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Dausa News: दौसा में पंचायतीराज चुनाव ड्यूटी कटवाने के लिए कर्मचारियों की लंबी कतार लग रही है. मंत्री और विधायकों के फोन भी आ रहे हैं. जिला कलेक्टर सौम्या झा ने दावों की जांच के लिए मेडिकल बोर्ड गठित किया है. कोई अपनी मां की बीमारी का हवाला दे रहा है, तो कोई बेटे या बेटी की देखभाल की जिम्मेदारी बता रहा है. कुछ कर्मचारी माता-पिता की देखभाल के लिए परिवार में खुद को इकलौता होने की बात कह रहे हैं.
दौसा में चुनाव ड्यूटी कटवाने के लिए लगी कर्मचारियों की कतार.
इस बार चुनाव ड्यूटी में तैनात पोलिंग पार्टियों को पांच दिन तक मतदान केंद्रों पर रहना होगा. इसके साथ ही दिवाली का त्योहार भी नजदीक है. ऐसे में कई कर्मचारी पांच दिन की ड्यूटी और त्योहार के बीच राहत पाने की कोशिश में जुटे हैं. ड्यूटी कटवाने के लिए जिला परिषद में लगातार प्रार्थना पत्र दिए जा रहे हैं.
किसी की मां बीमार, तो कोई बच्चों की देखभाल का दे रहा हवाला
ड्यूटी से नाम हटवाने के लिए दिए जा रहे प्रार्थना पत्रों में कर्मचारियों ने अलग-अलग कारण बताए हैं. कोई अपनी मां की बीमारी का हवाला दे रहा है, तो कोई बेटे या बेटी की देखभाल की जिम्मेदारी बता रहा है. कुछ कर्मचारी माता-पिता की देखभाल के लिए परिवार में खुद को इकलौता होने की बात कह रहे हैं. वहीं, कई कर्मचारी खुद को बीमार बताकर चुनाव ड्यूटी से राहत मांग रहे हैं.
मेडिकल बोर्ड करेगा दावों की जांच
कर्मचारियों की ओर से दिए जा रहे आवेदनों के बीच जिला प्रशासन ने भी जांच की व्यवस्था की है. दौसा जिला कलेक्टर सौम्या झा ने मेडिकल बोर्ड गठित किया है. इस बोर्ड के जरिए बीमारी के आधार पर ड्यूटी कटवाने के लिए दिए गए प्रार्थना पत्रों की सत्यता की जांच की जा रही है. यानी केवल बीमारी का हवाला देने से ड्यूटी से राहत मिलना तय नहीं है, बल्कि दावे की जांच भी होगी. फिलहाल दौसा जिला परिषद में चुनाव ड्यूटी से राहत पाने के लिए कर्मचारियों की आवाजाही जारी है. अब यह जांच के बाद ही स्पष्ट होगा कि किन कर्मचारियों को वास्तविक कारणों के आधार पर ड्यूटी से छूट मिलती है.