बेगूसराय: बिहार में सरकारी स्कूल का नाम सुनते ही अक्सर लोगों के जेहन में साधारण क्लासरूम और सीमित संसाधनों की तस्वीर आती है. आज के दौर में अधिकतर सरकारी विद्यालय की हालत ऐसी है कि यहां पढ़ाने वाले टीचर खुद अपने बच्चों को सरकारी स्कूलों में नहीं पढ़ाते हैं. यहां तक की सरकारी अधिकारियों और नेताओं के बच्चे भी इन सरकारी स्कूलों में नहीं पढ़ते हैं. इससे आप समझ सकते हैं कि सरकारी स्कूलों में शिक्षा का हाल समझ सकते हैं. हालांकि, ऐसा नहीं है कि सभी सरकारी स्कूलों का हाल एक जैसा है. कई सरकारी स्कूल ऐसे हैं जिनके आगे प्राइवेट स्कूल फेल हैं. आज हम आपको बेगूसराय के एक ऐसे ही सरकारी विद्यालय के बारे में बताने जा रहे हैं जहां पढ़ाने वाले टीचर अपने बच्चों को भी उसी सरकारी स्कूल में पढ़ाते हैं. हालांकि, जिन टीचरों का घर दूर है वह अपने बच्चों को नहीं ला पाते हैं. इससे आप समझ सकते हैं कि यहां टीचर बच्चों को कितनी लगन और शिद्दत से पढ़ाते होंगे.
25 सवालों में परखी जाती है पूरे सप्ताह की पढ़ाई
स्कूल के प्रधानाध्यापक डॉ .मोहन कुमार एक उदाहरण के रूप में जिले में हेडमास्टर बनें हैं जिन्होंने स्कूल को प्राइवेट स्कूल से बेहतर बनाकर नजीर पेश किया है. यहां मंडे मेगा क्विज में कुल 25 सवाल पूछे जाते हैं. इसमें बच्चों को सप्ताहभर कक्षा में पढ़ाए गए अलग-अलग विषयों से प्रश्न मिलते हैं. इसके साथ सामान्य ज्ञान और प्रार्थना सभा के दौरान बच्चों को दी गई जानकारी से जुड़े सवाल भी शामिल किए जाते हैं. यानी बच्चे सिर्फ किताब के पाठ तक सीमित नहीं रहते, बल्कि आसपास की जानकारी और सामान्य ज्ञान को भी अपनी तैयारी का हिस्सा बनाते हैं.
विद्यालय स्तर पर यह परीक्षा इस तरह कराई जाती है कि बच्चों में प्रतियोगी परीक्षाओं जैसा माहौल बने. शिक्षक परीक्षा के दौरान निगरानी रखते हैं, जिससे बच्चे खुद अपनी तैयारी और ज्ञान के आधार पर सवाल हल करें.
गोपनीय रहते हैं सवाल, परीक्षा के बाद बनती है रैंकिंग
लोकल 18 पर प्रिंसिपल ने बताया कि मंडे मेगा क्विज के सवाल ई-शिक्षा कोष के माध्यम से BRC स्तर से विद्यालय तक भेजे जाते हैं. स्कूल के HM के पास परीक्षा से पहले सवालों की जानकारी गोपनीय रहती है. इसके बाद बच्चों की परीक्षा ली जाती है. परीक्षा के बाद बच्चों के प्रदर्शन का आकलन किया जाता है. कितने बच्चों ने 60 प्रतिशत या उससे अधिक अंक हासिल किए, कितने बच्चों ने 40 प्रतिशत और कितने बच्चों ने 30 प्रतिशत अंक प्राप्त किए. इन सभी चीजों का रिकॉर्ड तैयार किया जाता है. बच्चों के प्रदर्शन से जुड़ा डाटा विभागीय स्तर पर ऐप के माध्यम से भी दर्ज किया जाता है.
पहले, दूसरे और तीसरे स्थान पर आने वाले बच्चों को इनाम
इस क्विज में बेहतर प्रदर्शन करने वाले बच्चों की रैंकिंग भी तय की जाती है. प्रथम, द्वितीय और तृतीय स्थान पर आने वाले विद्यार्थियों को विद्यालय स्तर पर पुरस्कृत किया जाता है. इससे बच्चों में पढ़ाई के साथ स्वस्थ प्रतिस्पर्धा की भावना भी विकसित करने की कोशिश की जाती है.
एग्जाम देखकर लगता है जैसे नवोदय-सैनिक स्कूल की तैयारी हो रही हो
लोकल 18 पर आप एग्जाम की तस्वीरें देखकर अंदाजा लगाइए क्या ये किसी प्राइवेट स्कूल या नवोदय सैनिक या यूपीएससी के सिलेबस एग्जाम से कमजोर है ?
स्कूल के छात्र आयुष कुमार बताते हैं कि मंडे मेगा क्विज में परीक्षा का माहौल ऐसा होता है कि उन्हें नवोदय विद्यालय या सैनिक स्कूल की परीक्षा जैसा महसूस होता है. शिक्षक इस दौरान पूरी तरह निगरानी करते हैं और यह सुनिश्चित करते हैं कि कोई बच्चा दूसरे से देखकर उत्तर न लिखे.
छात्रा सोनाली कुमारी बताती हैं कि हर सोमवार मंडे मेगा क्विज होता है. इसमें उस सप्ताह कक्षा में पढ़ाए गए पाठ से सवाल आते हैं. साथ ही सामान्य ज्ञान और प्रार्थना सभा में बताई गई महत्वपूर्ण जानकारियों से भी प्रश्न पूछे जाते हैं. यही वजह है कि बच्चों को पूरे सप्ताह पढ़ाई के साथ-साथ सामान्य ज्ञान पर भी ध्यान देना पड़ता है.
प्रार्थना सभा से लेकर क्विज तक ज्ञान पर जोर
इस विद्यालय की खासियत सिर्फ सोमवार की परीक्षा नहीं है. यहां प्रार्थना सभा के दौरान भी बच्चों को सामान्य ज्ञान और उपयोगी जानकारियां दी जाती हैं. बाद में इन्हीं जानकारियों से जुड़े सवाल क्विज में भी पूछे जा सकते हैं. इस तरह बच्चों के लिए प्रार्थना सभा भी सीखने का एक माध्यम बन जाती है. UMS मुर्गीफॉर्म प्राथमिक विद्यालय की यह कहानी अपने आप में एक राज्य के टॉप 5 सरकारी स्कूलों में एक का उदाहरण हो सकता है. वहीं ऐसे स्कूल के लिए आजतक रास्ता पहुंच पथ नहीं होना डीएम और स्थानीय विधायक के नाकामी का सबूत भी.