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नवरात्रि के महाष्टमी और महानवमी के दिन विशेष पूजन किया जाता है, जिसमें तंत्र के साथ ही मंत्रों की सिद्धि को लेकर भी पूजा व अर्चना की जाती है. ऐसी मान्यता है कि इस दिन महानिशा की पूजा होती है, जो पूरे नवरात्रि में बेहद खास है. मां विंध्यवासिनी, भैरव कुंड राम गया घाट, अष्टभुजा पहाड़ सहित अन्य स्थानों पर बैठकर भक्त पूजन व अर्चन करते हैं. महानिशा पूजन को देखते हुए प्रशासन की ओर से भी इंतजार किए गए हैं.
मिर्जापुरः उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर जिले में स्थित मां विंध्यवासिनी का धाम अतिदिव्य है. यहां पर नवरात्रि में विशेष पूजन होता है. नवरात्रि के महाष्टमी और महानवमी के दिन विशेष पूजन किया जाता है, जिसमें तंत्र के साथ ही मंत्रों की सिद्धि को लेकर भी पूजा व अर्चना की जाती है. ऐसी मान्यता है कि इस दिन महानिशा की पूजा होती है, जो पूरे नवरात्रि में बेहद खास है. मां विंध्यवासिनी, भैरव कुंड राम गया घाट, अष्टभुजा पहाड़ सहित अन्य स्थानों पर बैठकर भक्त पूजन व अर्चन करते हैं. महानिशा पूजन को देखते हुए प्रशासन की ओर से भी इंतजार किए गए हैं. ताकि, साधकों और उपासकों को किसी भी प्रकार की समस्याओं का सामना करना पड़े. सूर्यास्त के बाद अष्टमी और नवमी के दिन विशेष पूजन किया जाता है.
बहुत शक्तिशाली होती है ये रात
आचार्य पं. अनुपम महाराज ने लोकल 18 से बताया कि महाष्टमी और महानवमी रात्रि बेहद खास है. महाअष्टमी की रात्रि अष्टम्यां चतुर्दस्यां. निशा रात्रि का जब महत्व आता है तो सप्तमी और अष्टमी के वो मिली हुई रात बहुत ही शक्तिमय होती है, जो आज की रात है. इस रात में साधक अपनी कामनाओं की सिद्धि और मंत्रों की जाप की करके और उसको सिद्ध करते हैं. आज की रात्रि में आहुति एवं बलि का बड़ा विधान है, जिसमें नींबू का, जायफल का बलि दिया जाता है. इस दिन मां तारा मंदिर के पास भी साधक और उपासक विशेष पूजा करते हैं. अस्मशान के पास बैठकर सिद्धि के लिए तप करते हैं.
तंत्र सिद्धि होती है पूरी
पं. अनुपम महाराज ने बताया कि महानवमी की रात्रि भी विशेष होती है. आज की रात्रि बेहद खास उन सभी लोगों के लिए है, जो लोग साधना करते हैं. साधना करने वालों के लिए यह महत्वपूर्ण रात्रि है, इसीलिए इसको निशा रात्रि कहा जाता है. अष्टमी की रात्रि सबसे शक्तिशाली और नौवीं मां सिद्धात्री का रात्रि है. नवम्याम सिद्धात्री च नौवीं सिद्धात्री का रात्रि है. इस दिन रात्रि में पूजन करने वालों की समस्त कामनाएं पूर्ण एवं सिद्धों की प्राप्ति होती है. सिद्धि के लिए विंध्यक्षेत्र से उत्तम स्थान कहीं नहीं है. इसलिए यहां पर सबसे ज्यादा पूजन व अर्चन किया जाता है. खासकर सिद्धि को लेकर ज्यादा पूजन होता है.