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china mBridge System : चीन ने अमेरिकी डॉलर को चैलेंज देने और कारोबार में उस पर निर्भरता घटाने के लिए नया पेमेंट सिस्टम mBridge बनाया था. पहले तो इस सिस्टम में खाड़ी देश सऊदी अरब भी शामिल था, लेकिन अब सऊदी ने अचानक इस पेमेंट सिस्टम से अलग होने का फैसला किया है.
चीन ने डॉलर को चुनौती देने के लिए mBridge भुगतान सिस्टम बनाया है.
नई दिल्ली. चीन के राष्ट्रपति शी जिनिपंग की अमेरिका यात्रा से ठीक पहले सऊदी अरब ने बड़ा झटका दिया है. चीन ने डॉलर को मात देने के लिए खुद का पेमेंट सिस्टम बनाया था, जिसमें सऊदी अरब भी शामिल था. लेकिन, अब सऊदी अरब ने इस सिस्टम से खुद को अलग करने का फैसला किया है. सऊदी अरब ने इस फैसले से साफ संकेत दे दिया है कि अमेरिका और चीन में से वह किसके साथ जाएगा. हालांकि, अभी इस पेमेंट सिस्टम में 4 और देश बचे हुए हैं. चीन ने अमेरिकी डॉलर पर अपनी निर्भरता कम करने के लिए mBridge नाम से पेमेंट सिस्टम बनाया था.
दरअसल, चीन ने डॉलर पर अपनी निर्भरता कम करने के लिए ब्लॉकचेन आधारित पेमेंट सिस्टम बनाया था जो SWIFT जैसे अंतरराष्ट्रीय पेमेंट सिस्टम का ऑप्शन था. इसमें चीन के साथ हांगकांग, यूएई, थाईलैंड और सऊदी अरब भी थे. लेकिन, अब सऊदी अरब ने इस पेमेंट सिस्टम से अपना नाम वापस ले लिया है. चीन का mBridge एक क्रॉस बॉर्डर पेमेंट सिस्टम है, जो केंद्रीय बैंकों के बीच डिजिटल करेंसी के जरिये सस्ता और तेज भुगतान व्यवस्था बनाता है. हालांकि, सऊदी अरब को छोड़कर अन्य सभी देश अब भी समूह में शामिल हैं और प्रोजेक्ट चल रहा है.
पहले से तय था सऊदी का निकलना
सऊदी अरब का कहना है कि उसका mBridge पेमेंट सिस्टम से बाहर निकलना पहले से ही तय था. उसने साल 2023 में इस पेमेंट सिस्टम में बतौर ऑब्जर्वर प्रवेश किया था. साथ ही 13 मई, 2025 को उसका प्रूफ ऑफ कॉन्सेप्ट भी पूरा हो चुका है और अब वह इस समूह का भागीदार सदस्य नहीं रहा है. यह सबकुछ तय योजना के तहत हुआ है. हालांकि, मामले के जानकारों का कहना है कि सऊदी ने यह कदम अमेरिका के दबाव में आकर उठाया है.
कैसे काम करता है यह पेमेंट सिस्टम
चीन के इस mBridge पेमेंट सिस्टम का मकसद केंद्रीय बैंकों की डिजिटल करेंसी के जरिये सीमा पार भुगतान को आसान बनाना है. इस सिस्टम का मकसद डॉलर पर निर्भरता घटाकर कम खर्चीला साधन बनाना है. अभी ज्यादातर देश एक-दूसरे से कारोबार करने और भुगतान के लिए SWIFT पेमेंट सिस्टम का इस्तेमाल करते हैं. भारत भी ऐसे ही पेमेंट सिस्टम के जरिये अपना कारोबार करता है.