेंगे और बुधवार को चारों देशों के बीच समझौते पर हस्ताक्षर होने की संभावना है. इस पहल की खास बात यह है कि इसमें इंडोनेशिया भी शामिल है. वहीं मक्का पैक्ट का हिस्सा सऊदी अरब इसमें शामिल नहीं है. हालांकि यह समझना चाहिए कि यह एक दूसरे की रक्षा करने वाला समझौता नहीं, बल्कि डिफेंस डील है. भारत के लिए यह घटनाक्रम इसलिए अहम है, क्योंकि तुर्किये पहले से पाकिस्तान की मदद कर रहे हैं.

मक्का पैक्ट से कैसे अलग है ये समझौता?

इस डील को समझने के लिए मक्का पैक्ट और कतर में होने वाले समझौते के अंतर को जानना जरूरी है. मक्का पैक्ट में सऊदी अरब, तुर्किये और पाकिस्तान शामिल हैं. यह सामूहिक रक्षा से जुड़ा समझौता है, जिसमें किसी एक सदस्य पर हमला होने की स्थिति में दूसरे देश युद्ध में उतर सकते हैं. इसके उलट, कतर में होने वाली नई डील का घोषित मकसद रक्षा उद्योग में सहयोग बढ़ाना है. इसमें जॉइंट प्रोडक्शन, टेक्नोलॉजी शेयरिंग या रक्षा कंपनियों में निवेश जैसे विकल्प हो सकते हैं, लेकिन समझौते की पूरी डिटेल अभी सामने नहीं आई हैं. यहां एक अहम बदलाव जरूर दिखता है. तुर्किये और पाकिस्तान के साथ अब कतर और इंडोनेशिया भी रक्षा सहयोग के एक नए मंच पर साथ आ रहे हैं. इससे एशिया और खाड़ी क्षेत्र के बीच रक्षा उद्योग के रिश्ते बढ़ते दिख रहे हैं.

कतर को अपनी रक्षा ताकत क्यों बढ़ानी है?

कतर के रक्षा मामलों के राज्य मंत्री शेख सऊद बिन अब्दुलरहमान अल थानी ने सोमवार को दोहा में ग्लोबल सिक्योरिटी फोरम में कहा कि देश जल्द ही स्थानीय डिफेंस प्रोडक्शन केंद्र स्थापित करने की योजना घोषित करेगा. कतर अमेरिका, ब्रिटेन और फ्रांस समेत कई साझेदारों के साथ अपनी रक्षा क्षमता बढ़ाने और रक्षा कंपनियों में निवेश के अवसर तलाश रहा है.

उन्होंने यह भी बताया कि कतर बैलिस्टिक मिसाइलों, ड्रोन और साइबर हमलों से निपटने की क्षमता मजबूत करने के लिए एक नई साझेदारी की घोषणा करेगा. हालांकि, इसमें कौन-से देश या कंपनियां शामिल होंगी, इसकी जानकारी नहीं दी गई. ईरान के साथ अमेरिका-इजरायल की जंग ने कतर की सुरक्षा और अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ाया है. संघर्ष शुरू होने के बाद कतर ने अपने प्रमुख LNG परिसर रास लफान की बड़ी गतिविधियां बंद कर दी थीं. होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने से वैश्विक व्यापार पर भी असर पड़ा है. कतर के लिए रक्षा उत्पादन बढ़ाने का मतलब सिर्फ हथियार खरीदना नहीं, बल्कि अपनी जरूरतों के मुताबिक तकनीक और उत्पादन क्षमता विकसित करना भी है.

भारत के लिए क्यों अहम है पाकिस्तान की मौजूदगी?

तुर्किये और पाकिस्तान के बीच पहले से रक्षा सहयोग है. तुर्किये ड्रोन और दूसरे सैन्य उपकरण बनाता है और पाकिस्तान को देता रहा है. अगर नई डील के तहत संयुक्त उत्पादन या तकनीक साझा करने की व्यवस्था बनती है, तो दोनों देशों को रक्षा क्षेत्र में नए अवसर मिल सकते हैं. भारत के लिए यह घटनाक्रम रणनीतिक रूप से नजर रखने लायक है. पाकिस्तान को नए रक्षा साझेदारों और तकनीकी सहयोग तक पहुंच मिलती है, तो इसका भविष्य में क्षेत्रीय सुरक्षा पर असर पड़ सकता है. वहीं दूसरी तरफ भारत के लिए कतर की ऊर्जा सुरक्षा भी अहम है. कतर भारतीय जरूरतों के लिए LNG का एक महत्वपूर्ण स्रोत है. वहां लंबे समय तक संघर्ष या समुद्री मार्गों में बाधा रहने से ऊर्जा आपूर्ति और कीमतें प्रभावित हो सकती हैं.



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