Nainital News : ठंड बढ़ते ही फूलने लगी सांसें, नैनीताल में ये कैसी आफत? चेस्ट फिजिशियन ने बताई बचने की ट्रिक

Nainital News : ठंड बढ़ते ही फूलने लगी सांसें, नैनीताल में ये कैसी आफत? चेस्ट फिजिशियन ने बताई बचने की ट्रिक


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Asthma Patients Nainital : नैनीताल में सर्दियों की दस्तक के साथ सांस संबंधी बीमारियों से जूझ रहे मरीजों की मुश्किलें बढ़ने लगी हैं. अस्थमा मरीजों के लिए सुबह और शाम का समय मुसीबत बनता जा रहा है. नैनीताल के चेस्ट फिजिशियन डॉ. अभिषेक गुप्ता लोकल 18 से बताते हैं कि इन दिनों ओपीडी में रोज 60 से 70 मरीज पहुंच रहे हैं, जिनमें आधे अस्थमा पीड़ित हैं. डॉ. अभिषेक कहते हैं कि तापमान में गिरावट और ठंडी हवा के संपर्क में आने से कुछ मरीजों की श्वसन नलियों में सूजन और सिकुड़न बढ़ जाती है. इससे सांस लेने में दिक्कत हो सकती है. जिन लोगों को पहले से अस्थमा है, उन्हें मौसम में बदलाव के दौरान ठंडी हवा के सीधे संपर्क से बचना चाहिए.

नैनीताल. उत्तराखंड के नैनीताल में मौसम बदलने और तापमान में गिरावट के साथ ही सांस संबंधी बीमारियों से जूझ रहे मरीजों की मुश्किलें बढ़ने लगी हैं. सुबह और शाम के समय बढ़ती ठंड के बीच अस्थमा के मरीजों को सांस लेने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. नैनीताल के बीडी पांडे जिला अस्पताल में इन दिनों सांस संबंधी समस्याओं से पीड़ित मरीज उपचार के लिए पहुंच रहे हैं. अस्पताल के चेस्ट फिजिशियन डॉ. अभिषेक गुप्ता लोकल 18 से बताते हैं कि इन दिनों रोजाना ओपीडी में 60 से 70 मरीज पहुंच रहे हैं, जिनमें 25 से 30 मरीज अस्थमा से पीड़ित हैं. ठंड के मौसम में अस्थमा मरीजों को सावधानी बरतने की जरूरत है.

सांस लेते समय घरघराहट

डॉ. अभिषेक गुप्ता कहते हैं कि सर्दियों की शुरुआत के साथ ही सांस संबंधी बीमारियों से पीड़ित मरीजों की परेशानी बढ़ने लगती है. तापमान में गिरावट और ठंडी हवा के संपर्क में आने से कुछ मरीजों की श्वसन नलियों में सूजन और सिकुड़न बढ़ सकती है. इससे सांस लेने में कठिनाई, खांसी, सीने में जकड़न और सांस लेते समय घरघराहट जैसी समस्याएं सामने आ सकती हैं. डॉ. अभिषेक के अनुसार अस्थमा से पीड़ित मरीजों को सर्दियों के दौरान अधिक सतर्क रहने की जरूरत है. जिन लोगों को पहले से यह बीमारी है, उन्हें मौसम में बदलाव के दौरान ठंडी हवा के सीधे संपर्क से बचना चाहिए. पहले से निर्धारित उपचार का नियमित पालन जरूरी है.

भूलकर भी न करना ये गलती

डॉ. अभिषेक के मुताबिक बीडी पांडे जिला अस्पताल की ओपीडी में इन दिनों प्रतिदिन 60 से 70 मरीज सांस संबंधी समस्याओं के उपचार के लिए पहुंच रहे हैं. इनमें 25 से 30 मरीज अस्थमा से पीड़ित हैं. अस्थमा एक ऐसी बीमारी है, जिसमें श्वसन नलियों में सूजन के कारण सांस लेने में परेशानी हो सकती है. हालांकि इसे पूरी तरह समाप्त करना हमेशा संभव नहीं होता, लेकिन उचित उपचार और नियमित देखभाल से इसे नियंत्रित रखा जा सकता है. इसलिए अस्थमा के मरीजों को अपनी दवाएं और इनहेलर बिना डॉक्टर की सलाह के बंद नहीं करने चाहिए.

सुबह-शाम करें ये काम

डॉ. अभिषेक कहते हैं कि ठंड के मौसम में अस्थमा के मरीजों को अपनी दिनचर्या में कुछ सावधानियां बरतनी चाहिए. सुबह और शाम के समय तापमान कम रहने पर ठंडी हवा के सीधे संपर्क से बचें. बाहर निकलते समय नाक और मुंह को स्कार्फ या मास्क से ढकें. धूल, धुएं और ऐसे दूसरे कारकों से दूर रहें, जिनसे सांस की परेशानी बढ़ती हो. केवल लक्षण कम होने पर दवाएं बंद करना या इनहेलर छोड़ देना परेशानी बढ़ा सकता है. अगर सांस लेने में अधिक दिक्कत हो, सीने में तेज जकड़न महसूस हो या निर्धारित उपचार से राहत न मिले, तो तुरंत डॉक्टर से मिलें.

बच्चों को भी खतरा

डॉ. अभिषेक बताते हैं कि 14 से 15 वर्ष की उम्र के बच्चों में भी अस्थमा के शुरुआती लक्षण दिखाई दे सकते हैं. अगर बच्चों को बार-बार खांसी आती है, खेलते या दौड़ते समय सांस फूलती है या रात में खांसी और सांस लेने में परेशानी होती है, तो इसे नजरअंदाज न करें. हालांकि ये लक्षण दूसरी बीमारियों में भी दिखाई दे सकते हैं, इसलिए सही कारण जानने के लिए चिकित्सकीय जांच जरूरी है. डॉ. अभिषेक के मुताबिक बच्चों और उनके अभिभावकों को मौसम के अनुरूप सावधानी बरतनी जरूरी है. नैनीताल में ठंड बढ़ने के साथ अस्थमा के मरीजों के लिए अपनी सेहत का ध्यान रखना जरूरी हो गया है. सही उपचार, नियमित दवाओं और जरूरी सावधानियों से अस्थमा को नियंत्रित रखने में मदद मिल सकती है. सांस लेने में गंभीर परेशानी होने पर घरेलू उपायों के भरोसे रहने के बजाय तुरंत डॉक्टर से मिलें.



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