Russia Reaction on US waives Sanctions: अमेरिका का यू टर्न और रूस की हुई बल्ले-बल्ले जेलेंस्की झल्लाए पर रूस ने क्या कहा?

Russia Reaction on US waives Sanctions: अमेरिका का यू टर्न और रूस की हुई बल्ले-बल्ले जेलेंस्की झल्लाए पर रूस ने क्या कहा?


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अमेरिका का यू टर्न और रूस की बल्ले-बल्ले, जेलेंस्की झल्लाए, क्या बोला रूस?

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Russia reaction after US waives Sanctions: अमेरिका ने रूस पर नए प्रतिबंध लगाने वाले कानून में थोड़ी छूट दी है, जिसके बाद रूस की ओर से भी प्रतिक्रिया आई है. जहां यूक्रेन के राष्ट्रपति की झल्लाहट पहले ही सामने आ गई थी, वहीं मॉस्को की ओर से इसका स्वागत किया गया है और भविष्य के शांति समझौते में इससे फायदा मिलने की उम्मीद की गई है.

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रूस ने अमेरिका के फैसले का किया स्वागत. (रॉयटर्स)

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से रूस पर नए प्रतिबंध लगाने वाले कानून के कुछ प्रावधानों में छूट देने के फैसले का मॉस्को ने स्वागत किया है. रूसी डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट फंड के प्रमुख किरिल दिमित्रिएव ने इसे दोनों देशों के संबंधों के लिहाज से महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक कदम बताया है. उनके मुताबिक इस फैसले से रूस और अमेरिका के बीच आर्थिक सहयोग की संभावनाएं बनी रह सकती हैं.

समाचार एजेंसी तास के मुताबिक दिमित्रिएव ने सोशल मीडिया मंच टेलीग्राम पर कहा कि ट्रंप प्रशासन का यह फैसला प्रतिबंधों और टकराव के बजाय बातचीत तथा आपसी फायदे वाले सहयोग की दिशा में बदलाव का संकेत है. उन्होंने कहा कि इससे वैश्विक स्थिरता बनाए रखने के लिए दोनों देशों के बीच साझा जिम्मेदारी की भावना को बढ़ावा मिल सकता है.

रूस-अमेरिका संबंधों पर क्या बोले दिमित्रिएव?

दिमित्रिएव का कहना है कि यदि ग्राहम एक्ट को पूरी तरह लागू कर दिया जाता, तो रूस और अमेरिका के बीच आर्थिक सहयोग लगभग पूरी तरह ठप हो सकता था. इसका असर केवल दोनों देशों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि वैश्विक बाजारों और अमेरिकी अर्थव्यवस्था को भी नुकसान पहुंचने की आशंका थी. उन्होंने कहा कि रूस और अमेरिका के बीच आर्थिक संबंध दोनों देशों के हित में हैं. उनके मुताबिक आपसी व्यापार और निवेश से वैश्विक अर्थव्यवस्था को स्थिरता मिल सकती है. साथ ही बातचीत और विश्वास बढ़ने से भविष्य में शांति कायम करने के प्रयासों को भी मदद मिल सकती है.

क्या है ग्राहम एक्ट, जिससे परेशान था रूस?

यह कानून रूस पर दबाव बढ़ाने के उद्देश्य से लाया गया था. इसमें रूस के वरिष्ठ राजनीतिक और सैन्य अधिकारियों, सरकारी कंपनियों तथा रूस के साथ कारोबार करने वाले अन्य देशों के व्यापारिक साझेदारों पर भी प्रतिबंध लगाने का प्रावधान शामिल था. रिपोर्ट के मुताबिक ट्रंप ने 18 सितंबर को अमेरिकी कांग्रेस से पारित विधेयक पर हस्ताक्षर किए थे, अब तय ये होना था कि किस-किस पर प्रतिबंध लगना है लेकिन फैसला कुछ और ही आ गया.

ट्रंप के फैसले से क्या होगा?

ट्रंप के इस आदेश के जरिए रूस के खिलाफ प्रस्तावित कुछ सख्त प्रतिबंध लागू नहीं करने का फैसला किया. रूस इसे दोनों देशों के बीच आर्थिक संपर्क और कूटनीतिक बातचीत के लिए अवसर के रूप में देख रहा है.

हालांकि इस फैसले का मतलब यह नहीं है कि रूस पर लगे सभी प्रतिबंध हटा दिए गए हैं. फिलहाल राहत कुछ प्रावधानों तक सीमित है. आगे दोनों देशों के संबंध किस दिशा में बढ़ेंगे, यह अमेरिकी प्रशासन के आगामी फैसलों और रूस-यूक्रेन युद्ध को लेकर होने वाली बातचीत पर निर्भर करेगा.



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