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US Tariff Relief : अमेरिका में तीन नवंबर को होने वाले मध्यावधि चुनावों से ठीक पहले देश के भीतर डीजल की कीमत आसमान छू रही है. इसी वजह से ट्रंप को रूस पर लगाए प्रतिबंधों में छूट दी है. अमेरिकी राष्ट्रपति के इस रुख से भारत पर लटक रही टैरिफ की तलवार हट गई है.
लिंडसे ओ. ग्राहम एक्ट में रूस से तेल-गैस खरीदने वाले प्रमुख आयात देशों पर 100 फीसदी टैरिफ लगाने का प्रावधान है.
नई दिल्ली. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस पर लगाए गए कई प्रतिबंधों, पाबंदियों और शुल्कों में छूट देने का ऐलान किया है. ये पाबंदियां लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट, 2026 के तहत लगाई गई थी. अमेरिका के इस फैसले से भारत को भी फायदा होगा. पिछले कुछ समय से अमेरिका लगातार नई दिल्ली पर मॉस्को से सस्ता कच्चा तेल और ईंधन न खरीदने का दबाव बना रहा था. ऐसा न करने पर भारी टैरिफ की धमकी भी मिल रही थी. हालांकि, भारत अब तक अमेरिका की इन धमकियों के आगे झुका नहीं है और लगातार रूस से तेल ले रहा है. अब अमेरिका में मध्यावधि चुनावों से ठीक पहले डीजल की बेकाबू होती कीमतों पर काबू पाने के लिए ट्रंप ने खुद रूस से 3 लाख टन से अधिक डीजल खरीदने और पाबंदियों में छूट देने का आदेश जारी कर दिया है.
लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट में रूसी से तेल-गैस खरीदने वाले प्रमुख आयात देशों पर 100 फीसदी और कुछ मामलों में 500 फीसदी तक टैरिफ लगाने का प्रावधान है. अब रूस को अमेरिका द्वारा छूट देने का सीधा असर भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर पड़ेगा. भारत 85 फीसदी से अधिक कच्चा तेल आयात करता है. रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद भारत ने बड़ी मात्रा में रूस से कच्चा तेल लेना शुरू किया है. अमेरिका के रूस पर नरम रुख से भारत बिना पाबंदियों डर से रूस से तेल खरीद सकता है. इससे देश की तेल कंपनियों को प्रतिस्पर्धी दरों पर कच्चा तेल खरीदकर घरेलू बाजार में ईंधन की कीमतें स्थिर रखने में काफी मदद मिलेगी.
पूरी तरह बेफिक्र होने की गुंजाइश नहीं
अमेरिकी कार्यकारी आदेश के तहत व्यापार प्रतिनिधि और वरिष्ठ अधिकारियों को वैश्विक स्तर पर रूस से होने वाली तेल-गैस खरीद पर कड़ी निगरानी बनाए रखने का निर्देश भी दिया गया है. चूंकि यह छूट राष्ट्रपति के विशेषाधिकार पर आधारित है और भविष्य की समीक्षा के अधीन है, इसलिए भारत को मिलने वाला वास्तविक लाभ इस बात पर निर्भर करेगा कि अमेरिकी प्रशासन जमीनी स्तर पर इन नियमों को किस हद तक लचीला बनाए रखता है.
चुनावी मजबूरी में ट्रंप ने दी ढील
अमेरिका में तीन नवंबर को होने वाले मध्यावधि चुनावों से ठीक पहले देश के भीतर डीजल की कीमत आसमान छू रही है. इसी वजह से ट्रंप को रूस पर अपनी सख्त नीतियों की समीक्षा करने पर मजबूर होना पड़ा है. अमेरिका में डीजल की दरें 6.52 डॉलर प्रति गैलन तक पहुंच गई, जिससे आम नागरिकों, किसानों और ट्रांसपोर्टरों को भारी नुकसान हो रहा है. इससे ट्रंप के खिलाफ असंतोष बढ़ रहा है. घरेलू बाजार में ईंधन की बढ़ती कीमत और महंगाई के राजनीतिक नुकसान से बचने के लिए राष्ट्रपति ट्रंप ने लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट 2026 के तहत मिले विशेषाधिकार का इस्तेमाल करते हुए रूस के प्रतिबंधों में छूट देने वाले कार्यकारी आदेश पर दस्तखत किए हैं.