गया के किसान ने मोती पालन से किया कमाल, 10 कट्ठा तालाब में 4000 सीप से 12 लाख
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Gaya Pearl Farming: मोती पालन एक ऐसा व्यवसाय है, जिसे अगर सही देखभाल और रखरखाव किया जाए तो कम लागत में 5 गुना से अधिक मुनाफा मिल जाता है. बिहार में भी कई किसान मोती पालन के व्यवसाय से जुड़े हुए हैं. गया जिले के मानपुर प्रखंड के बरेव गांव के रहने वाले किसान अजय कुमार मेहता पिछले 4 सालों से मोती पालन के कारोबार से जुड़े हुए हैं. वह इससे अच्छी आमदनी कर रहे हैं. बता दें कि वह 10 कट्ठा के तालाब में इस वर्ष 4 हजार सीप डाले हुए हैं. ऐसे में किसान को उम्मीद है कि 7-8 हजार मोती का आसानी से पालन हो जाएगा.
किसान अजय कुमार मेहता ने बताया कि मोती पालन में प्रत्येक सीप पर इस बार लगभग 50 रुपये की लागत आई है. अभी तक लगभग 3 लाख रुपए लागत आ चुकी है, जिसमें सरकार के द्वारा सब्सिडी भी दी जाएगी. उन्होंने कहा कि इस बार वैज्ञानिक तकनीक से मोती पालन कर रहे हैं, जिसमें मृत्यु दर न के बराबर है.
एक सीप में ऑपरेशन के बाद दो न्यूक्लियस डाला जाता है और इस तरह लगभग 4000 सीप में 8000 न्यूक्लियस डाले जाएंगे जो 18 से 20 महीने के बाद मोती तैयार हो जाती है. इन्हें उम्मीद है कि इस बार 90% से अधिक मोती तैयार हों जाएगी.
किसान ने बताया कि उन्होंने पश्चिम बंगाल से सीप मंगवाया था और वहां से लाने के बाद सबसे पहले एक छोटे से तालाब में रखकर सीप को क्वॉरेंटाइन किया जाता है, इसके बाद तालाब से निकाल कर प्रत्येक सीप का सर्जरी किया जाता है और उसमें दो न्यूक्लियस डाला जाता है. सर्जरी करने के बाद सीप को 24 घंटे तक आईसीयू में रखा जाता है. इसके बाद फिर बड़े तालाब में डाल दिया जाता है. इस बार बास्केट विधि से मोती पालन कर रहे हैं और इसमें मृत्यु दर कम रहने की उम्मीद है.
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