जबलपुर, भोपाल और इंदौर मध्य प्रदेश के तीन बड़े शहर हैं. अब इन शहरों को जोड़ने वाले एक्सप्रेस-वे के पास इंडस्ट्रियल कॉरिडोर बनाने को मंजूरी कैबिनेट से मिल गई है. इंदौर-भोपाल-जबलपुर के बीच प्रस्तावित करीब 600 किमी लंबे एक्सप्रेस-वे के आसपास चुनिंदा जगहों पर नए औद्योगिक क्षेत्र बनाए जाएंगे. इसके लिए एक नई कंपनी का गठन किया गया है. इसका नाम जबलपुर इंदौर इकोनॉमिक कॉरिडोर डेलवपमेंट कंपनी लिमिटेड होगा. इसके अलावा यह कंपनी पूरी तरह से राज्य शासन के स्वामित्व में होगी और मुख्यमंत्री मोहन यादव इसके गवर्निंग काउंसिल के अध्यक्ष होंगे.
शुरुआत में 100 करोड़ रुपए देगी राज्य सरकार
शुरुआत में राज्य सरकार इसके लिए 100 करोड़ रुपए की पूंजी देगी. बताया जा रहा है कि कंपनी पर पूरी तरह से मध्य प्रदेश सरकार का शासन रहेगा. मुख्यमंत्री मोहन यादव की अध्यक्षता में एक गवर्निंग काउंसिल गठित की जाएगी. इसमें उपाध्यक्ष नियुक्त किए जाएंगे. कंपनी को इकॉनोमिक हब के तेजी के विकास के लिए को भूमि की पहचान, भूमि प्रबंधन, भूमि विकास, जोनिंग, मास्टर प्लानिंग, ले-आउट, भू-आवंटन, लीज/सब-लीज, मोनेटाइजेशन और बुनियादी ढांचे को विकसित करने की ताकत दी जाएगी. बताया जा रहा है कि प्रोजेक्ट के लिए अगर वन भूमि की जरूरत हुई, तो उसकी शर्तों की पूर्ति के लिए जमीन उपलब्ध कराई जाएगी.
इसके अलावा कंपनी को मध्य प्रदेश ईज ऑफ डूइंग बिजनेस अधिनियम के तहत इकॉनोमिक हब बनाने के लिए नोडल एजेंसी के रूप में ताकत मिलेगी. यह कंपनी सड़क नहीं बनाएगी. कंपनी का पूरा फोकस उद्योग, निवेश और रोजगार पर रहेगा.
इन जिलों को होगा सीधा फायदा
जबलपुर, नरसिंहपुर, रायसेन, इंदौर, भोपाल, देवास, सीहोर, विदिशा, सागर और दमोह जिलों को सीधा फायदा होने की उम्मीद है. कंपनी के माध्यम से औद्योगिक पार्क, सेक्टोरल पार्क जैसे फूड पार्क, एग्री-प्रोसेसिंग पार्क, लॉजिस्टिक्स पार्क, टेक्नोलॉजी/आईटी पार्क, ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर बनाए जाएंगे.
6 लाख से ज्यादा रोजगार मिलने की संभावना
मुख्यमंत्री मोहन यादव की तरफ से बताया गया है कि जबलपुर, नरसिंहपुर, रायसेन, बड़ा बेल्ट है और यह कई प्रकार की संभावनाओं वाला क्षेत्र है. यहां कृषि और टूरिज्म भी है. इसके अलावा सभी प्रकार की कनेक्टिविटी भी मौजूद है. मध्य प्रदेश के पास पानी, बिजली और सड़क की उपलब्धता है. जब उद्योग आएंगे, तो इसका लाभ हमें मिलेगा. इकॉनोमिक कॉरिडोर के पास हम पूरे टाउनशिप का एरिया विकसित करेंगे.
प्रोजेक्ट के शुरुआती चरण में 3000 से 10000 एकड़ तक भूमि विकसित करने की योजना है. इसके अलावा आने वाले तीन साल में 3 लाख करोड़ से अधिक के निवेश और 6 लाख से अधिक रोजगार के अवसर बनने की संभावना रहेगी.