नई दिल्ली. जियो प्लेटफॉर्म्स ने कल आईपीओ के लिए रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (RHP) दाखिल किया था. जियो आईपीओ 21 अक्टूबर को खुलेगा. आज 16 अक्टूबर को जियो प्लेटफॉर्म्स का टॉप मैनेजमेंट एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर रहा है. इसमें वे जियो आईपीओ और कंपनी के भविष्य की रणनीतियों के बारे में बता रहे हैं. प्रेस कांफ्रेंस में रिलायंस रिटेल वेंचर्स लिमिटेड की एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर और रिलायंस इंडस्ट्रीज की निदेशक ईशा अंबानी ने बताया कि जियो कैसे शुरू हुई. उन्होंने बताया कि किस तरह एक निजी अनुभव ने भारत में डिजिटल कनेक्टिविटी के बड़े बदलाव की नींव रखी और कंपनी ने किन सिद्धांतों पर काम करते हुए इसे इस मुकाम तक पहुंचाया.
ईशा अंबानी ने बताया कि यह वाकया 2009-2010 के आसपास का है, जब वे और उनके भाई आकाश अंबानी अमेरिका में कॉलेज की पढ़ाई कर रहे थे. छुट्टियों में जब दोनों मुंबई स्थित अपने घर आए हुए थे, तब उन्हें अपना एक कॉलेज असाइनमेंट ऑनलाइन जमा करना था. उन्होंने कहा, “मैंने असाइनमेंट सबमिट करने की कोशिश की, लेकिन दुर्भाग्य से इंटरनेट काम नहीं कर रहा था और मैं अपना असाइनमेंट जमा नहीं कर पाई.
भारत क्यों रहे पीछे
ईशा अंबानी ने कहा कि हमने ये चर्चा कि की भारत को दुनिया से पीछे क्यों रहना चाहिए? हमें भी पश्चिमी देशों जैसी इंटरनेट कनेक्टिविटी क्यों नहीं मिलनी चाहिए. आकाश का मानना था कि इस समस्या का समाधान एक डिजिटल टेक्नोलॉजी प्लेटफॉर्म कंपनी बनाने में है. ईशा ने कहा कि इसके कुछ वर्ष पश्चात 2016 में जियो को आधिकारिक रूप से लॉन्च किया गया.
दीर्घकालिक सोच, स्केल और एग्जीक्यूशन
ईशा अंबानी ने रिलायंस के कारोबारी मॉडल और जियो के निर्माण के पीछे काम करने वाले प्रमुख स्तंभों के बारे में भी बताया. उन्होंने कहा कि कंपनी केवल आज या कल को ध्यान में रखकर फैसले नहीं लेती, बल्कि आने वाले कई दशकों में होने वाले बदलावों को ध्यान में रखकर योजनाएं बनाती है. उन्होंने कहा, “रिलायंस में हम केवल आज या कल के बारे में सोचकर फैसले नहीं लेते, बल्कि हम यह भी विचार करते हैं कि आने वाले कई दशकों में क्या बदलाव होने वाले हैं.”
ईशा अंबानी ने कहा कि दूसरी महत्वपूर्ण बात है बड़े पैमाने पर कारोबार का विस्तार (Scale). हमारे लिए पैमाने से जुड़ा सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि जिस उद्योग में हम काम करते हैं, उसकी अर्थव्यवस्था को बुनियादी रूप से बदलने के लिए कितने बड़े स्तर पर काम करने की जरूरत है. रिलायंस को समझने का मतलब है यह समझना कि हम एक ऐसी कंपनी हैं, जिसमें तकनीक को बहुत महत्व दिया जाता है. हमारी पूरी संस्था में योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू करना कार्यशैली का अहम हिस्सा है. यही हमें अपने लक्ष्य हासिल करने और अपने मिशन के प्रति प्रतिबद्ध रहने में मदद करता है.
वित्तीय अनुशासन रिलायंस के डीएनए का हिस्सा
ईशा अंबानी ने कहा कि वित्तीय अनुशासन रिलायंस के डीएनए का हिस्सा है. उन्होंने 2019 का उदाहरण देते हुए बताया कि कंपनी के चेयरमैन मुकेश अंबानी ने शेयरधारकों से 2021 तक रिलायंस को नेट डेट-फ्री करने का वादा किया था. 2020 में कोविड महामारी आई. महामारी के कारण वैश्विक अर्थव्यवस्था में मंदी भी छा गई. बावजूद कंपनी ने तय समय से 9 महीने पहले ही इस वादे को पूरा कर दिखाया. उन्होंने कहा कि कंपनी मुख्य रूप से दो वित्तीय लक्ष्यों पर काम करती है—पहली एक मजबूत और सुरक्षित बैलेंस शीट बनाए रखना और दूसरा लगातार बढ़ता हुआ नकदी प्रवाह (Cash Flow) हासिल करना, जिससे प्राप्त पूंजी को पुनः विकास में लगाया जा सके.
धीरूभाई अंबानी की विरासत और तीसरी पीढ़ी की प्रतिबद्धता
ईशा अंबानी ने कहा कि उनके दादाजी स्वर्गीय धीरूभाई अंबानी द्वारा रिलायंस को 1977 में सूचीबद्ध कराए जाने के बाद से कंपनी ने सालाना लगभग 29 प्रतिशत का रिटर्न दिया है. ईशा ने कहा, “आज उस घटना को लगभग 50 साल हो चुके हैं. तब से रिलायंस इंडस्ट्रीज ने सालाना आधार पर लगभग 29 प्रतिशत का रिटर्न दिया है. आज मैं अपने दादाजी को गहरे स्नेह और कृतज्ञता के साथ याद करती हूं. उनके लिए रिलायंस कभी भी केवल एक कंपनी नहीं थी. रिलायंस एक ऐसा वादा है कि हर भारतीय को भारत की विकास यात्रा में भाग लेने का अवसर मिलना चाहिए. हर भारतीय को देश की समृद्धि में हिस्सेदार बनने और बेहतर भविष्य पर विश्वास करने का मौका मिलना चाहिए.”
ईशा अंबानी ने कहा कि आकाश, अनंत और वो स्वयं तीसरी पीढ़ी के रूप में संस्थापक धीरूभाई अंबानी के विजन और लाखों शेयरधारकों के विश्वास को आगे बढ़ाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं. उनके अनुसार, रिलायंस का मूल उद्देश्य हर भारतीय को देश की विकास यात्रा और समृद्धि का हिस्सा बनने का अवसर देना है.
(डिस्क्लेमर – नेटवर्क18 और टीवी18 कंपनियां चैनल/वेबसाइट का संचालन करती हैं, जिनका नियंत्रण इंडिपेंडेट मीडिया ट्रस्ट करता है, जिसमें रिलायंस इंडस्ट्रीज एकमात्र लाभार्थी है.)