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मोहम्मदाबाद विधानसभा सीट पर हुए अब तक के चुनावी नतीजों को देखें तो अंसारी परिवार कुल 8 बार चुनाव जीता है. वहीं स्वर्गीय कृष्णानंद राय के परिवार को केवल तीन बार ही जीत मिली है. 2005 में हुई उनकी हत्या के बाद हुए 2006 के उपचुनाव में उनकी पत्नी अलका राय को जीत मिली थी. मोहम्मदाबाद विधानसभा सीट पर कई चुनाव में एक तरफ से भूमिहार जाति के उम्मीदवार होते हैं, जिसके चलते वोट बंट जाते हैं.
मोहम्मदाबाद विधानसभा सीट पर अंसारी परिवार का दबदबा.
लखनऊः उत्तर प्रदेश में अगले साल विधानसभा चुनाव होने वाला है, जिसको लेकर तैयारियां तेज कर दी गई हैं. राजनीतिक दल जातीय समीकरण सेट करने में लगे हुए हैं. 403 में से कई ऐसी विधानसभा सीटें हैं, जहां किसी एक जाति का मतदाता के तौर पर दबदबा है. लेकिन उस जाति के उम्मीदवारों को बमुश्किल जीत हाथ लगती है. ऐसी ही एक विधानसभा सीट यूपी में है, जिसका नाम मोहम्मदाबाद है. गाजीपुर जिले के मोहम्मदाबाद विधानसभा सीट भूमिहार बाहुल्य इलाका है. इस विधानसभा क्षेत्र में कई ऐसे गांव हैं, जहां सबसे अधिक भूमिहार जाति के लोग रहते हैं. लेकिन जब चुनावी नतीजे आते हैं तो तस्वीर बिल्कुल इसके उलट होती है. अब सवाल यह है कि जब मोहम्मदाबाद विधानसभा सीट पर भूमिहार उम्मीदवार नहीं जीत रहे हैं तो फिर किसका दबदबा है?
बता दें कि मोहम्मदाबाद विधानसभा सीट पर अंसारी परिवार का एकतरफा दबदबा रहा है. यह वही अंसारी परिवार है, जिनके खानदान से मुख्तार अंसारी आते थे. इस सीट पर मुख्तार के परिवार का अच्छा वर्चस्व रहा है. कभी मुख्तार के भाई चुनाव जीतते थे तो अब उनके भतीजे चुनाव जीत रहे हैं. लेकिन सवाल अभी भी वही है कि भूमिहार बाहुल्य सीट पर होने पर भी क्यों नहीं जीतता कोई भूमिहार उम्मीदवार. दरअसल, मोहम्मदाबाद विधानसभा सीट पर अंसारी परिवार के अलावा अलग-अलग पार्टियों से जो उम्मीदवार होते हैं वह अधिकांश भूमिहार जाति के होते हैं. ऐसे में भूमिहार समाज का वोट कई हिस्सों में बंट जाता है. ऐसा कहा जाता है कि अंसारी परिवार का कई भूमिहार बाहुल्य गांवों में अच्छा वोट बैंक है, जिसका लाभ उन्हें मिलता रहता है.
पिछले कुछ चुनावों में एक साथ अलग-अलग पार्टियों से कितने भूमिहार उम्मीदवार मैदन में उतरे
| चुनाव वर्ष | उम्मीदवार | पार्टी | मिले वोट | परिणाम |
|---|---|---|---|---|
| 2022 | सुहैब उर्फ मन्नू अंसारी | समाजवादी पार्टी (SP) | 1,11,443 | विजेता |
| 2022 | अलका राय | भाजपा (BJP) | 92,684 | दूसरे स्थान पर |
| 2022 | माधवेंद्र राय | बसपा (BSP) | 32,440 | तीसरे स्थान पर |
| 2017 | अलका राय | भाजपा (BJP) | 1,22,156 | विजेता |
| 2017 | सिबगतुल्लाह अंसारी | बसपा (BSP) | 89,429 | दूसरे स्थान पर |
| 2017 | जनक कुमार | कांग्रेस (INC) | 9,910 | तीसरे स्थान पर |
| 2012 | सिबगतुल्लाह अंसारी | कौमी एकता दल (QED) | 66,922 | विजेता |
| 2012 | राजेश राय | समाजवादी पार्टी (SP) | 59,589 | दूसरे स्थान पर |
| 2012 | विनोद कुमार राय | बसपा (BSP) | 50,246 | तीसरे स्थान पर |
| 2012 | वीरेंद्र कुमार राय | भाजपा | ||
| 2007 | सिबगतुल्लाह अंसारी | समाजवादी पार्टी (SP) | 56,361 | विजेता |
| 2007 | अलका राय | भाजपा (BJP) | 52,975 | दूसरे स्थान पर |
| 2007 | विजय शंकर | बसपा (BSP) | 21,247 | तीसरे स्थान पर |
| 2002 | कृष्णानंद राय | भाजपा (BJP) | 61,049 | विजेता |
| 2002 | अफजाल अंसारी | समाजवादी पार्टी (SP) | 53,277 | दूसरे स्थान पर |
| 2002 | संजय | बसपा (BSP) | 18,843 | तीसरे स्थान पर |
1985 से अंसारी परिवार का दबदबा
गाजीपुर की मोहम्मदाबाद विधानसभा सीट 1957 में अस्तित्व में आई. तब यहां से दो विधायक चुने गए थे. लेकिन फिर 1962 से यहां एक विधायक चुने जा रहे हैं. 1985 में इस सीट से मुख्तार अंसारी के भाई और सांसद अफजाल अंसारी पहली बार भाकपा के टिकट पर चुनाव जीते थे, तब से इस सीट पर अंसारी परिवार का दबदबा है.
मोहम्मदाबाद विधानसभा सीट पर अबतक के हुए चुनाव के क्या नतीजे रहे
| चुनाव वर्ष | विजेता उम्मीदवार | विजेता पार्टी | दूसरे स्थान पर उम्मीदवार | उनकी पार्टी |
|---|---|---|---|---|
| 2022 | सुहैब उर्फ मन्नू अंसारी | सपा | अलका राय | भाजपा |
| 2017 | अलका राय | भाजपा | सिबगतुल्लाह अंसारी | बसपा |
| 2012 | सिबगतुल्लाह अंसारी | कौमी एकता दल (QED) | राजेश राय | सपा |
| 2007 | सिबगतुल्लाह अंसारी | सपा | अलका राय | भाजपा |
| 2002 | कृष्णानंद राय | भाजपा | अफजाल अंसारी | सपा |
| 1996 | अफजाल अंसारी | सपा | वीरेंद्र | बसपा |
| 1993 | अफजाल अंसारी | CPI | विजय शंकर राय | भाजपा |
| 1991 | अफजाल अंसारी | CPI | विजय शंकर राय | भाजपा |
| 1989 | अफजाल अंसारी | CPI | — | — |
| 1985 | अफजाल अंसारी | CPI | — | — |
| 1980 | विजय शंकर सिंह | कांग्रेस (I) | — | — |
| 1977 | राम जनम राय | जनता पार्टी (JNP) | कृष्णानंद राय | कांग्रेस |
| 1974 | राम जनम राय | भारतीय क्रांति दल (बीकेडी) | — | — |
| 1969 | विजय शंकर सिंह | — | — | — |
| 1967 | विजय शंकर सिंह | — | — | — |
| 1962 | विजय शंकर सिंह | कांग्रेस | — | — |
मोहम्मदाबाद विधानसभा सीट पर जातीय समीकरण क्या है
मोहम्मदाबाद विधानसभा सीट के जातिगत समीकरण की बात करें तो यहां कुल मतदाताओं में भूमिहार और फिर दलित आबादी निर्णायक भूमिका निभाती है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक क्षेत्र में सर्वाधिक आबादी भूमिहार मतदाताओं की है, जो लगभग 31 फीसदी है. इसके बाद 24 फीसदी दलति हैं. फिर 14 फीसदी यादव मतदाता हैं. वहीं 7 फीसदी कुशवाहा और 7 फीसदी मुस्लिम मतदाता हैं. इसके अलावा ब्राह्मण मतदाता 4 फीसदी हैं.
2027 विधानसभा चुनाव में क्या होगी तस्वीर
2027 विधानसभा चुनाव की तस्वीर की बात करें तो इस बार भी भूमिहार उम्मीदवारों की संख्या ज्यादा है. एक तरफ जहां स्वर्गीय कृष्णानंद राय के बेटे पीयूष राय और उनकी मां अलका राय बीजेपी की तरफ से प्रबल दावेदार मानी जा रही हैं, तो वहीं उन्हीं के परिवार के आनंद राय ‘मुन्ना’ भी क्षेत्र में अपनी सक्रियता बढ़ाकर दावेदारी ठोस कर रहे हैं. इसके अलावा घोसी से पूर्व सांसद अतुल राय की एंट्री ने मोहम्मदाबाद की राजनीति को दिलचस्प बना दिया है. उम्मीद जताई जा रही है कि मोहम्मदाबाद विधानसभा सीट से खुद अतुल राय या उनके परिवार का कोई सदस्य चुनाव लड़ सकता है. इसके अलावा पूर्व पीसीएस अधिकारी मनोज राय भी सक्रिय हैं. यानी कि इस बार भी भूमिहारों का वोट बड़े स्तर पर बंट सकता है.