बागेश्वर: सरस मार्केट की बागनाथ डेरी से दिल्ली-मुंबई तक पहुंचा शुद्ध घी, ग्रामीण पशुपालकों की भी चमकी किस्मत

बागेश्वर: सरस मार्केट की बागनाथ डेरी से दिल्ली-मुंबई तक पहुंचा शुद्ध घी, ग्रामीण पशुपालकों की भी चमकी किस्मत


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Bageshwar Pure Ghee: पहाड़ के शुद्ध दूध और पारंपरिक स्वाद की खुशबू अब महानगरों तक अपनी पहचान बना रही है. उत्तराखंड के बागेश्वर स्थित ‘बागनाथ डेरी’ न केवल लोगों को शुद्ध घी और ताजे डेयरी उत्पाद उपलब्ध करा रही है, बल्कि ग्रामीण पशुपालकों की आजीविका को भी नई रफ्तार दे रही है. सरस मार्केट से शुरू हुई इस पहल का कमाल ऐसा है कि यहां का तैयार शुद्ध घी आज दिल्ली, मुंबई और गुजरात जैसे बड़े शहरों की रसोई तक पहुंच रहा है.

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Bageshwar Pure Ghee: अगर आप उत्तराखंड के बागेश्वर में रहते हैं और अच्छे घी की तलाश कर रहे हैं, तो आज हम आपको एक ऐसी जगह के बारे में बताने वाले हैं जहां पर आपको शुद्ध घी मिलेगा. इसके लिए आपको जिला अस्पताल रोड पर स्थित सरस मार्केट में जाना होगा, जहां बागनाथ डेरी का संचालन होता है. डेरी का संचालन कर रहीं प्रेमा कोरंगा बताती हैं कि वह ग्रामीणों से शुद्ध दूध खरीदकर दूध, दही, छाछ और घी बेचती हैं, जिसका लाभ ग्रामीणों को भी मिलता है. डेरी के घी की मांग बागेश्वर से बाहर बड़े शहरों में भी है.

गांव के दूध से तैयार किए जाते हैं डेयरी उत्पाद
प्रेमा कोरंगा बताती हैं कि वह आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के पशुपालकों से दूध खरीदती हैं. इसके बाद दूध और उससे तैयार होने वाले उत्पादों को ग्राहकों तक पहुंचाती हैं. डेरी में दूध, दही, छाछ और घी मिलता है. इस पहल के माध्यम से स्थानीय स्तर पर उत्पादों की बिक्री के साथ ग्रामीणों के दूध को बाजार मिल रहा है.

दिल्ली-मुंबई समेत बड़े शहरों तक पहुंच रहा घी
प्रेमा कोरंगा बताती हैं कि उनके यहाँ तैयार घी की मांग बागेश्वर के बाहर भी है. वह अब तक दिल्ली, मुंबई, देहरादून और गुजरात जैसे शहरों को घी भेज चुकी हैं. इससे स्थानीय स्तर पर तैयार होने वाले उत्पादों को दूसरे शहरों के ग्राहकों तक पहुंचाने का मौका मिल रहा है.

ग्रामीण पशुपालकों को मिल रहा सीधा लाभ
बागनाथ डेरी की इस पहल से ग्रामीण पशुपालकों को अपने दूध की बिक्री के लिए एक स्थानीय माध्यम मिल जाता है. प्रेमा कोरंगा का कहना है कि वह ग्रामीणों से दूध खरीदकर उसका इस्तेमाल डेरी उत्पाद तैयार करने में करती हैं. इससे पशुपालकों को दूध बेचने का मौका मिलता है और उनकी अच्छी आमदनी हो जाती है. कई ग्रामीण तो महीने में 10-15 हजार रुपये का दूध बेचकर जाते हैं. डेरी में इसी दूध से घी बनता है और घी 950 से 1000 रुपये प्रति किलो बिकता है.

स्थानीय उत्पादों को बाजार तक पहुंचाने की पहल
बागेश्वर के सरस मार्केट में संचालित बागनाथ डेरी स्थानीय दूध से जुड़े उत्पादों की बिक्री के जरिए ग्रामीण पशुपालकों और शहर के ग्राहकों के बीच एक माध्यम बनकर काम कर रही है, जिससे स्थानीय पशुपालकों को अच्छा बाजार मिल रहा है. पहाड़ी क्षेत्रों में पशुपालन ग्रामीण परिवारों की आय का एक मुख्य साधन है. ऐसे में स्थानीय स्तर पर दूध खरीदने और उससे विभिन्न उत्पाद तैयार करने वाली छोटी डेरी ग्रामीणों की आर्थिक स्थिति को मजबूत कर रही है.



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