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Marco Rubio India Visit : अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो भारत दौरे पर आ रहे हैं. इस दौरे से पहले रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर टैरिफ लगाने की योजना को अमेरिका ने टाल दिया है. रुबियो ने कहा है के लिए रातों-रात अपने ऊर्जा खरीद विकल्पों को बदलना आसान नहीं है.
20 अक्टूबर को मुंबई में रुबियो और विदेश मंत्री एस. जयशंकर की द्विपक्षीय बातचीत होगी.
नई दिल्ली. अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो इस साल दूसरी बार भारत आ रहे हैं. उनका यह दौरा ऐसे समय हो रहा है, जब भारत और अमेरिका के रिश्तों में टैरिफ, रूस से तेल खरीद और व्यापार को लेकर कई अहम मुद्दे हैं. दौरे से ठीक पहले राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस से ऊर्जा खरीदने वाले देशों पर 100 फीसदी तक अतिरिक्त टैरिफ लगाने से जुड़े प्रावधानों में छूट दी है. इससे भारत को भी राहत मिली है. भारत दौरे से पहले रुबियो ने कहा कि भारत ने अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए दूसरे विकल्पों की तरफ रुख किया है, लेकिन रूस से तेल खरीद को अचानक बंद करना आसान नहीं है.
रुबियो ने माना कि भारत अमेरिका का एक अहम सहयोगी और साझेदार है. उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को इन तमाम परिस्थितियों का आकलन करने और सही फैसला लेने के लिए कुछ समय चाहिए. रुबियो ने यह भी बताया कि होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव के दौरान अमेरिका पहले भी रूसी तेल पर 60 दिनों की छूट दे चुका है. उनका कहना था कि रूस का तेल किसी न किसी रास्ते से वैश्विक बाजार में पहुंचना ही था, सवाल यह था कि उस तेल का कितना हिस्सा अमेरिका को मिलता.
भारत पर टैरिफ और रूस पर प्रतिबंधों के असर की समीक्षा करेंगे ट्रंप
अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा है कि रूस पर लगाए गए प्रतिबंधों का मामला सिर्फ रूस तक सीमित नहीं है. इसमें भारत जैसे कई देशों पर लगाए गए टैरिफ भी शामिल हैं. रुबियो के मुताबिक, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूसी तेल पर 60 दिनों की छूट का इस्तेमाल इन फैसलों के असर का आकलन करने के लिए किया है. अमेरिका यह समझना चाहता है कि रूस पर प्रतिबंध और दूसरे देशों पर टैरिफ लगाने से दुनिया की अर्थव्यवस्था के साथ-साथ अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर क्या असर पड़ेगा. रुबियो ने कहा कि जब यह बिल पास किया गया था, तभी यह समझ थी कि दुनिया में एक साथ कई घटनाएं हो रही हैं. ऐसे में इन फैसलों के नतीजों को समझने के लिए कुछ समय की जरूरत होगी.
भारत के लिए यह क्यों अहम है?
अमेरिका का यह बयान संकेत देता है कि ट्रंप प्रशासन भारत पर टैरिफ और रूस से तेल खरीद से जुड़े फैसलों के व्यापक आर्थिक असर की समीक्षा करना चाहता है. अगले 60 दिनों में इस समीक्षा से यह स्पष्ट हो सकता है कि अमेरिका अपनी प्रतिबंध और टैरिफ नीति को लेकर आगे क्या रुख अपनाता है.
20 अक्टूबर को एस. जयशंकर से करेंगे मुलाकात
20 अक्टूबर को मुंबई में रुबियो और विदेश मंत्री एस. जयशंकर की द्विपक्षीय बातचीत होगी. विदेश मंत्रालय के मुताबिक, दोनों देशों के व्यापक रणनीतिक संबंधों को मजबूत करने के साथ व्यापार, निवेश, ऊर्जा, रक्षा और नई तकनीक पर चर्चा होगी.इस दौरे का एक बड़ा मकसद दोनों देशों के बीच जारी ट्रेड डील की बातचीत को आगे बढ़ाना भी है. विदेश मंत्री जयशंकर पहले ही संकेत दे चुके हैं कि समझौते पर बातचीत आगे बढ़ रही है, हालांकि कुछ मुद्दों पर सहमति बनना बाकी है.
रुबियो गुजरात के जामनगर में रिफाइनरी परिसर का भी दौरा करेंगे. वहीं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दिसंबर में अमेरिका जाने की संभावना को देखते हुए इस यात्रा के नतीजों पर खास नजर रहेगी. ऐसे में सवाल है कि क्या रुबियो का यह दौरा व्यापार समझौते की राह आसान करेगा और भारत-अमेरिका रिश्तों में हाल के तनाव को कम करने में मदद देगा?