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Pyre Film Screening Bageshwar: 18 अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार जीत चुकी निर्देशक विनोद कापड़ी की चर्चित फिल्म ‘पायर’ अब बागेश्वर में मोबाइल थिएटर के जरिए दिखाई जा रही है. कुमाऊं के मुनस्यारी स्थित एक दूरस्थ गांव के बुजुर्ग दंपती के जीवन पर आधारित यह फिल्म पहाड़ के अकेलेपन, पलायन के दर्द और अटूट प्रेम को मार्मिक ढंग से पर्दे पर उतारती है. सिनेमाघरों से दूर रहने वाले स्थानीय दर्शकों के लिए बड़ी स्क्रीन और बेहतरीन साउंड पर अपनी मिट्टी की यह भावुक दास्तान देखने का यह खास मौका है.
Pyre Film Screening Bageshwar: उत्तराखंड के कुमाऊं क्षेत्र की संस्कृति, पहाड़ी जीवन और रिश्तों की भावनाओं को पर्दे पर उतारने वाली फिल्म पायर इन दिनों चर्चा में है. फिल्म की कहानी और पहाड़ की वास्तविक परिस्थितियों को दिखाने के अंदाज ने दर्शकों का ध्यान खींचा है. पिथौरागढ़ जिले के बेरीनाग में स्क्रीनिंग के बाद अब यह फिल्म बागेश्वर में दिखाई जा रही है. खास बात यह है कि दर्शकों को फिल्म देखने के लिए मोबाइल थिएटर की सुविधा मिल रही है. इसके माध्यम से बड़ी स्क्रीन और बेहतर साउंड के साथ फिल्म देखने का अनुभव मिल रहा है.
बुजुर्ग दंपती और पलायन की दास्तान
विनोद कापड़ी के निर्देशन में बनी पायर की कहानी कुमाऊं हिमालय के एक दूरस्थ गांव मुनस्यारी में रहने वाले बुजुर्ग दंपती के जीवन पर आधारित है. फिल्म में पति-पत्नी के बीच वर्षों से बना प्रेम, एक-दूसरे का साथ देने की हिम्मत, बदलते सामाजिक हालात और अकेलेपन जैसी भावनाओं को दिखाया गया है. पहाड़ के उन गांवों की तस्वीर भी सामने आती है, जहां पलायन के कारण घर खाली होते जा रहे हैं, और बुजुर्ग अपने गांव में ही जीवन बिताने को मजबूर हैं.
पहाड़ के जीवन और रिश्तों की कहानी
निर्देशक विनोद कापड़ी ने लोकल 18 को बताया कि फिल्म की खासियत यह है कि इसमें पहाड़ी जीवन को केवल प्राकृतिक खूबसूरती तक सीमित नहीं रखा गया है, बल्कि गांवों में रहने वाले लोगों की भावनाओं और उनके संघर्षों को भी जगह दी गई है. पहाड़ों में कभी परिवारों और बच्चों की चहल-पहल से भरे रहने वाले गांवों में आज कई जगह बुजुर्ग ही रह गए हैं. ऐसे में जीवन के अंतिम पड़ाव पर एक-दूसरे का सहारा बने पति-पत्नी की कहानी दर्शकों को भावनात्मक रूप से जोड़ती है.
फिल्म का नाम पायर कुमाऊंनी भाषा और स्थानीय भावनाओं से जुड़ा हुआ है. इसकी कहानी पहाड़ के सामाजिक बदलाव, पलायन और मानवीय रिश्तों जैसे विषयों पर सोचने का अवसर देती है. यह फिल्म केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि पहाड़ की बदलती तस्वीर को समझने का माध्यम भी बनती है.
मोबाइल थिएटर में मिलेगा सिनेमाघर जैसा अनुभव
बागेश्वर में मोबाइल थिएटर के माध्यम से फिल्म दिखाए जाने से स्थानीय दर्शकों को इसे बड़ी स्क्रीन पर देखने का अवसर मिल रहा है. जिन लोगों के लिए सिनेमाघर तक पहुंचना आसान नहीं है, उनके लिए ऐसी व्यवस्था खास है. मोबाइल थिएटर में बड़ी स्क्रीन और साउंड सिस्टम के जरिए दर्शकों को फिल्म देखने का अलग अनुभव मिल रहा है.
18 अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार जीत चुकी है फिल्म
फिल्म को 18 अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार मिल चुके हैं. इससे फिल्म को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली है. फिल्म की आधिकारिक सिनेमाघर रिलीज 30 अक्टूबर 2026 को निर्धारित बताई गई है. ऐसे में बागेश्वर में इसकी स्क्रीनिंग स्थानीय दर्शकों के लिए फिल्म को रिलीज से पहले देखने का मौका है. पायर कुमाऊं के पहाड़, वहां के लोगों के जीवन और रिश्तों की संवेदनशील कहानी को सामने लाती है. बागेश्वर में मोबाइल थिएटर के जरिए इसकी स्क्रीनिंग से स्थानीय दर्शकों को अपनी ही मिट्टी और संस्कृति से जुड़ी कहानी बड़े पर्दे पर देखने का मौका मिल रहा है.