नीले ड्रम और सांप से कटवाने वाली महिलाओं के जलेंगे पुतले, इंदौर में दशहरे पर होगा शूर्पणखा का दहन

नीले ड्रम और सांप से कटवाने वाली महिलाओं के जलेंगे पुतले, इंदौर में दशहरे पर होगा शूर्पणखा का दहन


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दशहरे के अवसर पर रावण के पुतले का दहन करना बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना जाता है. इंदौर में इस बार दशहरे पर रावण नहीं, बल्कि शूर्पणखा का दहन किया जाएगा. इसमें नीले ड्रम सहित सांप से कटवाने वाली आरोपी महिला के पुतले बनाए गए हैं. संस्था का कहना है कि पतियों की हत्या सहित महिलाओं से जुड़े अपराध समाज के लिए चिंता का विषय हैं.

मिथिलेश गुप्ता/इंदौर. दशहरे पर रावण दहन की परंपरा निभाई जाती है. लेकिन इंदौर के महालक्ष्मी नगर में इस दशहरे पर रावण नहीं, बल्कि शूर्पणखा का दहन किया जाएगा. जी हां, संस्था ‘पौरुष’ ने इस बार रावण दहन के साथ शूर्पणखा दहन का आयोजन भी किया है. देश की पांच चर्चित महिला अपराधियों को शूर्पणखा के प्रतीक से जोड़कर दहन किया जाएगा. इसमें मेरठ की मुस्कान का नाम भी है जिसने अपनी पति को मारकर नीले ड्रम में छिपा दिया था.

संस्था का कहना है कि महिलाओं से जुड़े अपराधों के साथ पतियों की हत्या जैसी घटनाएं समाज के लिए चिंता का विषय हैं. मेरठ के चर्चित हत्या मामलों का जिक्र करते हुए संस्था ने अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है. 20 अक्टूबर को महालक्ष्मी नगर मेला ग्राउंड में होने वाले इस आयोजन के जरिए समाज में बढ़ती आपराधिक प्रवृत्तियों के खिलाफ संदेश देने की तैयारी है.

दोषियों को सख्त सजा देने की मांग
इंदौर में दशहरे पर इस बार रावण के साथ शूर्पणखा का भी दहन होगा. महालक्ष्मी नगर स्थित मेला ग्राउंड में संस्था पौरुष की ओर से यह आयोजन किया जा रहा है. ये कार्यक्रम दोपहर 2 बजे से 4 बजे कर होगा. संस्था के अध्यक्ष एडवोकेट अशोक दशोरा का कहना है कि समाज में महिलाओं से जुड़े अपराध और पतियों की हत्या जैसी घटनाएं गंभीर चिंता का विषय है. ऐसे अपराधों के खिलाफ समाज को एकजुट होकर आवाज उठानी चाहिए. इस आयोजन का कुछ महिलाएं भी समर्थन कर रही हैं.

संस्था ने मेरठ के चर्चित हत्या मामलों का जिक्र करते हुए दोषियों को सख्त सजा देने की मांग की है. संस्था का कहना है कि रावण और शूर्पणखा दहन के जरिए समाज को अपराध और सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ खड़े होने का संदेश दिया जाएगा. रावण दहन को बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना जाता है. इसी के बीच शूर्पणखा दहन अपने अलग स्वरूप के कारण चर्चा में है.



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