How Iran Lead Gulf War: Iran 135 attacks| 7 महीने 84 ठिकाने और 135 से ज्यादा हमले ईरान ने रखी खाड़ी की गर्दन पर लात तेल-गैस छोड़ो पानी तक को तरसाया

How Iran Lead Gulf War: Iran 135 attacks| 7 महीने 84 ठिकाने और 135 से ज्यादा हमले ईरान ने रखी खाड़ी की गर्दन पर लात तेल-गैस छोड़ो पानी तक को तरसाया


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US-Iran War Update: ईरान-अमेरिका युद्ध में कुल 7 महीने के अंदर ईरान ने वो रणनीति अपनाई है कि पूरे खाड़ी इलाके को ही थर्रा डाला. हालात ये हो गए कि गल्फ के इंफ्रास्ट्रक्चर को गजब का नुकसान पहुंचाया. सिर्फ तेल और गैस तक ही मामला सीमित नहीं रहा, अमेरिका के सहयोगियों को तोड़ने के लिए ईरान ने उनका पानी तक का रास्ता तबाह कर डाला.

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ईरान ने खाड़ी देशों की हर कमजोर नस पर किया वार.

ये बात हर किसी के जेहन में खटक रही थी कि ईरान के पास वो कौन सा अस्त्र है, जिसके बल पर वो अमेरिका को लड़ाई में इतने दिन उलझाए रहा. इतना ही नहीं वो अमेरिका की शर्तों के आगे झुक भी नहीं रहा है. दरअसल ये उसके हथियार कम और सधी हुई रणनीति ज्यादा थी, जिसने अमेरिका के सभी सहयोगियों को रुलाकर रखा है. युद्ध के बीच ईरान ने खाड़ी देशों के महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को निशाना बनाकर अपनी सैन्य रणनीति से दुनिया को चौंका दिया है. समाचार एजेंसी रॉयटर्स की जांच के मुताबिक 28 फरवरी से शुरू हुए युद्ध के बाद ईरान ने खाड़ी क्षेत्र में कम से कम 84 महत्वपूर्ण ठिकानों पर ड्रोन और मिसाइलों से 135 से अधिक हमले किए.

ईरान की ओर से सटीक तरीके से किए गए इन हमलों में तेल निर्यात केंद्र, गैस संयंत्र, हवाई अड्डे, बिजलीघर, पानी साफ करने वाले संयंत्र और औद्योगिक इकाइयां प्रभावित हुई हैं. रिपोर्ट के मुताबिक ईरान की रणनीति केवल सैन्य ठिकानों को नुकसान पहुंचाने तक सीमित नहीं है. वह ऐसे उपकरणों और व्यवस्थाओं को निशाना बना रहा है, जिनके बंद होने से पूरे औद्योगिक तंत्र और अर्थव्यवस्था पर असर पड़ता है. इससे अमेरिका और उसके सहयोगी देशों की रक्षा व्यवस्था पर भी दबाव बढ़ा है.

फुजैराह बंदरगाह पर बार-बार हमला

संयुक्त अरब अमीरात का फुजैराह बंदरगाह ईरान के हमलों का प्रमुख निशाना बना क्योंकि होर्मुज जलडमरूमध्य के बाहर स्थित यह बंदरगाह तेल की आपूर्ति के लिए बेहद अहम है. रॉयटर्स के मुताबिक युद्ध शुरू होने के बाद यहां कम से कम 19 बार हमले हुए. इनसे तेल को जहाजों तक पहुंचाने वाली पाइपलाइन व्यवस्था और दूसरे जरूरी उपकरणों को नुकसान पहुंचा. 4 मई के हमले के बाद यहां से रिफाइंड पेट्रोलियम उत्पादों का निर्यात लगभग एक महीने तक ठप रहा. इस बंदरगाह पर हमले वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए भी बड़ा खतरा बने और अमेरिका पर दबाव बढ़ा.

खाड़ी देशों ने को ईरान ने दिया खूब दर्द.

कतर और सऊदी अरब के एनर्जी सेंटर पर निशाना

कतर के रास लफान गैस संयंत्र पर हुए हमलों में गैस को तरल बनाने वाले महत्वपूर्ण उपकरण क्षतिग्रस्त हो गए. कतर एनर्जी के प्रमुख साद अल-काबी के मुताबिक इनकी मरम्मत में तीन से पांच साल लग सकते हैं. इस नुकसान से दुनिया की लगभग 20 फीसदी तक एलएनजी आपूर्ति प्रभावित होने का खतरा पैदा हुआ. सऊदी अरब में भी तेल रिफाइनरियों और पाइपलाइनों को निशाना बनाया गया. सितंबर में ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन के पंपिंग स्टेशनों पर हमलों से तेल की आपूर्ति बाधित हुई. यह पाइपलाइन होर्मुज जलडमरूमध्य से बचकर लाल सागर तक तेल पहुंचाने का प्रमुख विकल्प है.

कुवैत में पानी और बिजली की सप्लाई पर खतरा

इतना ही नहीं अपने सबसे बड़े हमले में ईरान ने कुवैत के 8 बिजली और समुद्री पानी को पीने योग्य बनाने वाले संयुक्त संयंत्रों में से कम से कम 4 को निशाना बनाया. कुवैत अपनी पीने के पानी की करीब 90 फीसदी जरूरत समुद्री पानी को साफ करके पूरी करता है. ऐसे में इन संयंत्रों को नुकसान पहुंचने से देश में पानी का गंभीर संकट पैदा हो सकता है. यूएई में अमेजन के डेटा सेंटर और अबू धाबी की बड़ी एल्युमिनियम उत्पादन इकाई भी प्रभावित हुई. एल्युमिनियम संयंत्र की सभी 1262 उत्पादन इकाइयों का संचालन बंद हो गया था. कंपनी के मुताबिक उत्पादन सामान्य होने में 2027 तक का समय लग सकता है.

खाड़ी देशों ने दबाए रखा ईरान के 135 हमलों का दर्द (रॉयटर्स)

महंगे एयर डिफेंस धरे के धरे रहे

ईरान के सस्ते ड्रोन और मिसाइलों से ऐसे संवेदनशील उपकरणों पर हमला किया, जिन्हें रोकने के लिए महंगे डिफेंस सिस्टम का इस्तेमाल करना पड़ता है. कई खाड़ी सरकारों ने नुकसान की वजह सफलतापूर्वक रोकी गई मिसाइलों का मलबा बताया, लेकिन रॉयटर्स से बातचीत करने वाले विशेषज्ञों ने महत्वपूर्ण उपकरणों को सीधे निशाना बनाए जाने की आशंका जताई. इन हमलों से तेल की कीमतों में तेजी आई और मरम्मत पर भारी खर्च का दबाव बढ़ा. ईरान की यह रणनीति अमेरिका और उसके सहयोगियों पर आर्थिक दबाव बनाने के साथ भविष्य की शांति वार्ताओं में अपनी स्थिति मजबूत करने का प्रयास भी है. हालांकि इन हमलों से आम नागरिकों, क्षेत्रीय सुरक्षा और वैश्विक अर्थव्यवस्था को होने वाला नुकसान भी लगातार बढ़ रहा है.



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