नई दिल्ली. यूपी चुनाव 2027 से पहले कांग्रेस ने समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन और सीटों के बंटवारे को लेकर अपनी तैयारी तेज कर दी है. 17 अक्टूबर 2026 को दिल्ली स्थित इंदिरा भवन में हुई बैठक के बाद कांग्रेस के तीन प्रमुख नेताओं के बयानों ने यूपी की सियासत में नई चर्चा छेड़ दी है. कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम ने ऐलान किया कि अगले सप्ताह से सीट शेयरिंग पर बातचीत शुरू होगी. वहीं, प्रदेश अध्यक्ष आराधना मिश्रा मोना ने संगठन को मजबूत करने पर जोर दिया, जबकि कार्यकारी अध्यक्ष इमरान मसूद ने इंडिया गठबंधन को ताकतवर बनाने की बात कही. सवाल यह है कि क्या कांग्रेस 2027 के चुनाव में समाजवादी पार्टी से ज्यादा सीटों की मांग करेगी? क्या अखिलेश यादव कांग्रेस की मांगों के सामने झुकेंगे या सपा अपने पुराने रुख पर कायम रहेगी?
कांग्रेस के उत्तर प्रदेश प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम ने बैठक के बाद कहा कि सीटों के बंटवारे पर अगले सप्ताह से बातचीत शुरू होने वाली है. उन्होंने बताया कि चर्चा का उद्देश्य यह तय करना है कि गठबंधन सभी 403 विधानसभा सीटों पर किस तरह मजबूत तरीके से चुनाव लड़ सकता है, किन सीटों पर क्या चुनौतियां हैं और कांग्रेस तथा समाजवादी पार्टी किन सीटों पर उम्मीदवार उतार सकती हैं.
सपा से जल्द से जल्द गठबंधन करना चाहती है कांग्रेस.
सीट शेयरिंग को लेकर यूपी कांग्रेस के दिग्गज दिल्ली में जुटे
गौतम के बयान से साफ है कि कांग्रेस अब केवल गठबंधन बनाए रखने की बात नहीं कर रही, बल्कि सीटों के बंटवारे को लेकर औपचारिक बातचीत की दिशा में आगे बढ़ना चाहती है. हालांकि, उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि कांग्रेस कितनी सीटों की मांग करेगी और सपा के सामने उसका प्रस्ताव क्या होगा. कांग्रेस इससे पहले भी बराबरी और सम्मान के आधार पर सीटों के बंटवारे की बात उठा चुकी है. ऐसे में आने वाली बातचीत में दोनों दलों की चुनावी ताकत, संगठन और जीत की संभावनाएं अहम मुद्दे बन सकती हैं.
आराधना मिश्रा मोना का फोकस, पहले संगठन फिर चुनावी तैयारी
उत्तर प्रदेश कांग्रेस की नवनियुक्त प्रदेश अध्यक्ष आराधना मिश्रा मोना ने कहा कि चुनाव में अब ज्यादा समय नहीं बचा है, इसलिए पार्टी को अपनी तैयारियां शुरू करनी होंगी. दिल्ली की बैठक में संगठन को मजबूत करने और चुनाव से जुड़े राजनीतिक मुद्दों पर चर्चा हुई. कांग्रेस के लिए यह तैयारी दो मोर्चों पर महत्वपूर्ण है. एक तरफ पार्टी को प्रदेश में अपना संगठन मजबूत करना है, वहीं दूसरी तरफ समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन में अपनी भूमिका तय करनी है.
क्या तिकड़ी पर अखिलेश भारी पड़ेंगे?
आराधना मिश्रा की नियुक्ति के बाद कांग्रेस की नई प्रदेश टीम से उम्मीद की जा रही है कि वह संगठनात्मक सक्रियता बढ़ाएगी और चुनावी रणनीति को जमीन पर उतारेगी. लेकिन संगठन मजबूत करने की कोशिश और गठबंधन में ज्यादा सीटें हासिल करने की रणनीति के बीच तालमेल बनाना पार्टी के लिए अहम होगा. वहीं कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष इमरान मसूद ने कहा कि फिलहाल INDIA गठबंधन को मजबूत करने पर ध्यान दिया जा रहा है. उनके मुताबिक, गठबंधन मजबूत होना चाहिए और सभी दलों को ताकत के साथ चुनाव लड़ना चाहिए.
हालांकि, मसूद पहले भी उत्तर प्रदेश में कांग्रेस की भूमिका और सीटों के बंटवारे को लेकर मुखर रहे हैं. अक्टूबर में सामने आई रिपोर्टों के मुताबिक, कांग्रेस के भीतर बड़ी संख्या में सीटों पर चुनाव लड़ने की मांग को लेकर चर्चा होती रही है, जबकि समाजवादी पार्टी सीटों का निर्धारण जीतने की संभावना और संगठनात्मक ताकत के आधार पर करना चाहती है. यही वह बिंदु है, जहां दोनों दलों के बीच बातचीत चुनौतीपूर्ण हो सकती है. कांग्रेस अपने संगठन का विस्तार करते हुए अधिक सीटों पर दावेदारी चाहती है, जबकि सपा अपने चुनावी प्रदर्शन और राज्य में संगठन की स्थिति को सीटों के बंटवारे का आधार बना सकती है.
क्या अखिलेश यादव को झुकाने की रणनीति है कांग्रेस की?
यूपी की राजनीति में अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि सीट शेयरिंग की बातचीत में कांग्रेस कितनी आक्रामक भूमिका अपनाएगी और अखिलेश यादव का रुख क्या होगा. 2024 के लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी ने 37 और कांग्रेस ने छह सीटें जीती थीं. इस नतीजे के बाद सपा का गठबंधन में बड़ा राजनीतिक आधार है, लेकिन कांग्रेस का तर्क रहा है कि विपक्षी एकजुटता ने दोनों दलों को फायदा पहुंचाया. ऐसे में सीटों का बंटवारा केवल लोकसभा चुनाव के आंकड़ों के आधार पर तय करना आसान नहीं होगा. विधानसभा चुनाव में स्थानीय उम्मीदवार, क्षेत्रवार संगठन, पिछले चुनावों का प्रदर्शन और सहयोगी दलों की मौजूदगी भी महत्वपूर्ण होगी.
कांग्रेस और सपा के सामने फिलहाल तीन बड़ी चुनौतियां हैं. पहला सीटों के बंटवारे पर सहमति, दोनों दलों के संगठन के बीच तालमेल और भाजपा के खिलाफ साझा चुनावी रणनीति तैयार करना. कांग्रेस की दिल्ली बैठक से यह संकेत मिला है कि पार्टी अब चुनावी तैयारियों को तेज करना चाहती है और सीटों के बंटवारे पर बातचीत को आगे बढ़ाने के लिए तैयार है. लेकिन गठबंधन की घोषणा और सीटों पर सहमति दो अलग-अलग चरण हैं. अब नजर अगले सप्ताह होने वाली संभावित बातचीत पर रहेगी. क्या कांग्रेस और सपा सीटवार चर्चा के जरिए कोई फॉर्मूला निकाल पाएंगी? क्या कांग्रेस को अपनी अपेक्षा के मुताबिक सीटें मिलेंगी? और क्या अखिलेश यादव तथा कांग्रेस नेतृत्व के बीच सहमति बन पाएगी?