लाखों में है कश्मीर के प्योर पश्मीना साड़ी की कीमत, जानें क्यों है खास
Last Updated:
Pure Pashmina Saree: दिल्ली में मौजूद प्योर पश्मीना साड़ियां अपनी बुनाई, कढ़ाई और महीनों की मेहनत के कारण खास मानी जाती हैं. कश्मीर के फरहान के मुताबिक, एक साड़ी को हैंडलूम पर हाथ से तैयार करने में करीब 8 महीने से एक साल तक का समय लग सकता है. बुनाई और एंब्रॉयडरी में कारीगरों का हाथ का हुनर अहम होता है. एक प्योर पश्मीना साड़ी की कीमत करीब 1.20 लाख रुपये बताई गई है. वहीं भारी जरी वर्क वाली साड़ी की कीमत 10 से 15 लाख रुपये तक पहुंच सकती है.
नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली में आपने कई तरह की महंगी और खूबसूरत साड़ियां देखी होंगी. लेकिन कुछ साड़ियां ऐसी होती हैं, जिनकी कीमत सिर्फ उनके कपड़े या डिजाइन की वजह से नहीं होती. इन्हें तैयार करने में महीनों की मेहनत लगती है. ऐसी ही खास साड़ी है प्योर पश्मीना साड़ी. इसे तैयार करने में करीब 8 महीने से लेकर एक साल तक का समय लग जाता है. खास बात यह है कि इसकी बुनाई और कढ़ाई का काम हाथ से किया जाता है.
प्योर पश्मीना साड़ी पर हाथ से होती है बुनाई
कश्मीर के रहने वाले फरहान ने बताया कि यह पूरी साड़ी हैंडलूम पर तैयार की जाती है. साड़ी की बुनाई मशीन से नहीं, बल्कि हाथ से की जाती है. इसके बाद साड़ी के ऊपर खूबसूरत एंब्रॉयडरी की जाती है. फरहान के मुताबिक, एक साड़ी को तैयार करने में करीब 8 महीने से एक साल तक का समय लग सकता है. बुनाई के काम में आमतौर पर एक ही कारीगर लगा रहता है. वहीं एंब्रॉयडरी के लिए भी एक कारीगर काम करता है. काम ज्यादा होने पर दो-तीन लोग भी इसमें शामिल हो सकते हैं. लेकिन पूरी प्रक्रिया में हाथ का हुनर सबसे अहम रहता है.
1.20 लाख रुपए की है साड़ी
इस प्योर पश्मीना साड़ी की कीमत करीब ₹1.20 लाख बताई गई है. साड़ी को खास बनाने वाली बात सिर्फ इसका डिजाइन नहीं है. इसकी पूरी फैब्रिक प्रोसेसिंग हाथ से की जाती है. महीनों तक कारीगर इस पर काम करते हैं. इसके बाद जाकर एक खूबसूरत साड़ी तैयार होती है. फरहान बताते हैं कि उनके पास पश्मीना की कई दूसरी साड़ियां भी मौजूद हैं. एक अन्य पश्मीना साड़ी की कीमत भी करीब ₹1.20 लाख है. वहीं अगर पूरी तरह भारी जरी वर्क वाली साड़ी तैयार कराई जाए, तो इसकी कीमत करीब 10 से 15 लाख तक पहुंच सकती है.
डिजाइन में दिखता है हाथ का हुनर
इन साड़ियों पर अलग-अलग तरह के ट्रेडिशनल डिजाइन देखने को मिलते हैं. बातचीत में जिस डिजाइन का जिक्र किया गया, उसे पेपर-माशे डिजाइन बताया गया. इन डिजाइनों में बारीक कढ़ाई और पारंपरिक काम साड़ी को अलग पहचान देता है. यानी यह सिर्फ एक महंगी साड़ी नहीं है. इसे तैयार करने में महीनों की मेहनत, कारीगर का हुनर और पारंपरिक हैंडलूम तकनीक शामिल होती है. यही वजह है कि पश्मीना साड़ी जैसी साड़ियों की कीमत आम साड़ियों से काफी अलग होती है.
ऐसी साड़ी को संभालकर रखना भी जरूरी
इतने महीनों की मेहनत से तैयार साड़ी को इस्तेमाल के साथ सही तरीके से रखना भी जरूरी है. इसे अलमारी में रखते समय सीधे और साफ तरीके से रखना चाहिए. कपड़े को सुरक्षित रखने के लिए कॉटन में लपेटकर भी रखा जा सकता है. इससे लंबे समय तक इसकी क्वालिटी और कढ़ाई बनी रह सकती है.