MP Board Exam 2027: 9वीं से 12वीं तक के पेपर में बड़ा बदलाव, अब 2 नंबर के सवालों में नहीं मिलेगा विकल्प

MP Board Exam 2027: 9वीं से 12वीं तक के पेपर में बड़ा बदलाव, अब 2 नंबर के सवालों में नहीं मिलेगा विकल्प


MP Board Exam 2027 New Rules: मध्य प्रदेश बोर्ड से 9वीं, 10वीं, 11वीं और 12वीं की पढ़ाई कर रहे विद्यार्थियों के लिए बड़ी खबर है. साल 2027 की परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों को अब प्रश्नपत्र हल करने का अपना तरीका बदलना पड़ सकता है. मध्य प्रदेश माध्यमिक शिक्षा मंडल (MPBSE) ने प्रश्नपत्रों में मिलने वाले आंतरिक विकल्प यानी इंटरनल चॉइस के नियमों में बदलाव किया है. नए नियम के मुताबिक मुख्य विषयों के दो अंक वाले अति लघु उत्तरीय सवालों में अब दूसरा विकल्प नहीं मिलेगा हालांकि तीन और चार अंक वाले सवालों में पहले की तरह विकल्प मिलते रहेंगे. वहीं स्किल आधारित विषयों की पढ़ाई करने वाले विद्यार्थियों के लिए बोर्ड ने नए विकल्प देने का फैसला किया है. ये बदलाव शैक्षणिक सत्र 2026-27 की परीक्षाओं से लागू होंगे. आइए जानते हैं कि नए नियमों से छात्रों पर क्या असर पड़ेगा और किन सवालों में विकल्प मिलेंगे.

9वीं से 12वीं तक के प्रश्नपत्रों में क्या बदला?

मध्य प्रदेश माध्यमिक शिक्षा मंडल ने कक्षा 9वीं से 12वीं तक के प्रश्नपत्रों में आंतरिक विकल्प देने की व्यवस्था में बदलाव किया है. बोर्ड ने इस संबंध में 15 अक्टूबर 2026 को नोटिस जारी किया था.शैक्षणिक सत्र 2026-27 से होने वाली परीक्षाओं में विद्यार्थियों को मिलने वाले विकल्प सवालों के अंकों और विषय की श्रेणी के आधार पर तय होंगे.अब हर तरह के सवाल में पहले जैसी विकल्प व्यवस्था लागू नहीं होगी. कुछ सवालों से विकल्प हटाए गए हैं जबकि कुछ विषयों में नए विकल्प जोड़े गए हैं.यह बदलाव मुख्य रूप से प्रश्नपत्र के स्वरूप और सवालों के जवाब देने के विकल्पों से जुड़ा है.

दो अंक वाले सवालों में अब नहीं मिलेगा विकल्प

नए नियम का सबसे बड़ा असर मुख्य विषयों के दो अंक वाले अति लघु उत्तरीय सवालों पर पड़ेगा.अब तक इन सवालों में विद्यार्थियों को आंतरिक विकल्प दिया जाता था यानी एक सवाल के बदले दूसरा सवाल हल करने का मौका मिलता था लेकिन शैक्षणिक सत्र 2026-27 की परीक्षाओं से यह सुविधा खत्म कर दी गई है.इसका मतलब है कि मुख्य विषयों के दो अंक वाले अति लघु उत्तरीय प्रश्नों में छात्रों को आंतरिक विकल्प नहीं मिलेगा.इस बदलाव के बाद विद्यार्थियों को इन सवालों की तैयारी पर विशेष ध्यान देना होगा क्योंकि उनके पास उसी प्रश्न के स्थान पर दूसरा सवाल चुनने की सुविधा नहीं होगी.

तीन अंक वाले सवालों में जारी रहेगा पुराना नियम

बोर्ड ने सभी तरह के सवालों से आंतरिक विकल्प नहीं हटाए हैं.मुख्य विषयों के तीन अंक वाले लघु उत्तरीय प्रश्नों में पहले की तरह विकल्प मिलते रहेंगे.इस व्यवस्था में कोई बदलाव नहीं किया गया है. इसका मतलब है कि अगर प्रश्नपत्र में तीन अंक वाले किसी सवाल के साथ आंतरिक विकल्प दिया गया है तो स्‍टूडेंट निर्धारित नियम के अनुसार दोनों में से एक सवाल हल कर सकेंगे इसलिए छात्रों को यह नहीं समझना चाहिए कि बोर्ड ने पूरे प्रश्नपत्र से इंटरनल चॉइस खत्म कर दी है.

चार अंक वाले लंबे सवालों में भी मिलेगा विकल्प

मुख्य विषयों के चार अंक वाले दीर्घ उत्तरीय प्रश्नों में भी पुरानी व्यवस्था जारी रहेगी.बोर्ड ने इस श्रेणी के सवालों में आंतरिक विकल्प की सुविधा बरकरार रखी है यानी विद्यार्थियों को चार अंक वाले लंबे सवालों में पहले की तरह विकल्प मिलते रहेंगे.इस तरह मुख्य विषयों के प्रश्नपत्रों में सबसे महत्वपूर्ण बदलाव दो अंक वाले अति लघु उत्तरीय सवालों को लेकर किया गया है.तीन और चार अंक वाले प्रश्नों के नियम पहले जैसे ही रहेंगे.

स्किल वाले विषयों में छात्रों को मिली नई सुविधा

मध्य प्रदेश बोर्ड ने नेशनल स्किल्स क्वालिफिकेशन फ्रेमवर्क यानी NSQF के अंतर्गत आने वाले विषयों के लिए भी नए नियम बनाए हैं.ये विषय कौशल आधारित शिक्षा से जुड़े होते हैं.नए नियमों के मुताबिक NSQF विषयों के पांच अंक वाले दीर्घ उत्तरीय सवालों में अब आंतरिक विकल्प दिया जाएगा.इसके अलावा सात अंक वाले निबंधात्मक प्रश्नों में भी विद्यार्थियों को विकल्प मिलेगा.बोर्ड के नोटिस में बताई गई पिछली व्यवस्था में इन दोनों श्रेणियों के सवालों के लिए आंतरिक विकल्प का प्रावधान नहीं था.अब नई व्यवस्था लागू होने से स्किल आधारित विषयों की पढ़ाई करने वाले विद्यार्थियों को पांच और सात अंक वाले सवालों में विकल्प चुनने का अवसर मिलेगा.

पहले और अब के नियमों में कितना अंतर?

मध्य प्रदेश बोर्ड के नए नियमों को आसान भाषा में समझें तो मुख्य विषयों और NSQF विषयों के लिए अलग-अलग बदलाव किए गए हैं.मुख्य विषयों में दो अंक वाले अति लघु उत्तरीय सवालों से आंतरिक विकल्प हटा दिया गया है. पहले इन सवालों में विकल्प मिलता था.वहीं तीन अंक वाले लघु उत्तरीय सवालों में कोई बदलाव नहीं हुआ है.इनमें पहले भी विकल्प मिलता था और आगे भी मिलेगा.इसी तरह चार अंक वाले दीर्घ उत्तरीय प्रश्नों में भी पहले वाली व्यवस्था लागू रहेगी.दूसरी ओर NSQF विषयों के पांच अंक वाले दीर्घ उत्तरीय सवालों में पहली बार नई व्यवस्था के तहत विकल्प जोड़ा गया है.सात अंक वाले निबंधात्मक सवालों में भी अब आंतरिक विकल्प मिलेगा.
इसका सीधा मतलब है कि छात्रों को सवाल के अंक और विषय के आधार पर यह समझना होगा कि कहां विकल्प मिलेगा और कहां नहीं.

इंटरनल चॉइस क्या होती है?

आंतरिक विकल्प या इंटरनल चॉइस का मतलब है कि प्रश्नपत्र में किसी सवाल के साथ उसी के स्थान पर हल करने के लिए दूसरा सवाल दिया जाए.उदाहरण के लिए अगर किसी प्रश्न में दो विकल्प दिए गए हैं तो विद्यार्थी निर्देशों के अनुसार उनमें से एक का जवाब लिख सकता है.इस व्यवस्था से छात्रों को उस सवाल का चयन करने की सुविधा मिलती है जिसकी तैयारी उन्होंने बेहतर तरीके से की है हालांकि आंतरिक विकल्प मिलने का मतलब यह नहीं है कि विद्यार्थी अपनी मर्जी से प्रश्नपत्र के किसी भी सवाल को छोड़कर दूसरा सवाल हल कर सकते हैं.विकल्प केवल उन्हीं सवालों में मिलेगा जहां बोर्ड की ओर से इसकी व्यवस्था की गई है.

2027 की परीक्षा की तैयारी पर क्या असर पड़ेगा?

बोर्ड के इस फैसले का असर विद्यार्थियों की परीक्षा की तैयारी पर भी पड़ सकता है.खासकर मुख्य विषयों के दो अंक वाले सवालों की तैयारी अब अधिक सावधानी से करनी होगी.पहले इन सवालों में आंतरिक विकल्प मिलने के कारण विद्यार्थियों के पास एक सवाल के बदले दूसरा सवाल हल करने का मौका होता था.अब यह सुविधा नहीं रहेगी.ऐसे में छात्रों के लिए जरूरी होगा कि वे छोटे सवालों और उनके जवाबों की अच्छी तरह तैयारी करें. वहीं तीन और चार अंक वाले सवालों में विकल्प मिलने से विद्यार्थियों को पहले जैसी सुविधा मिलती रहेगी.NSQF विषयों के छात्रों को पांच और सात अंक वाले प्रश्नों में नया विकल्प मिलने का लाभ होगा.

क्या एमपी बोर्ड ने परीक्षा की तारीखें भी बदली हैं?

बोर्ड के 15 अक्टूबर 2026 के नोटिस में परीक्षा की तारीखों में बदलाव की घोषणा नहीं की गई है.यह नोटिस केवल प्रश्नपत्रों में आंतरिक विकल्प देने की व्यवस्था से संबंधित है.इसमें यह बताया गया है कि किन सवालों में विकल्प मिलेगा और किन सवालों में नहीं मिलेगा इसलिए विद्यार्थियों को नए नियमों को परीक्षा कार्यक्रम में बदलाव से जोड़कर नहीं देखना चाहिए.परीक्षा की तारीखों और समय-सारिणी से जुड़ी जानकारी बोर्ड की अलग आधिकारिक सूचना के आधार पर ही देखनी चाहिए.

 छात्रों के लिए पहले से लागू है दो परीक्षा देने की व्यवस्था

प्रश्नपत्रों के नियमों में बदलाव के अलावा मध्य प्रदेश बोर्ड ने 10वीं और 12वीं के विद्यार्थियों के लिए पहले ही एक महत्वपूर्ण व्यवस्था शुरू की थी.बोर्ड ने शैक्षणिक सत्र 2025-26 से दूसरी परीक्षा देने की सुविधा लागू की थी.
इसका उद्देश्य विद्यार्थियों को अपना परिणाम सुधारने का एक और अवसर देना है.पहले छात्रों को कुछ परिस्थितियों में अगली वार्षिक परीक्षा तक इंतजार करना पड़ता था लेकिन नई व्यवस्था के तहत पात्र विद्यार्थियों को दूसरी परीक्षा में शामिल होने का अवसर दिया गया.

फेल या अनुपस्थित छात्र भी दे सकते हैं दूसरी परीक्षा

बोर्ड की ओर से पहले जारी परीक्षा नियमों के मुताबिक अगर कोई विद्यार्थी पहली परीक्षा में एक या अधिक विषयों में फेल हो जाता है, तो वह दूसरी परीक्षा में शामिल हो सकता है.इसी तरह पहली परीक्षा में किसी विषय में अनुपस्थित रहने वाले विद्यार्थियों को भी दूसरी परीक्षा देने का अवसर मिलता है.इस व्यवस्था का उद्देश्य विद्यार्थियों को उसी परीक्षा चक्र में दोबारा मौका देना है.इससे उन्हें अपने परिणाम में सुधार करने की संभावना मिलती है.

पास होने वाले छात्र भी बढ़ा सकते हैं अपने नंबर

दूसरी परीक्षा की सुविधा केवल फेल या अनुपस्थित विद्यार्थियों तक सीमित नहीं है.जो छात्र पहली परीक्षा में पास हो चुके हैं वे भी अपने अंक सुधारने के लिए दूसरी परीक्षा में शामिल हो सकते हैं.इसके लिए विद्यार्थियों को उस स्कूल या संस्थान के माध्यम से आवेदन करना होता है जहां उन्होंने पहली परीक्षा के लिए रजिस्ट्रेशन कराया था.दूसरी परीक्षा में शामिल होने के लिए बोर्ड की ओर से निर्धारित शुल्क भी जमा करना होता है यानी अगर किसी छात्र को लगता है कि वह किसी विषय में बेहतर अंक हासिल कर सकता है तो वह नियमों के अनुसार दूसरी परीक्षा दे सकता है.



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