Last Updated:
Phalodi Borewell Incident: राजस्थान के फलोदी जिले के लोहावट में 1050 फीट गहरे बोरवेल में गिरे 9 वर्षीय भोमाराम को करीब 40 घंटे के रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद बाहर निकाला गया, लेकिन उसकी जान नहीं बचाई जा सकी. बच्चा बोरवेल में करीब 640 फीट की गहराई पर फंसा हुआ था. गुरुवार दोपहर करीब 12 बजे हुए हादसे के बाद एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और स्थानीय विशेषज्ञों की टीमों ने बचाव अभियान शुरू किया. बोरवेल में पत्थर और लगातार पानी आने से रेस्क्यू में बार-बार बाधाएं आईं. आखिरकार देसी जुगाड़ की मदद से शुक्रवार रात करीब 3 बजे बच्चे को बाहर निकाला गया. शव को जिला अस्पताल की मोर्चरी में रखवाया गया है.
जोधपुर. राजस्थान के फलोदी जिले के लोहावट में 1050 फीट गहरे बोरवेल में गिरे 9 वर्षीय भोमाराम को करीब 40 घंटे की मशक्कत के बाद बाहर निकाल लिया गया, लेकिन उसे बचाया नहीं जा सका. मासूम को सुरक्षित निकालने के लिए एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और स्थानीय रेस्क्यू विशेषज्ञों की टीमों ने लगातार प्रयास किए. शुक्रवार रात करीब 3 बजे रेस्क्यू टीमों को सफलता मिली और बच्चे को बोरवेल से बाहर निकाला गया. इसके बाद उसके शव को जिला अस्पताल की मोर्चरी में रखवाया गया.
इस हादसे के बाद परिवार में मातम पसरा हुआ है. बच्चे को बचाने के लिए रेस्क्यू टीमों ने हरसंभव प्रयास किया, लेकिन बोरवेल के भीतर पत्थर होने और लगातार पानी आने के कारण अभियान में बार-बार बाधाएं आती रहीं. आखिरकार जब पारंपरिक तरीके से रेस्क्यू में मुश्किलें बढ़ीं तो देसी जुगाड़ की मदद से बच्चे को बाहर निकालने का प्रयास किया गया.
गुरुवार दोपहर हुआ था हादसा
बता दें कि भोमाराम गुरुवार दोपहर करीब 12 बजे 1050 फीट गहरे बोरवेल में गिर गया था. वह बोरवेल के भीतर करीब 640 फीट की गहराई पर जाकर अटक गया था. घटना की जानकारी मिलते ही बच्चे को बचाने के लिए रेस्क्यू अभियान शुरू किया गया. गहराई अधिक होने और बोरवेल के भीतर की परिस्थितियां चुनौतीपूर्ण होने के कारण बचाव दल को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा. बच्चे तक पहुंचने और उसे सुरक्षित बाहर निकालने के लिए लगातार कोशिशें जारी रहीं.
पत्थर और पानी ने बढ़ाई मुश्किलें
रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान बोरवेल में पत्थर होने और लगातार पानी आने से बचाव कार्य बार-बार प्रभावित हुआ. इन परिस्थितियों में टीमों को रणनीति बदलनी पड़ी. अभियान में बोरवेल रेस्क्यू के देसी विशेषज्ञ माधाराम और उनकी टीम ने भी अहम भूमिका निभाई. एनडीआरएफ के प्रवीण कुमार और एसडीआरएफ के जग्गूराम की टीम ने भी लगातार प्रयास किए. लंबे समय तक चले अभियान के बावजूद बच्चे को बचाया नहीं जा सका.
देसी जुगाड़ से निकाला बाहर
लगातार आ रही बाधाओं के बाद रेस्क्यू टीमों ने देसी जुगाड़ की मदद से बच्चे को बाहर निकालने का प्रयास किया. कई घंटों की मशक्कत के बाद शुक्रवार रात करीब 3 बजे टीमों को सफलता मिली. भोमाराम को बोरवेल से बाहर निकाल लिया गया, लेकिन तब तक उसकी जान नहीं बचाई जा सकी. इसके बाद शव को जिला अस्पताल की मोर्चरी में रखवाया गया. करीब 40 घंटे तक चले इस रेस्क्यू ऑपरेशन का अंत बेहद दुखद रहा.