आज कहानी बिहार के बेगूसराय के सबसे पुराने दिव्य धाम की . जिसका नाता आज के दरभंगा जिले और पूर्व के दरभंगा राज से जुड़ा है. दावा है 350 से भी ज्यादा वर्षों से यहां लोग संतान प्राप्ति की मन्नत मांगते आएं हैं और आज तक सालोंभर मन्नत पूरी होते आया हो . दावा सुनकर आपके भी मन में ख्याल आएगा एक बार दिव्य धाम का दर्शन तो जरूर करना चाहिए.
ऐसे में चलिए लोकल 18 पर आज आपको कहानी दिखा रहे हैं. बिहार के बेगूसराय जिले के चेरिया बरियारपुर से ; यहां एक ऐसा मंदिर है, जिसके इतिहास से जुड़ी कहानी जितनी पुरानी है, उतनी ही रहस्यमयी भी. करीब 350 साल पहले यहां मां की प्रतिमा एक गुफानुमा संरचना में विराजमान थी. स्थानीय लोगों के मुताबिक उस दौर में यह इलाका दरभंगा राज के अधीन था. आज यही स्थान संतान प्राप्ति, मुंडन और मनोकामना पूरी होने की आस्था के लिए जाना जाता है.
गुफा में मां के विराजमान होने का दावा
स्थानीय ग्रामीण मुकेश कुमार सिन्हा बताते हैं कि यह उनके पूर्वजों का शिवाला था. उनके अनुसार नदी किनारे बने पुराने शिवालय के नीचे गुफा थी, जिसमें करीब चार कमरे होने की बात कही जाती है. इसी गुप्त हिस्से में मां की प्रतिमा विराजमान होने का दावा किया जाता है. ग्रामीणों का कहना है कि बाद में कठिनाइयों को देखते हुए पूजा-अर्चना के लिए प्रतिमा को वहां से वर्तमान मंदिर परिसर में लाया गया.हालांकि इस सुरंग और गुफा के अस्तित्व को लेकर कोई स्पष्ट ऐतिहासिक प्रमाण सामने नहीं है. स्थानीय लोगों की पीढ़ियों से चली आ रही मान्यताएं ही इस कहानी का आधार हैं.
पुरातत्व विभाग की चर्चा भी सामने आती
लोकल 18 पर मिली स्थानीय लोगों से जानकारी के मुताबिक इस स्थान पर पुरातत्व विभाग की ओर से खुदाई की इच्छा जताए जाने की बात भी सामने आई थी, लेकिन स्थानीय लोगों ने इसकी अनुमति नहीं दी. यही वजह है कि मंदिर के नीचे सुरंग और गुप्त कमरों की कहानी आज भी रहस्य बनी हुई है.
संतान प्राप्ति की मनोकामना से जुड़ी आस्था
चेरिया बरियारपुर पंचायत के मुखिया रविनेश कुमार राही ने लोकल 18 पर बताया कि मंदिर करीब 300 से 350 साल पुराना माना जाता है. उनके अनुसार, पूर्वजों से चली आ रही मान्यता है कि यहां श्रद्धालुओं की मनोकामना पूरी होती है. खासकर संतान प्राप्ति और मुंडन संस्कार के लिए लोग सालभर यहां पहुंचते हैं.मंदिर के पुजारी बैजनाथ झा भी बताते हैं कि यह मंदिर उनके जन्म से पहले से ही मौजूद है और लंबे समय से संतान प्राप्ति की मनोकामना से जुड़ा रहा है.
कुछ तो है ?
लोकल 18 पर स्थानीय लोगों के दावे और जो हमने तस्वीरें ग्राउंड जीरो से दिखाया इसके मुताबिक इतिहास के दस्तावेज इस कहानी की हर कड़ी की पुष्टि करते हैं या नहीं, यह अलग सवाल है. लेकिन करीब साढ़े तीन सदियों से चली आ रही आस्था आज भी इस मंदिर को खास बनाती है. गुफा थी या सिर्फ लोककथा, इसके पीछे कितना इतिहास है और कितना फसाना, यह रहस्य अब भी बरकरार है. यही इस दिव्य धाम को चेरिया बरियारपुर की सबसे दिलचस्प आस्था स्थलों में से एक बनाता है.