मुर्गी पालन व्यवसाय में बंपर कमाई के लिए जानें अंडा उत्पादन देने वाली पांच बेहतरीन नस्लें, इनमें कम होता है बीमारी का खतरा

मुर्गी पालन व्यवसाय में बंपर कमाई के लिए जानें अंडा उत्पादन देने वाली पांच बेहतरीन नस्लें, इनमें कम होता है बीमारी का खतरा


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5 Chicken breeds Egg production: अगर हम बात करें मुर्गियां चाहे वह अंडा उत्पादन के लिए, बच्चे उत्पादन के लिए, चाहे मीट उत्पादन के लिए रखें. इनकी सबकी वैरायटी (नस्ल) अलग-अलग होती है. उनको इस तरीके से डेवलप किया गया है जिससे कि कम समय में उनमें ज्यादा मीट का उत्पादन हो. अगर हम बात करे तो देसी नस्ले जो हमारे इंडिया में फेमस है एक असील है और दूसरी है कड़कनाथ (काला मांस). असील एक गमेबर्ड है जोकि 100 अंडे तक उत्पादन कर देता है वही दूसरा कड़कनाथ (काला मांसी) बोलते है. इसका भी अंडे का उत्पादन लगभग 100 के आसपास होता है. उसके बाद आती है डुएल परपज बर्ड उसको हम एक माध्यम वैरायटी कह सकते हैं.

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सहारनपुर: अगर आप खेती के साथ मुर्गी पालन का व्यवसाय शुरू करना चाहते हैं, तो अंडा उत्पादन आपके लिए कमाई का एक अच्छा अवसर बन सकता है. बाजार में अंडों की मांग बनी रहती है, इसलिए सही नस्ल का चुनाव करके इस व्यवसाय को बेहतर तरीके से चलाया जा सकता है. लेकिन मुर्गी पालन शुरू करने से पहले यह जानना जरूरी है कि कौन-सी नस्ल अधिक अंडे देती है चलिए जानते है. अंडा उत्पादन के लिए मुर्गी की 5 नस्ल सबसे अच्छी मानी जाती है. जिनमें से दो नस्लों को कुछ समय पहले ही डेवलप किया गया है जिनका नाम है सोनाली और वनराज जो केवल और केवल अंडा उत्पादन के लिए तैयार की गई है.

वही सबसे ज्यादा अंडा उत्पादन में फेमस नस्ल व्हाइट लेगहॉर्न मुर्गी की गिनती प्रमुख नस्लों में होती है. इसकी व्यावसायिक किस्में अच्छी अंडा उत्पादन क्षमता के लिए जानी जाती हैं. इसके अलावा रोड आइलैंड रेड जो कि ज्यादा और महंगे अंडे का उत्पादन करती है. यह एक अमेरिकी नस्ल है. वहीं चौथे नंबर पर आती है असील जो की 100 से 120 अंडे तक का उत्पादन करती है, जबकि पांचवें नंबर पर कड़कनाथ नस्ल भी 100 से 120 अंडे तक का उत्पादन करती है. असील और कड़कनाथ मुर्गी भले ही कम अंडे देती हो लेकिन इनका अंडे का दाम अन्य मुर्गी की अपेक्षा ज्यादा रहता है. तो इसलिए यह कम अंडा उत्पादन से भी अच्छा मुनाफा देती है.

मुर्गी की यह पांच नस्ल जो अंडा उत्पादन के लिए रहती है बेस्ट

उप मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ सुबोध गोयल ने लोकल 18 से बात करते हुए बताया कि अगर हम बात करें मुर्गियां चाहे वह अंडा उत्पादन के लिए रखे, चाहे बच्चे उत्पादन के लिए रखे, चाहे मीट उत्पादन के लिए रखें. इनकी सबकी वैरायटी (नस्ल) अलग-अलग होती है. उनको इस तरीके से डेवलप किया गया है जिससे कि कम समय में उनमें ज्यादा मीट का उत्पादन हो. अगर हम बात करे तो देसी नस्ले जो हमारे इंडिया में फेमस है एक असील है और दूसरी है कड़कनाथ (काला मांस). असील एक गमेबर्ड है जोकि 100 अंडे तक उत्पादन कर देता है वही दूसरा कड़कनाथ (काला मांसी) बोलते है. इसका भी अंडे का उत्पादन लगभग 100 के आसपास होता है. उसके बाद आती है डुएल परपज बर्ड उसको हम एक माध्यम वैरायटी कह सकते हैं.

जो कि हमारे देसी वैरायटी से ज्यादा अंडा उत्पादन करती है यह बर्ड हमें 200 से 280 अंडे तक दे देती है. जो हमारी सेंट्रल गवर्नमेंट की संस्था है ICR, IVRI और हैदराबाद यहां पर भी कुछ बर्ड की वैरायटी डेवलप की गई है जो डुएल परपज है एक सोनाली और दूसरी वनराज.

कम खाती हैं नहीं होती बीमारी

हम इन नस्ल को अपने घरों के आसपास आसानी से रख सकते हैं ना ही इनमें ज्यादा बीमारी आती है और ना ही इनको ज्यादा खाने की आवश्यकता पड़ती है, यह घरों से जो भी सब्जी का वेस्ट निकलता है उसी से ही अपना काम चला लेती है. उसके बाद दो प्रमुख जिन्हें हम कहेंगे जो स्पेशल अंडा उत्पादन के लिए होती है. वह व्हाइट लेगहॉर्न है जो की एक इटालियन बर्ड्स थी इसको बाद में अमेरिका में अंडा उत्पादन के लिए जेनेटिक की मॉडिफाई करके डेवलप किया गया. जो कि केवल और केवल अंडा उत्पादन के लिए ही डेवलप की गई है. जबकि दूसरी रोड आइलैंड रेड जोकि एक अमेरिकन बर्ड है और यह हल्के भूरे रंग की होती है.

जिसका अंडा भी हल्का ब्राउन रंग का ही होता है. व्हाइट लेगहॉर्न बर्ड एक बहुत ही अंडा उत्पादन के लिए बहुत ही पॉपुलर नस्ल है. 20 हफ्ते में यह नस्ल अंडा उत्पादन शुरू कर देती है. और इस मुर्गी की नस्ल की खासियत यह है कि 110 से लेकर 140 ग्राम तक फिड खाती है और 280 से 350 तक हमें अंडा उत्पादन करती है. मुर्गी की यह नस्ल अंडा उत्पादन के लिए हर प्रदेश में पाली जाती है और कमर्शियल पोल्ट्री फार्म के लिए बहुत उपयोगी है.



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