Market Outlook : सेंसेक्स 2,256 अंक उछलने के बाद अब क्या? अगले हफ्ते शेयर बाजार की दिशा तय करेंगे ये 3 बड़े फैक्टर

Market Outlook : सेंसेक्स 2,256 अंक उछलने के बाद अब क्या? अगले हफ्ते शेयर बाजार की दिशा तय करेंगे ये 3 बड़े फैक्टर


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Share Market Outlook : अगला सप्ताह भारतीय शेयर बाजार के लिए बड़ा अहम होने वाला है. सितंबर तिमाही (क्यू2) के नतीजों, विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) के निवेश रुख, वैश्विक बॉन्ड यील्ड और कच्चे तेल की कीमतें बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकती हैं.

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शेयर मार्केट पिछले सप्‍ताह चढकर बंद हुआ था. (Photo : AI)

नई दिल्‍ली. बीते हफ्ते भारतीय शेयर बाजार ने जबर्दस्त वापसी की. सेंसेक्स में 2,256.94 अंक और निफ्टी में 625.7 अंक की जोरदार तेजी आई. शुक्रवार को लगातार दूसरे दिन बाजार हरे निशान पर बंद हुआ. सेंसेक्स ने 74,729.27 और निफ्टी ने 23,146.15 के स्तर पर क्‍लोजिंग दी. इस शानदार रिकवरी के बाद अब निवेशकों के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या बाजार इस मोमेंटम को आगे भी कायम रख पाएगा? विश्लेषकों के अनुसार, आगामी कारोबारी हफ्ते में दलाल स्ट्रीट की दिशा मुख्य रूप से 3 बड़े फैक्टर्स पर निर्भर करेगी.

बाजार की नजर अब पूरी तरह सितंबर तिमाही (Q2) के वित्तीय नतीजों पर टिक गई है. बीते हफ्ते तेजी का नेतृत्व मुख्य रूप से आईटी सेक्टर ने किया था, लेकिन अब देखना होगा कि यह रैली बैंकिंग, ऑटो, कंज्यूमर और इंडस्ट्रियल सेक्टरों तक फैलती है या नहीं. बैंकिंग, उपभोक्ता और औद्योगिक कंपनियों के नतीजों तथा प्रबंधन की टिप्पणियों पर विशेष नजर रहेगी, ताकि राजस्व वृद्धि, मार्जिन में सुधार और मांग की स्थिति का आकलन किया जा सके. आने वाली तिमाहियों के लिए कंपनियों द्वारा जारी गाइडेंस भी निवेशकों की धारणा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा.

FIIs का रुख

बाजार का दूसरा बड़ा गेम-चेंजर विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) का रुख रहेगा. बाजार की दिशा तय करने में विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) का रुख भी अहम रहेगा. हालांकि विदेशी निवेशकों की बिकवाली में कुछ कमी आई है, लेकिन यदि यह सिलसिला जारी रहा तो बाजार पर दबाव बन सकता है. वहीं, घरेलू संस्थागत निवेशकों (डीआईआई) की लगातार खरीदारी बाजार को सहारा दे सकती है.

क्रूड ऑयल, बॉन्ड यील्ड और भू-राजनीतिक तनाव

ग्लोबल मोर्चे पर कच्चे तेल की कीमतें, बॉन्ड यील्ड और वैश्विक ब्याज दरों की उम्मीदें तीसरा सबसे अहम फैक्टर साबित होंगी. यदि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आता है, तो इससे भारत के आयात बिल और महंगाई दर पर दबाव बढ़ सकता है, जिसका सीधा असर कंपनियों के मार्जिन पर पड़ेगा. इसके अलावा, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में दोबारा बढ़त इक्विटी मार्केट के वैल्युएशन को प्रभावित कर सकती है, जबकि यील्ड में स्थिरता निवेशकों को जोखिम उठाने के लिए प्रेरित करेगी.



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