India Economy: भारत की GDP पर क्या पड़ेगी रुपये की मार, IMF ने बताया 5 ट्रिलियन डॉलर का लक्ष्य कब होगा पूरा

India Economy: भारत की GDP पर क्या पड़ेगी रुपये की मार, IMF ने बताया 5 ट्रिलियन डॉलर का लक्ष्य कब होगा पूरा


भारत की अर्थव्यवस्था तेजी से आगे बढ़ रही है, लेकिन रुपये की गिरती कीमत की वजह से डॉलर में देश की आर्थिक ताकत उम्मीद से कम दिख रही है. इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड (IMF) के अक्टूबर 2026 के अनुमान में बताया था कि भारत 2027 में जापान और ब्रिटेन को पीछे छोड़कर दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन सकता है. हालांकि, 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने का टरागेट अब 2028 के बजाय 2029 में पूरा होने का अनुमान है. इसका मतलब यह नहीं है कि देश में आर्थिक गतिविधियां कमजोर हो रही हैं, बल्कि रुपये और डॉलर एक्सचेंज रेट भी इस लक्ष्य को तय करने में बड़ी भूमिका निभा रही है.

IMF ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए भारत की वास्तविक आर्थिक विकास दर (Real GDP Growth) का अनुमान 6.4% से बढ़ाकर 7% कर दिया है. वहीं, डॉलर में कैलकुलेट की जाने वाली GDP के 2028 के अनुमान को घटाकर 4.996 ट्रिलियन डॉलर कर दिया गया है. रुपये में अर्थव्यवस्था बढ़ने के बावजूद डॉलर में इसका मूल्य कम रहने की वजह रुपये की कमजोर एक्सचेंज रेट है. ऐसे में भारत की आर्थिक प्रगति को समझने के लिए विकास दर के साथ-साथ करेंसी की चाल पर भी नजर रखना जरूरी है.

कब पूरा होगा 5 ट्रिलियन डॉलर का टारगेट

IMF के ताजा अनुमान के मुताबिक, भारत की GDP 2028 में 4.996 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच सकती है. अप्रैल 2026 के अनुमान में इसे 5.1 ट्रिलियन डॉलर बताया गया था. यानी नए अनुमान में करीब 104 अरब डॉलर की कमी आई है. 2029 में भारत की अर्थव्यवस्था बढ़कर 5.54 ट्रिलियन डॉलर होने का अनुमान है.

GDP का डॉलर में वैल्यू केवल देश में होने वाले प्रोडक्शन पर निर्भर नहीं करता है. रुपये और डॉलर के बीच एक्सचेंज रेट भी इसमें अहम रोल निभाती है. अगर रुपया कमजोर होता है, तो उतनी ही रुपये वाली GDP को डॉलर में बदलने पर उसका वैल्यू कम हो जाता है. यही वजह है कि भारत की घरेलू अर्थव्यवस्था के आंकड़े बेहतर होने के बावजूद 5 ट्रिलियन डॉलर का लक्ष्य आगे बढ़ गई है.

रुपये में GDP बढ़ेगी, फिर भी डॉलर में कम क्यों दिखेगी?

IMF के अनुसार, 2028 में भारत की नॉमिनल GDP करीब 477.1 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान है. यह अप्रैल में लगाए गए 471.9 लाख करोड़ रुपये के अनुमान से ज्यादा है. लेकिन रुपये की विनिमय दर को लेकर IMF की धारणा बदल गई है. अब 2028 में एक डॉलर की औसत कीमत 95.5 रुपये मानी गई है, जबकि अप्रैल में यह अनुमान 93.3 रुपये था.

दोनों अनुमानों के असर को एक आसान उदाहरण से समझ सकते हैं. मान लीजिए, किसी व्यक्ति की कमाई रुपये में बढ़ रही है, लेकिन डॉलर के मुकाबले रुपया कमजोर हो रहा है. ऐसे में उसकी कमाई को डॉलर में बदलने पर बढ़ोतरी कम दिखाई दे सकती है. देश की GDP के मामले में भी कुछ ऐसा ही हो रहा है. मनीकंट्रोल की रिपोर्ट के अनुसार, अगर पुरानी विनिमय दर लागू होती, तो 2028 की अनुमानित GDP करीब 5.11 ट्रिलियन डॉलर होती. नई दर पर यह लगभग 4.996 ट्रिलियन डॉलर रह जाती है.

2027 में जापान और ब्रिटेन से आगे निकलने का अनुमान

5 ट्रिलियन डॉलर का लक्ष्य भले ही देर से पूरा हो, लेकिन ग्लोबल अर्थव्यवस्थाओं की रैंकिंग में भारत की स्थिति मजबूत होने की उम्मीद है. IMF के अक्टूबर 2026 के अनुमानों के मुताबिक, भारत की GDP 2027 में 4.52 ट्रिलियन डॉलर हो सकती है. इसी अवधि में ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था 4.49 ट्रिलियन डॉलर और जापान की 4.47 ट्रिलियन डॉलर रहने का अनुमान है.

इस हिसाब से भारत अमेरिका, चीन और जर्मनी के बाद चौथे स्थान पर पहुंच सकता है. हालांकि, इन तीनों अर्थव्यवस्थाओं के बीच अंतर बहुत कम है. एक्सचेंज रेट में बदलाव से रैंकिंग पर असर पड़ सकता है.

IMF ने भारत की ग्रोथ रेट का अनुमान क्यों बढ़ाया?

भारत के लिए एक पॉजिटिव संकेत यह है कि IMF ने वित्त वर्ष 2026-27 की वास्तविक GDP विकास दर का अनुमान 6.4% से बढ़ाकर 7% कर दिया है. इसकी सबसे बड़ी वजह घरेलू मांग में मजबूती और आर्थिक गतिविधियों की बेहतर रफ्तार है. IMF ने 2027-28 के लिए भी विकास दर 7% रहने का अनुमान दिया है.

वास्तविक विकास दर बताती है कि महंगाई के असर को हटाने के बाद अर्थव्यवस्था में प्रोडक्शन कितना बढ़ा. वहीं, नॉमिनल GDP में कीमतों में बदलाव का असर भी शामिल होता है. डॉलर में GDP निकालते समय इसके साथ रुपये की विनिमय दर भी जुड़ जाती है. इसलिए इन तीनों आंकड़ों को एक ही चीज नहीं समझना चाहिए.

2030 तक 6 ट्रिलियन डॉलर के पार पहुंचने की उम्मीद

IMF के अनुमानों के मुताबिक, भारत की GDP 2030 में 6.13 ट्रिलियन डॉलर और 2031 में 6.74 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच सकती है. 2031 में भारत के जर्मनी से आगे निकलकर दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने का भी अनुमान है.

हालांकि, ये भविष्य के अनुमान हैं, गारंटी नहीं. आर्थिक विकास, रुपये की कीमत और ग्लोबल परिस्थितियों में बदलाव से ये आंकड़े बदल सकते हैं. आम लोगों के लिए अर्थव्यवस्था की प्रगति का एनालिसिस करते समय केवल डॉलर में GDP या ग्लोबल रैंकिंग देखना काफी नहीं है. रोजगार, आय, महंगाई और लोगों की खरीदने की कैपेसिटी भी उतनी ही अहम हैं.



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