OPINION: दिग्विजय सिंह का दोहरा मापदंड, सनातन यात्रा तो निकाल रहे और ‘ओम नमः शिवाय’ से परहेज

OPINION: दिग्विजय सिंह का दोहरा मापदंड, सनातन यात्रा तो निकाल रहे और ‘ओम नमः शिवाय’ से परहेज


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Digvijaya Singh: दिग्विजय सिंह एक तरफ तो सनातन यात्रा निकालने का ऐलान कर चुके हैं, लेकिन दूसरी तरफ अब ‘ओम नमः शिवाय’ के दुपट्टे से उन्होंने परहेज किया है और एक नेता को जमकर हड़काया है. उन्होंने कहा कि इसे क्यों लेकर आया है. ऐसे में सवाल उठता है कि दिग्विजय दोहरा मापदंड क्यों अपना रहे हैं. क्या वह सनातन यात्रा हिंदू लोगों को धोखा देने के लिए निकाल रहे हैं. या वह सचमुच में ही सनातन के लिए काम करना चाहते हैं.

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दिग्विजय सिंह को ओम नम: शिवाय से परहेज क्यों?

दिग्विजय सिंह कांग्रेस के कद्दावर नेताओं में शामिल हैं. लेकिन अक्सर वह अपने बयानों और हरकतों के लिए सुर्खियों में बने रहते हैं. कई बार वह हिंदू धर्म पर दिए अपने बयानों की वजह से बीजेपी के निशाने पर रहे हैं. कुछ दिन पहले उन्होंने सनातन धर्म से जुड़ा एक बड़ा ऐलान किया था, जिसमें उन्होंने उज्जैन से अयोध्या तक पैदल यात्रा निकालने की बात कही थी. यह यात्रा 20 अक्टूबर से शुरू होगी. लेकिन इससे पहले ही सोशल मीडिया पर एक ऐसा वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें वह फिर से अपने विरोधियों के निशाने पर आ गए हैं. इससे उनकी धार्मिक आस्था और राजनीतिक रुख पर फिर से एक बड़ा सवालिया निशान खड़ा कर दिया है.

‘ओम नमः शिवाय’ दुपट्टे से दिग्विजय सिंह ने किया परहेज
दिग्विजय सिंह इंदौर की ऐतिहासिक रेसिडेंसी कोठी में थे, जहां कम्युनिस्ट पार्टी से जुड़े वरिष्ठ नेता राजेश शर्मा उनसे मिलने पहुंचे. इस दौरान राजेश एक धार्मिक दुपट्टा लेकर गए, जिस पर बड़े अक्षरों में ‘ओम नमः शिवाय’ लिखा हुआ था. इसके बाद दिग्विजय ने उनसे कहा कि तू इसे क्यों लेकर आया है. इसका कामरेड पार्टी में क्या काम है. देख इस पर क्या हुआ है. इसके बाद सभी ने कहा कि ओम नम: शिवाय. इससे साफ संकेत मिलता है कि वह ‘ओम नमः शिवाय’ लिखे हुए पट्टे से परहेज कर रहे थे.

यात्रा निकालकर क्या साबित करना चाहते हैं दिग्विजय सिंह?
अब एक तरफ तो दिग्विजय सिंह खुद को बड़ा सनातनी साबित करने के लिए बड़ी-बड़ी यात्राएं निकाल रहे हैं. दूसरी तरफ दूसरी तरफ ‘ओम नमः शिवाय’ लिखा दुपट्टा देखकर उनकी भौंहें तन जाती हैं. क्या वह यात्रा सिर्फ हिंदू लोगों को दिखाने के लिए निकाल रहे हैं. या मध्य प्रदेश में हिंदू वोटों को सिर्फ साधना चाहते हैं और उनके चुनाव में वोट चाहते हैं.

अगर ऐसा नहीं हैं, तो दिग्विजय को आखिर सनातन धर्म और उसके पवित्र प्रतीकों से इतनी आपत्ति क्यों है? क्या गले में ‘ओम नमः शिवाय’ लिखा हुआ दुपट्टा पहनना कोई अपराध है? एक तरफ तो चुनाव आते ही कांग्रेस नेता जनेऊ धारण करने लगते हैं और यात्राएं निकालने का ढोंग करते हैं, वहीं दूसरी तरफ पवित्र मंत्रों को देखकर असहज हो जाते हैं.

नेताओं की हर हरकत को परखती है जनता
दिग्विजय सिंह को यह समझना होगा कि राजनीतिक प्रतीक काफी मायने रखते हैं, तो आज के दौर में जनता काफी समझदार हो चुकी है और वह जानती है कि कौन हिंदुत्व का ढोंग कर रहा है और कौन असलियत में सनातन को आगे बढ़ाना चाहता है.

दिग्विजय की हरकतों से कांग्रेस को होगा नुकसान
दिग्विजय सिंह को यह समझना होगा कि वह बड़े नेताओं में शुमार हैं और उनके द्वारा किए गए किसी भी काम का मैसेज दूर तक जाता है. अगर हिंदुत्व को लेकर वह यही रुख अपनाते रहे, तो कांग्रेस का नुकसान होना तय है. फिर चाहें वह कितनी ही सनातन यात्राएं क्यों ना निकाल लें? शायद इसी वजह से मध्य प्रदेश में कांग्रेस साल 2003 के बाद से ही गायब है. बीच में साल 2018 में 15 महीने के लिए उनकी सरकार बनी थी, लेकिन आपसी खींचतान और ज्योतिरादित्य सिंधिया के बीजेपी में चले जाने से उनकी सरकार गिर गई थी.



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